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फर्रुखाबाद जेल में बवाल के बाद वाराणसी जेल प्रशासन अलर्ट पर
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 26 Mar 2017 11:39 PM IST
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फर्रुखाबाद जेल में बवाल के बाद बढ़ी चौकसी
- फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद जेल में हुए बवाल के बाद रविवार को यहां भी सेंट्रल जेल और जिला जेल में एहतियातन चौकसी और सख्त कर दी गई। साल भर पहले यहां जिला जेल में साढ़े सात घंटे तक जमकर उपद्रव हुआ था। उसके बाद जेल प्रशासन को नए सिरे से सुरक्षा रणनीति तय करनी पड़ी थी।
सेंट्रल और जिला जेल प्रशासन का दावा है कि आंतरिक खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने के साथ ही जेल की हर गतिविधि की नियमित निगरानी की जा रही है। हालांकि पिछले साल हुए बवाल की जांच में जेल प्रशासन अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि किस कारण से ऐसा हुआ था और चूक कहां हुई थी।
दरअसल, दो अप्रैल 2016 को अदालत में पेशी के लिए ले जाने के दौरान पैसा मांगने का आरोप लगाकर जिला कारागार के बंदियों और बंदीरक्षकों में हाथापाई शुरू हुई। इसके बाद हालात इस कदर बिगड़े कि फोर्स को कई राउंड हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी।
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इसी दौरान बंदियों ने बंदीरक्षकोें, जेल पुलिस और बाहर से गई फोर्स पर जमकर पथराव किया था। करीब साढ़े सात घंटे तक जेल पूरी तरह बंदियों के कब्जे में रहा। उपद्रवी बंदियों ने तत्कालीन जेल अधीक्षक आशीष तिवारी को बंधक बना लिया था और डिप्टी जेलर अजय राय पर जानलेवा हमला किया था।
आधा दर्जन अन्य जेलकर्मी जख्मी हुए थे। किसी तरह से माहौल सामान्य हुआ तो तत्कालीन जेल अधीक्षक और जेलर विजय राय को कार्यमुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही बवाली के तौर पर चिह्नित 20 बंदियों को पूर्वांचल की अन्य जेलों में शिफ्ट किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन जेल मंत्री जिला कारागार पहुंचे और पत्रकार वार्ता कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
बावजूद इसके घटना के कारणों और जांच रिपोर्ट के तथ्यों से अब तक परदा नहीं उठ सका है। इस बारे में प्रभारी डीआईजी जेल केदार राम ने बताया कि शासन को जांच रिपोर्ट भेजी गई थी। आगे क्या हुआ, इसके बारे में जानकारी नहीं है। उधर, रविवार दोपहर बाद फर्रुखाबाद जेल बवाल की जानकारी मिलने पर जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. बीडी पांडेय ने सभी बैरकों की निगरानी बढ़ाने के साथ ही खुफिया तंत्र को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।
बताया कि बंदीरक्षकों और अन्य स्टाफ को पहले से यह हिदायत दी जा चुकी है कि बंदियों के साथ अच्छा सलूक करें। जेल के अंदर हर तरह की गतिविधियों पर हमारा पूरा ध्यान है।
बता दें कि फरवरी 2012 में सेंट्रल जेल में भी कैदियों और जेल प्रशासन के बीच मारपीट, पथराव, फायरिंग की घटना हुई थी। कैदियों ने जेल ब्रेक की कोशिश की थी।
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सेंट्रल और जिला जेल प्रशासन का दावा है कि आंतरिक खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने के साथ ही जेल की हर गतिविधि की नियमित निगरानी की जा रही है। हालांकि पिछले साल हुए बवाल की जांच में जेल प्रशासन अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि किस कारण से ऐसा हुआ था और चूक कहां हुई थी।
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दरअसल, दो अप्रैल 2016 को अदालत में पेशी के लिए ले जाने के दौरान पैसा मांगने का आरोप लगाकर जिला कारागार के बंदियों और बंदीरक्षकों में हाथापाई शुरू हुई। इसके बाद हालात इस कदर बिगड़े कि फोर्स को कई राउंड हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी।
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इसी दौरान बंदियों ने बंदीरक्षकोें, जेल पुलिस और बाहर से गई फोर्स पर जमकर पथराव किया था। करीब साढ़े सात घंटे तक जेल पूरी तरह बंदियों के कब्जे में रहा। उपद्रवी बंदियों ने तत्कालीन जेल अधीक्षक आशीष तिवारी को बंधक बना लिया था और डिप्टी जेलर अजय राय पर जानलेवा हमला किया था।
आधा दर्जन अन्य जेलकर्मी जख्मी हुए थे। किसी तरह से माहौल सामान्य हुआ तो तत्कालीन जेल अधीक्षक और जेलर विजय राय को कार्यमुक्त कर दिया गया। इसके साथ ही बवाली के तौर पर चिह्नित 20 बंदियों को पूर्वांचल की अन्य जेलों में शिफ्ट किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन जेल मंत्री जिला कारागार पहुंचे और पत्रकार वार्ता कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
बावजूद इसके घटना के कारणों और जांच रिपोर्ट के तथ्यों से अब तक परदा नहीं उठ सका है। इस बारे में प्रभारी डीआईजी जेल केदार राम ने बताया कि शासन को जांच रिपोर्ट भेजी गई थी। आगे क्या हुआ, इसके बारे में जानकारी नहीं है। उधर, रविवार दोपहर बाद फर्रुखाबाद जेल बवाल की जानकारी मिलने पर जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. बीडी पांडेय ने सभी बैरकों की निगरानी बढ़ाने के साथ ही खुफिया तंत्र को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।
बताया कि बंदीरक्षकों और अन्य स्टाफ को पहले से यह हिदायत दी जा चुकी है कि बंदियों के साथ अच्छा सलूक करें। जेल के अंदर हर तरह की गतिविधियों पर हमारा पूरा ध्यान है।
बता दें कि फरवरी 2012 में सेंट्रल जेल में भी कैदियों और जेल प्रशासन के बीच मारपीट, पथराव, फायरिंग की घटना हुई थी। कैदियों ने जेल ब्रेक की कोशिश की थी।