{"_id":"66a4c36a9cf73379c207fc73","slug":"story-of-football-player-suman-patel-who-won-9-medals-in-3-years-and-then-drove-toto-to-buy-kit-2024-07-27","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"इस बेटी के जज्बे को सलाम: तीन साल में जीते नौ पदक, किट के लिए चलाती हैं टोटो; यूपी पुलिस में भर्ती का है सपना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बेटी के जज्बे को सलाम: तीन साल में जीते नौ पदक, किट के लिए चलाती हैं टोटो; यूपी पुलिस में भर्ती का है सपना
Sat, 27 Jul 2024 03:23 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sat, 27 Jul 2024 03:23 PM IST
सार
काशी की बेटी सुमन पटेल दो राष्ट्रीय और चार प्रादेशिक प्रतियोगिता में टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने तीन साल में नौ पदक जीते। सुमन बताती हैं कि पहले लड़कों की तरह ड्रेस पहनने पर उनके पिता ने नाराजगी जताई, लेकिन पदक जीतने पर खेलने की अनुमति दे दी।
विज्ञापन
फुटबॉल खिलाड़ी सुमन पटेल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तीन साल में नौ पदक जीत चुकीं जूनियर वर्ग की स्कूली राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी सुमन पटेल टोटो चलाती हैं। वे लंका से कैंट, छित्तुपुर, रामनगर समेत अन्य क्षेत्रों में सवारी पहुंचाती हैं।
विज्ञापन
सुमन ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से पढ़ाई के साथ काम भी करना पड़ता है। इन्हीं पैसों से किट का भी इंतजाम करना पड़ता है। फुटबॉल की चार प्रादेशिक और दो स्कूली राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेल चुकीं सुमन पटेल लंका थानाक्षेत्र के छित्तुपुर में रहती हैं। उनके पिता मधुसूदन पटेल मिस्त्री हैं। वे तीन साल से फुटबॉल खेल रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसी साल 12वीं उत्तीर्ण की हैं। अब प्राइवेट कॉलेज से बीए कर रही हैं। बताया कि 2021 में खेलना शुरू किया तो पिता ने एतराज किया। लड़कों की तरह ड्रेस पहनकर खेलने पर डांटा। पदक जीता तो खुश होकर खेलने की अनुमति दी। वहीं, मां गायंती देवी लगातार सहयोग करती हैं। मुझे खेलते देख बहुत्त प्रसन्न होती हैं।
दाएं पैर की खिलाड़ी विपक्षियों पर पड़ती है भारी
कोच भैरव दत्त ने बताया कि सुमन साइड बैंक की मजबूत खिलाड़ी है। उसकी गति बेजोड़ है। दाएं पैर की खिलाड़ी विपक्षियों पर भारी पड़ती हैं। सुमन राष्ट्रीय प्रतियोगिता भी खेल चुकी हैं। शुरुआत बरेका से की थी। आज भी रोज अभ्यास के लिए सुबह-शाम 12 किमी दूर बरेका इंटर कॉलेज के मैदान पर साइकिल चलाकर आती हैं।