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सात समुंदर पार पहुंच रही बनारसी मोतियों की चमक, आप भी जान लीजिए कारण
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 07 Dec 2017 02:43 PM IST
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70 देशों को निर्यात किए जाते हैं बनारसी हस्तनिर्मित मोती
- फोटो : अमर उजाला
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बात मोतियों की हो तो बनारस में बनने वाले कांच के हस्तनिर्मित मोतियों का आकर्षण सबसे ऊपर ठहरता है। भारत में ही नहीं, दुनिया भर में इसके मुरीद हैं। यहां निर्मित मोतियों का निर्यात दुनिया के 70 देशों में किया जाता है। वाराणसी के बड़ा लालपुर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल में इन मोतियों की चमक और निखर रही है। जीआई पंजीकृत इस शिल्प को हस्तकला संकुल में शानदार डिस्प्ले के साथ प्रदर्शित किया गया है। यहां आने वाले खरीदार और शिल्प प्रेमियों को भी इन मोतियों की चमक भा रही है।
हस्तनिर्मित कांच की मोतियों के कारोबार से बनारस के 10 हजार परिवार जुड़े हुए हैं। इसमें ग्लास बीड्स को मोती का स्वरूप देकर फैंसी माला के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के आकर्षक सजावटी सामान तैयार किए जाते हैं।
बनारस में ग्लास बीड्स बनाने का काम परंपरागत ढंग से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस व्यवसाय से बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुड़ी हैं। बनारस से हस्तनिर्मित ग्लास बीड्स का सबसे अधिक निर्यात यूरोप, अमेरिका सहित 70 देशाें में हो रहा है।
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शीशे से मोती बनाने का काम लगभग 200 वर्ष पुराना है। इसमें सजावटी सामान, ब्रेसलेट, हार, पर्दों और दीवारों में लगाने वाले बीड्स आदि बनाए जाते हैं। हैंडमेड ग्लास बीड्स का बनारस सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है। बनारस की मोतियों के निर्यात में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी बनारस बीड्स कंपनी एंड ग्रुप की है।
कंपनी के अशोक गुप्ता बताते हैं कि हस्तकला संकुल में जाने वाले खरीदार जब मोतियों की खूबसूरती से आकर्षित होंगे तो उसके बारे में जानकारी हासिल करेंगे और फिर वहां से पता प्राप्त कर शिल्पियों से संपर्क करेंगे। ऐसे में निर्यात और बढ़ेगा।
इन इलाकों के तमाम घरों में होता है काम
- आदित्यनगर, कपरफोरवा, चकिया, मंगारी, तेंदुई, सुंदरपुर, सुसवाही, जमुआ आदि में होता है निर्माण।
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हस्तनिर्मित कांच की मोतियों के कारोबार से बनारस के 10 हजार परिवार जुड़े हुए हैं। इसमें ग्लास बीड्स को मोती का स्वरूप देकर फैंसी माला के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के आकर्षक सजावटी सामान तैयार किए जाते हैं।
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बनारस में ग्लास बीड्स बनाने का काम परंपरागत ढंग से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस व्यवसाय से बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुड़ी हैं। बनारस से हस्तनिर्मित ग्लास बीड्स का सबसे अधिक निर्यात यूरोप, अमेरिका सहित 70 देशाें में हो रहा है।
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शीशे से मोती बनाने का काम लगभग 200 वर्ष पुराना है। इसमें सजावटी सामान, ब्रेसलेट, हार, पर्दों और दीवारों में लगाने वाले बीड्स आदि बनाए जाते हैं। हैंडमेड ग्लास बीड्स का बनारस सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है। बनारस की मोतियों के निर्यात में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी बनारस बीड्स कंपनी एंड ग्रुप की है।
कंपनी के अशोक गुप्ता बताते हैं कि हस्तकला संकुल में जाने वाले खरीदार जब मोतियों की खूबसूरती से आकर्षित होंगे तो उसके बारे में जानकारी हासिल करेंगे और फिर वहां से पता प्राप्त कर शिल्पियों से संपर्क करेंगे। ऐसे में निर्यात और बढ़ेगा।
इन इलाकों के तमाम घरों में होता है काम
- आदित्यनगर, कपरफोरवा, चकिया, मंगारी, तेंदुई, सुंदरपुर, सुसवाही, जमुआ आदि में होता है निर्माण।