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राष्ट्रपति बोले, खोखले नारों से नहीं कर सकते प्रतिष्पर्धा

Fri, 13 May 2016 02:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 13 May 2016 02:29 AM IST
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The President said, can not hollow slogans Contest
बीएचयू में बोलते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शोध और नवोन्मेषण को बढ़ावा देने के साथ ही उच्च शिक्षा में आई गिरावट पर चिंता जाहिर की है। कहा कि हरगोविंद खुराना, चंद्रशेखर सुब्रमण्यम, सीवी रमन और अमर्त्य सेन ऐसी मेधा रहे जिन्होंने भारत में अध्ययन किया और पूरी दुनिया में अपनी चमक बिखेरी। भारत के लिए नोबल पुरस्कार हासिल किया। ये बड़े दुख की बात है कि 1930 के बाद ऐसे किसी भारतीय को नोबल पुरस्कार नहीं मिला जिसने भारत में रहकर शिक्षा हासिल की हो। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुरुवार की शाम बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत आयोजित विशेष व्याख्यान सत्र को संबोधित कर रहे थे।
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बीएचयू के विजिटर प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अगर हम फिर से शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक पहचान स्थापित करना चाहते हैं तो हमें अपने शिक्षा के स्तर को सुधारना होगा। शिक्षा के मानकों को गुणवत्तापूर्ण बनाना होगा। अनुसंधान के साथ ही नवोन्मेषण पर जोर देगा होगा। उन्होंने कहा कि नालंदा और तक्षशिला जैसे शैक्षणिक संस्थाएं भारत की थाती रही है। सालों तक हमें इन संस्थानों पर गर्व रहा। आज भारत में 729 से अधिक विश्वविद्यालय हैं, 36 हजार से अधिक कॉलेज हैं, बावजूद इसके पिछले साल तक देश का कोई भी शिक्षण संस्थान दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में नहीं रहा। मगर खुशी की बात यह है कि 2015 की रेटिंग में दुनिया के शीर्ष 200 उच्च शिक्षण संस्थानों में भारत के दो संस्थान शामिल हैं।
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मुखर्जी ने कहा कि ऐसा नहीं कि हमारे पास मेधा नहीं है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत है। हमें शोध की गुणवत्ता बढ़ानी होगी। कहा कि भारत में जीडीपी का मात्र 0.26 प्रतिशत रकम ही शोध पर खर्च होता है जबकि जापान, अमेरिका और चीन में शोध और नवोन्मेषण पर इससे कई गुना ज्यादा रकम खर्च होती है। गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए भारत को भी शोध नवोन्मेषण में निवेश बढ़ाना होगा।
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अपने 25 मिनट के व्याख्यान में प्रणब दा ने कहा कि आने वाले पंद्रह साल में हमारे देश की आधी 25 साल से कम उम्र की होगी। हमें युवाओं की फौज को अपनी पूंजी बनानी होगी। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण, कौशल और रोजगार मुहैया कराना होगा, तभी देश आगे बढ़ सकता है। कहा कि आने वाले समय में भारत कामगारों का दुनिया का सबसे बड़ा देश होगा। हमें इसका लाभ लेना होगा। इसकी तैयारी अभी से करनी होगी। इसके लिए शोध और नवोन्मेषण को बढ़ावा देना होगा। अगर हम ऐसा कर पाए तो बेशक हम दुनिया में शीर्ष पर होंगे। 
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