{"_id":"573f70bf4f1c1bdb6aac766f","slug":"this-roused-to-meet-talented-job-again","type":"story","status":"publish","title_hn":"हुनरमंदों को फिर काम मिलने की जगी आस ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हुनरमंदों को फिर काम मिलने की जगी आस
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 21 May 2016 01:47 AM IST
विज्ञापन
हुनरमंदों को फिर काम मिलने की जगी आस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्टेशन के समीप लगभग सोलह एकड़ भूमि में बसा गांधी आश्रम, गांधी निधि और सघन क्षेत्र विकास समिति दो दशक पूर्व सोने की चिड़िया कहलाता था। लेकिन सरकारी उपेक्षाओं का इस कदर शिकार हुआ कि वह अपनी दुर्दशा पर स्वयं आंसू बहाने को मजबूर हो गया था। इसकी गिरती साख को अमर उजाला ने पिछले साल कई दिनों तक प्रमुखता से उठाया था।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश सिंह अलगू ने इस मामले को केंद्र सरकार तक पहुंचाने का कार्य किया था। केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हए इस आश्रम को पुनर्जीवित करने का मन बनाया है।यह संस्था पुन: चल गई तो सैकड़ों लोगों के हाथों को फिर काम मिल जाएगा। प्रधानमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर आज 21 मई को सेवापुरी गांधी आश्रम में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पियूष गोयल व खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना के आने से क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।
गांधी आश्रम के सहायक प्रवक्ता गजेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि अकेले इस आश्रम में पापड़, हाथ कागज़, अगरबत्ती, मोमबत्ती, मधुमक्खी पालन, चर्म उद्योग, खादी वस्त्र उद्योग, सिलाई कढ़ाई, ब्यूटीशियन के साथ दर्जनों छोटे और बड़े लघु उद्योग एवं प्रशिक्षण केंद्र संचालित होते थे। लेकिन आज अधिकांश उद्योग धन के अभाव में बंद पड़े हैं। गांधी आश्रम की ओर से एक हजार कत्तिनो को चरखे व 240 बुनकरों को हथकरघे भी वितरित किए जाएंगे।
विज्ञापन
तीनों संस्थाओं में लगभग पांच सौ कर्मचारी काम करते थे। वहीं गांधी आश्रम के मंत्री, हरिशंकर पाठक का कहना है कि प्रधानमंत्री सेवापुरी में स्थापित पूर्वांचल के सबसे बड़े बंद पड़े गांधी आश्रम के दर्जनों लघु उद्योगों को पुनर्जीवित करके सैकड़ों गरीबों के हाथों में काम देने के साथ पूरे पूर्वांचल को खादी मय करना चाहते हैं।
विज्ञापन
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश सिंह अलगू ने इस मामले को केंद्र सरकार तक पहुंचाने का कार्य किया था। केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हए इस आश्रम को पुनर्जीवित करने का मन बनाया है।यह संस्था पुन: चल गई तो सैकड़ों लोगों के हाथों को फिर काम मिल जाएगा। प्रधानमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर आज 21 मई को सेवापुरी गांधी आश्रम में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पियूष गोयल व खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना के आने से क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।
विज्ञापन
गांधी आश्रम के सहायक प्रवक्ता गजेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि अकेले इस आश्रम में पापड़, हाथ कागज़, अगरबत्ती, मोमबत्ती, मधुमक्खी पालन, चर्म उद्योग, खादी वस्त्र उद्योग, सिलाई कढ़ाई, ब्यूटीशियन के साथ दर्जनों छोटे और बड़े लघु उद्योग एवं प्रशिक्षण केंद्र संचालित होते थे। लेकिन आज अधिकांश उद्योग धन के अभाव में बंद पड़े हैं। गांधी आश्रम की ओर से एक हजार कत्तिनो को चरखे व 240 बुनकरों को हथकरघे भी वितरित किए जाएंगे।
विज्ञापन
तीनों संस्थाओं में लगभग पांच सौ कर्मचारी काम करते थे। वहीं गांधी आश्रम के मंत्री, हरिशंकर पाठक का कहना है कि प्रधानमंत्री सेवापुरी में स्थापित पूर्वांचल के सबसे बड़े बंद पड़े गांधी आश्रम के दर्जनों लघु उद्योगों को पुनर्जीवित करके सैकड़ों गरीबों के हाथों में काम देने के साथ पूरे पूर्वांचल को खादी मय करना चाहते हैं।