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देश की तरक्की के लिए पंडित दीनदयाल के विचारों को अपनाना जरुरीः राम नाईक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
Updated Mon, 12 Feb 2018 10:00 PM IST
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दीनदयाल उपाधयाय की प्रतिमा का अनावरण करते राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाइक ने कहा है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद का जो मंत्र दिया वह आज भी प्रासंगिक है। उनके विचारों और बताए रास्तों पर चल कर ही देश तरक्की की राह पर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की रेल में हुई मौत का आज तक खुलासा नहीं किया।
राज्यपाल सोमवार को बलिया स्थित महरेंव गांव में स्वदेशी जागरण मंच के तत्वावधान में पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मारक अनुसंधान एवं आरोग्य केंद्र परिसर में पं. दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ति के अनावरण के मौके पर सभा को संबोधित कर रहे थे।
पंडित दीनदयाल की 50 वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत राज्यपाल ने दीप जलाकर की। उन्होंने कहा दीनदयाल का मानना था कि समाज के सबसे गरीब की मदद व सेवा करने से ही देश समृद्धशाली हो सकता है। इसके लिए अंत्योदय आधारित योजनाओं का संचालन आवश्यक है।
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उन्होंने अतीत की याद दिलाते हुए कहा कि 1942 में आजादी के आंदोलन में बलिया जनपद के लोगों ने सबसे पहले अंग्रेजों के साम्राज्य के खिलाफ बिगुल फूंका और संघर्ष किया। इसके चलते ही इस जनपद का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 1947 में आजादी के समय कम आबादी होने के बावजूद देश को गेहूं का आयात करना पड़ता था जबकि आज भारत गेहूं का निर्यात करने की स्थिति में है। यह सब किसानों के परिश्रम की बदौलत है। कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मारक संस्थान स्वरोजगार और प्राकृतिक चिकित्सा की दिशा में क्रांतिकारी आंदोलन सिद्ध होगा।
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राज्यपाल सोमवार को बलिया स्थित महरेंव गांव में स्वदेशी जागरण मंच के तत्वावधान में पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मारक अनुसंधान एवं आरोग्य केंद्र परिसर में पं. दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ति के अनावरण के मौके पर सभा को संबोधित कर रहे थे।
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पंडित दीनदयाल की 50 वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत राज्यपाल ने दीप जलाकर की। उन्होंने कहा दीनदयाल का मानना था कि समाज के सबसे गरीब की मदद व सेवा करने से ही देश समृद्धशाली हो सकता है। इसके लिए अंत्योदय आधारित योजनाओं का संचालन आवश्यक है।
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उन्होंने अतीत की याद दिलाते हुए कहा कि 1942 में आजादी के आंदोलन में बलिया जनपद के लोगों ने सबसे पहले अंग्रेजों के साम्राज्य के खिलाफ बिगुल फूंका और संघर्ष किया। इसके चलते ही इस जनपद का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 1947 में आजादी के समय कम आबादी होने के बावजूद देश को गेहूं का आयात करना पड़ता था जबकि आज भारत गेहूं का निर्यात करने की स्थिति में है। यह सब किसानों के परिश्रम की बदौलत है। कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मारक संस्थान स्वरोजगार और प्राकृतिक चिकित्सा की दिशा में क्रांतिकारी आंदोलन सिद्ध होगा।