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टीवी के इस एक्टर ने कही बड़ी बात, एक समय खाने तक को नहीं थे पैसे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 28 Mar 2018 02:51 PM IST
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आसिफ सैयद
- फोटो : अमर उजाला
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कुमकुम भाग्य, दीया और बाती, जोधा अकबर, अशोका, ये है मोहब्बतें जैसे सीरियल में एक्टिंग कर चुके काशी के आसिफ सैयद मंगलवार को आसिफ शहर में थे।
टेलीविजन पर 2010 से अपने कॅरियर की शुरुआत से लेकर अब तक के अपने सफर और संघर्षों को साझा किया। उन्होंने बताया कि 2010 में सीरियल ‘प्यार को हो जाने दो’ से एक्टिंग में अपने कॅरियर की शुरुआत की। उसके बाद कई सीरियल में एक्टिंग करने का मौका मिला।
आसिफ सैयद ने कहा कि एक अच्छा एक्टर बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनना बेहद जरूरी है। बनारस के रहने वाले आसिफ बताते हैं कि उनका अब तक का सफर सफलता कम और संघर्षों भरा ज्यादा रहा है।
बचपन से ही उनका सपना एक्टिंग ही रहा। बनारस में रहते हुए कई नुक्कड़ नाटक, स्टेज शो किए। 2010 में मुंबई गया। कॅरियर की शुरुआत कहां से कैसे करनी है, कुछ मालूम नहीं था।
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टेलीविजन पर 2010 से अपने कॅरियर की शुरुआत से लेकर अब तक के अपने सफर और संघर्षों को साझा किया। उन्होंने बताया कि 2010 में सीरियल ‘प्यार को हो जाने दो’ से एक्टिंग में अपने कॅरियर की शुरुआत की। उसके बाद कई सीरियल में एक्टिंग करने का मौका मिला।
आसिफ सैयद ने कहा कि एक अच्छा एक्टर बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनना बेहद जरूरी है। बनारस के रहने वाले आसिफ बताते हैं कि उनका अब तक का सफर सफलता कम और संघर्षों भरा ज्यादा रहा है।
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बचपन से ही उनका सपना एक्टिंग ही रहा। बनारस में रहते हुए कई नुक्कड़ नाटक, स्टेज शो किए। 2010 में मुंबई गया। कॅरियर की शुरुआत कहां से कैसे करनी है, कुछ मालूम नहीं था।
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बनानी है अपनी पहचान
बनारस के रहने वाले हैं अभिनेता आसिफ सैयद
- फोटो : अमर उजाला
180 स्क्वायर फीट के कमरे में सात लोग रहते थे। पैसे चोरी हो गए। खाने तक को पैसे नहीं थे। बाद में मैं वापस लौट आया लेकिन यहां आने के बाद लोगों ने ताना मारना शुरू कर दिया।
तब मैंने ठान लिया कि अब मुझे कुछ बनकर ही लौटना है। काफी संघर्ष करने के बाद मुझे ‘प्यार को हो जाने दो’ में पहला ब्रेक मिला। इसके बाद मैं आर्ट डायरेक्शन में चला गया।
इसी दौरान एक नया मोड़ आया और बालाजी ने कुमकुम भाग्य में मुझे मौका दिया। इसके बाद मुझे कई प्रोडक्शन हाउस से ऑफर आने लगे। आसिफ कहते हैं कि मुझे इसी क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनानी है।
तब मैंने ठान लिया कि अब मुझे कुछ बनकर ही लौटना है। काफी संघर्ष करने के बाद मुझे ‘प्यार को हो जाने दो’ में पहला ब्रेक मिला। इसके बाद मैं आर्ट डायरेक्शन में चला गया।
इसी दौरान एक नया मोड़ आया और बालाजी ने कुमकुम भाग्य में मुझे मौका दिया। इसके बाद मुझे कई प्रोडक्शन हाउस से ऑफर आने लगे। आसिफ कहते हैं कि मुझे इसी क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनानी है।