बनारस के सरकारी अस्पतालों के ‘बीमार’ सिस्टम को आखिरकार मिला ‘ऑक्सीजन’
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शनिवार तक अस्त-व्यस्त रही ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था रविवार को काफी हद तक दुरुस्त नजर आई। सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम की इधर-उधर लटकतीं पाइपों, जहां-तहां पड़े ऑक्सीजन सिलेंडर व अन्य उपकरणों को व्यवस्थित कर लिया गया।
ये सभी तैयारियां मरीजों की सहूलियत या फिर सुविधा को बेहतर बनाने से अधिक इस लिहाज से की गईं कि यदि कोई उच्चाधिकारी जीवन रक्षक उपकरणों की जांच के लिए आए तो कम से कम इतना इंतजाम जरूर दिखे कि किसी तरह की कार्रवाई की नौबत न आने पाए।
गोरखपुर की घटना के बाद प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के स्तर से भी जीवन रक्षक उपकरणों को पूरी तरह व्यवस्थित करने के कड़े निर्देश जारी किए गए थे। शनिवार की शाम जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने भी मंडलीय अस्पताल पहुंचकर ऑक्सीजन सिस्टम सहित अन्य तैयारियों का जायजा लिया था।
साथ ही, किसी तरह की लापरवाही न होने देने की कड़ी हिदायत दी थी। असर यह हुआ कि जिन ऑक्सीजन सिलेंडरों की मॉनीटरिंग सूची महीनों से अपडेट नहीं थी, वह रविवार की दोपहर तक अपडेट कर ली गई।
जिला महिला अस्पताल की अस्त-व्यस्त सेंट्रल ऑक्सीजन यूनिट को व्यवस्थित करते हुए वहां जंबो सिलेेंडर लगा दिए गए। मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी, चिल्ड्रेन वार्ड सहित अन्य जगहों पर रखे आक्सीजन सिलेंडर की मानीटरिंग सूची भी अपडेट मिली।
सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि सभी चिकित्साधिकारियों को जीवन रक्षक उपकरणों को चौबीसों घंटे पूरी तरह दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी तरह की समस्या पर तत्काल अवगत कराने को कहा गया है।