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पर्यावरण कुंभ में बोले सुरेश सोनी, बेहतर पर्यावरण के लिए इच्छाओं का शमन जरूरी

Sun, 02 Dec 2018 10:38 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Sun, 02 Dec 2018 10:38 AM IST
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Suresh soni says that prevention of wishes for better environment
सुरेश सोनी - फोटो : self
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने कहा कि बेहतर पर्यावरण के लिए आवश्यकताओं की पूर्ति और इच्छाओं का शमन जरूरी है। प्रकृति ‘नीड’ पूरी कर सकती है, लेकिन ‘ग्रीड’ नहीं। जल, जंगल, पहाड़, नदियों पर कब्जा करेंगे तो एक दिन वही आपको प्रदूषण लौटाएंगी। वह शनिवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पर्यावरण कुंभ काशी भारतीय जीवन दृष्टि में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
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सुरेश सोनी ने कहा कि समस्या की जड़ भोगवादी संस्कृति है। विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति का शोषण हो रहा है। पृथ्वी की धारणा शक्ति समाप्त हो रही है। हर चीज की लिमिट होती है। लिमिट नहीं होगी तो जीवन की लिमिट भी एक न एक दिन समाप्त हो जाएगी। हमें सर्वग्रासी संकट से उबरना होगा। गरीबों के प्रति संवेदना आधारित नीतियां बननी चाहिए।
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सह सरकार्यवाह ने कहा कि जंगल कम होते जा रहे हैं, मिट्टी खराब हो चुकी है। पशु पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। रोग बढ़ रहे हैं। अगर ऐसा ही रहा तो इस सदी के अंत तक पृथ्वी जीने योग्य नहीं रहेगी। विकास रूपी अंधे लालच की दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है।
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हमें जल, पृथ्वी, पेड़ के संरक्षण के साथ जैविक व्यवस्था की ओर से हमें लौटना होगा। प्रकृति के प्रति भ्रातृत्व का भाव रखना होगा। अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी ने कहा- शुद्ध वायु, शुद्ध जल के लिए शुद्ध मन से चिंतन करने की जरूरत है। इस नजरिये से ये कुंभ यादगार होगा। उद्घाटन सत्र में उपस्थित लोगों से उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने घर में एक तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं। 

कई सौ साल बाद प्रयागराज में हो रहा कुंभ

Suresh soni says that prevention of wishes for better environment
पर्यावरण कुंभ में दिनेश शर्मा - फोटो : amar ujala
पर्यावरण कुंभ के उद्घाटन सत्र से पहले पर्यावरण प्रदर्शनी का उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि कई सौ साल बाद प्रयागराज में कुंभ हो रहा है, पहले इलाहाबाद में हुआ करता था। यहां मंथन से जो निष्कर्ष निकलेंगे, उसे ज्ञान के प्रसाद के रूप में पुस्तक का रूप दिया जाएगा। यह प्रसाद कुंभ में बांटा जाएगा।

उद्घाटन सत्र के बाद पहले सत्र ‘पर्यावरण व जीवनशैली’ के मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन रहे। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातनी जीवन पद्धति पर्यावरण को शुद्ध करती है। समस्या का समाधान भारत से ही होगा।

इसके बाद सांस्कृतिक संध्या में छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रमों के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। आयोजक समिति की ओर से अतिथियों का स्वागत काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने किया।

वक्ताओं के क्रम में समन्वयक जय प्रकाश चतुर्वेदी, अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी, प्रदेश के राज्यमंत्री डा. नीलकंठ तिवारी, विज्ञान भारती के संगठन मंत्री जयंत सहस्रबुद्धे, भारतीय मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक डा. लक्ष्मण सिंह राठौर, हेल्थ कम्युनिटी डेवलपमेंट के हेड डा. पुनीत मिश्र, सेंट्रल पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड पूर्व चेयरमैन डा. एसपी गौतम रहे।

पर्यावरण कुंभ में पत्तल पुरवा की जगह प्लास्टिक और थर्माकोल 

Suresh soni says that prevention of wishes for better environment
काशी विद्यापीठ में दिनेश शर्मा - फोटो : amar ujala
पर्यावरण कुंभ की शुरुआत के साथ पर्यावरण के प्रति चिंताएं जाहिर करने वाले पर्यावरण प्रेमियों को मंच पर भले ही स्टील की गिलास में पानी देकर यह संदेश दिया गया कि आयोजन समिति पर्यावरण के प्रति काफी गंभीर है।

जैसे ही परदे के पीछे नाश्ते और भोजन के स्टाल पर गए तो वहां खान-पान के इस्तेमाल की वस्तुओं में प्लास्टिक और थर्माकोल था। जिसे लेकर चर्चा का विषय बना रहा। आयोजक समिति चाहती तो इनके स्थान पर पत्तल-पुरवा का इस्तेमाल कर सकती थी। प्लास्टिक लगे प्लेट और थर्माकोल की गिलासें रही।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में आयोजित दो दिवसीय पर्यावरण कुंभ के समापन सत्र के मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य रहेंगे। इसके पूर्व उपभोक्ता और पर्यावरण चुनौतियों पर दूसरा सत्र सुबह 9:30 बजे शुरू होगा। तीसरा सत्र कृषि व पर्यावरण व चौथा सत्र जल और ऊर्जा पर होगा। इसमें देश भर से आए पर्यावरणविद अपने विचार रखेंगे। प्रदर्शनी का समापन तीन दिसंबर को होगा। 
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