BHU: यूजीसी ने बीएचयू की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पर लगाई रोक, जांच रिपोर्ट आने तक खाली रहेंगी 466 सीटें
यूजीसी ने बीएचयू की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। साथ ही जांच कमेटी भी गठित की गई है। ऐसे में जांच रिपोर्ट आने तक 466 सीटें खाली रहेंगी।
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यूजीसी ने बीएचयू के पीएचडी प्रवेश पर रोक लगा दी है। पूरी प्रक्रिया की जांच और यूजीसी रेगुलेशन के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एक कमेटी भी गठित कर दी है। जांच होने और रिपोर्ट आने तक 466 सीटें खाली रहेंगी। सूत्रों के अनुसार कार्यवाहक कुलपति और रजिस्ट्रार को दोबारा बातचीत के लिए दिल्ली तलब कर लिया गया है। यूजीसी की टीम इस महीने पीएचडी दाखिले के लिए कैंपस में हुए पांच धरनों को भी केंद्र में रखकर जांच करेगी। तमाम विवादों के साथ ही विभागीय गतिविधियां भी जांची जाएंगी।
यूजीसी की ओर से सचिव मनीष आर जोशी ने सोमवार को एक पत्र जारी कर कहा कि बीएचयू में पीएचडी प्रवेश से संबंधित कई मामले और विषमताएं संज्ञान में आई हैं। विश्वविद्यालयों को पहले अवगत कराया गया है कि पीएचडी डिग्री देने के लिए न्यूनतम मानक और प्रक्रिया विनियम, 2022 के अनुसार ही चलना होगा। पीएचडी कार्यक्रमों में छात्रों को प्रवेश देना और पीएचडी डिग्री देना जरूरी है। ऐसे में बीएचयू में शोध प्रवेश से संबंधित मुद्दों की जांच की जाएगी।
उधर, बीएचयू में पीएचडी प्रवेश की मांग को लेकर 11 दिनों से धरनारत अभ्यर्थी का प्रवेश न होने पर छात्रों का गुस्सा फूट गया। छात्र कुलपति आवास से सेंट्रल ऑफिस के ऊपरी तल पर चढ़ गए। कुलपति और रजिस्ट्रार में से कोई भी अधिकारी नहीं मिला। इसके बाद छात्र ऊपर ही जोर-जोर से नारेबाजी करने लगे।
चार महीने में हुए पांच से ज्यादा धरने
बीएचयू में चार महीने से पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर 10 से ज्यादा धरने हो चुके हैं। वहीं परीक्षा नियंत्रक कार्यालय की ओर से जब स्क्रीनिंग कर इंटरव्यू की तिथि घोषित कर दी गई तो विरोध का सुर तेजी से उठने लगे। वहीं जब विभागों ने पीएचडी में चयनित अभ्यर्थियों को फीस जमा करने की लिंक भेजना शुरू किया तब एक के बाद एक धरने शुरू हो गए। सबसे पहले सब लैटर्न स्टडी में पल्लव सिंह, मालवीय पीस रिसर्च में शिवम सिंह, हिंदी विभाग की अर्चिता सिंह और भास्करादित्य त्रिपाठी, वहीं प्राचीन इतिहास के कुणाल गुप्ता और करन जायसवाल ने प्रवेश के लिए धरना प्रदर्शन किया था।