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वाराणसी: संपूर्णानंद संस्कृत विवि प्रशासन के खिलाफ शिक्षकों ने की नारेबाजी, बकाए भुगतान की कर रहे मांग

Thu, 23 Sep 2021 11:52 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 23 Sep 2021 11:52 PM IST
सार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शिक्षक बकाए पारिश्रमिक की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

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teachers protested and Slogans raised against Sampurnanand Sanskrit University administration
वाराणसी का संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (एसएसयू) - फोटो : SSU

विस्तार

वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में बकाए पारिश्रमिक की मांग पर शिक्षकों ने मूल्यांकन का बहिष्कार कर दिया। नाराज शिक्षकों ने गुरुवार को मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार करने के बाद धरना प्रदर्शन किया। चीफ प्राक्टर और परीक्षा नियंत्रक ने शिक्षकों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन शिक्षक नहीं माने। 

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गुरुवार को पाणिनी भवन के पास धरने पर बैठे शिक्षकों ने बताया कि 2016 से उनका पारिश्रमिक बकाया है। बार-बार आश्वासन के बाद अब तक भुगतान नहीं किया गया है।
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परीक्षकों का आरोप है कि कुलपति से जब बकाए पारिश्रमिक की मांग की गई तो उन्होंने सभी परीक्षकों को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। कुलपति के आदेश के खिलाफ शिक्षक धरने पर बैठ गए। कुलपति ने शिक्षकों को वार्ता के लिए भी बुलाया, लेकिन शिक्षक कुलपति को धरना स्थल पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
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धरने में संस्कृत विद्यालय शिक्षक समिति के प्रदेश अध्यक्ष डा.गणेश दत्त शास्त्री, मंडल संयोजक डॉ.अनिल राय, जिला अध्यक्ष डॉ.सुरेश चंद्र उपाध्याय, उपाध्यक्ष डॉ.रमाकांत पांडेय, डॉ.महिनारायाण पाठक आदि ने सभा को संबोधित किया।

महाविद्यालय के हर शिक्षक को मिलेंगे 15-15 बंडल  
संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि मूल्यांकन के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत महाविद्यालय के हर शिक्षक को 15-15 बंडल कॉपियां जांचने के लिए मिलेंगी। विश्वविद्यालय से संबद्ध 550 महाविद्यालय के शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा। हमने 2021 के परीक्षा पारिश्रमिक का भुगतान करने को कहा था लेकिन शिक्षक 2016 से लंबित भुगतान की मांग कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय की वर्तमान आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भी भेजा गया है। वहां से धन आवंटन होने के बाद धीरे-धीरे पारिश्रमिक का भुगतान सभी को किया जाएगा। जिन शिक्षकों का 15 बंडल पूरा हो चुका है उनको मूल्यांकन कार्य से हटाने का निर्देश दिया गया है। हर जिले के महाविद्यालय के शिक्षकों को मूल्यांकन का अवसर दिया जाएगा। 

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