{"_id":"582b6eae4f1c1bd53b8ff224","slug":"still-waiting-queue-from-morning-to-evening","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुबह से शाम तक कतार फिर भी इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुबह से शाम तक कतार फिर भी इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 16 Nov 2016 01:53 AM IST
विज्ञापन
मकबूल आलम रोड स्थित एचडीएफसी बैंक के बाहर लगी लोगों की भीड़।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
500-1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद से लोगों की दुश्वारियां लगातार बढ़ रही हैं। नोट बदलने से लेकर पुराने नोट जमा करने के लिए रोजाना बैंकों पर भारी भीड़ उमड़ रही है लेकिन कई लोग सुबह से शाम तक घंटों लाइन में लगने के बाद भी पैसे नहीं पा रहे हैं। एक दिन के बैंक अवकाश के बाद मंगलवार को भीड़ भी ज्यादा थी। बावजूद इसके कई बैंकों में शाम चार बजे ही काम बंद कर दिया गया। पुरुष-महिलाएं, बूढ़े-जवान सभी सुबह ही घर से निकलकर बैंक और डाकघर की तरफ भाग रहे हैं। सुबह दस बजे से पहले ही यहां लंबी-लंबी लाइन लग रही हैं। उधर, कई एटीएम में ताला बंद या नो कैश लिखा मिल रहा है।
एटीएम में जहां पैसे थे, उसे निकालने के लिए देर शाम तक लाइन लगी रही। शहर और ग्रामीण इलाकों के बहुत से बैंकों पर समय से पैसा नहीं पहुंच रहा है। कुछ जगहों पर तो दोपहर बाद ही रुपये खत्म हो जा रहे हैं। मंगलवार को सबसे ज्यादा परेशानी काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक जाल्हूपुर सहित अन्य शाखाओं पर रही। यूनियन बैंक की ओर से पैसा न मिलने की वजह से इस तरह की समस्या आई। कुछ इसी तरह की स्थिति यूको बैंक लोहता, आईसीआई बैंक, चौक आदि शाखाओं की रही। हालांकि हल्ला-हंगामा न हो, इसके लिए बैंकों में अतिरिक्त काउंटर खोले गए। बैंक अधिकारियों का दावा है कि एटीएम में भी तीन से चार बार नोट भरे जा रहे हैं।
नोट बंदी के बाद कालाधन रखने वाले इन दिनों पुराने नोट खपाने में जुट गए हैं। मंगलवार को अचानक से भीड़ बढ़ने पर बैंक अधिकारियों को लगा कि एक दिन छुट्टी होने के कारण भीड़ बढ़ी है। काउंटर बढ़ाने के बाद भी जब भीड़ कम नहीं हुई तो पूछताछ की गई। पता चला कि दिहाड़ी मजदूरों से बैंकों पर लाइन लगवाई गई थी। एक व्यक्ति ने बताया कि 4500 रुपये बदलने के लिए सुबह 10 बजे से लाइन में कई लोगों को लगाया गया है। रुपये बदलने पर उन्हें दिहाड़ी के रूप 500 रुपये मिलेंगे। इसी प्रकार एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि जहां काम करते हैं वहां के मालिक ने लाइन लगाकर पैसा बदलने पर 500 रुपये दे रहे हैं इसलिए लाइन लगाए हैं। उधर, सेवापुरी क्षेत्र में कई मजदूर ऐसे हैं, जिन्हें काम नहीं मिल रहा है और वे प्रभावशाली और रसूखदार लोगों के लिए पुराने नोट बदलने के लिए अपनी आईडी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कपसेठी, सिरिहरा, तक्खू की बावली,बडौरा, हाथी, कालिका धाम, जंसा सहित कई इलाकों में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल जोरों से चल रहा है।
विज्ञापन
नोट बदलने वालों की उंगलियों पर अमिट स्याही लगाने का फरमान तो जारी हो गया लेकिन चुनाव के दौरान लगने वाली स्याही आएगी, इसके बारे में कोई गाइडलाइन शाम तक प्राप्त नहीं हो सकी थी। बैंक अधिकारियों ने चुनाव आयोग की ओर से जारी होने वाली स्याही का प्रबंध कराने के लिए डीएम से संपर्क किया है। एसबीआई के सहायक महाप्रबंधक एके सिंह ने कहा कि अमिट स्याही आने के बाद इसका इस्तेमाल किया जाएगा। अग्रणी बैंक यूबीआई के प्रबंधक रंजीत सिंह ने कहा कि स्याही के लिए डीएम से बात की गई है। उनकी ओर से प्रबंध कराने के बाद स्याही बुधवार से लगाई जाएगी। उधर, डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने कहा, स्याही की उपलब्धता के लिए शासन से बातचीत चल रही है। पंचायत चुनाव के दौरान जो थोड़ी-बहुत स्याही बची है, वह सभी बैंकों में नहीं जा पाएगी।
एटीएम में जहां पैसे थे, उसे निकालने के लिए देर शाम तक लाइन लगी रही। शहर और ग्रामीण इलाकों के बहुत से बैंकों पर समय से पैसा नहीं पहुंच रहा है। कुछ जगहों पर तो दोपहर बाद ही रुपये खत्म हो जा रहे हैं। मंगलवार को सबसे ज्यादा परेशानी काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक जाल्हूपुर सहित अन्य शाखाओं पर रही। यूनियन बैंक की ओर से पैसा न मिलने की वजह से इस तरह की समस्या आई। कुछ इसी तरह की स्थिति यूको बैंक लोहता, आईसीआई बैंक, चौक आदि शाखाओं की रही। हालांकि हल्ला-हंगामा न हो, इसके लिए बैंकों में अतिरिक्त काउंटर खोले गए। बैंक अधिकारियों का दावा है कि एटीएम में भी तीन से चार बार नोट भरे जा रहे हैं।
विज्ञापन
नोट बंदी के बाद कालाधन रखने वाले इन दिनों पुराने नोट खपाने में जुट गए हैं। मंगलवार को अचानक से भीड़ बढ़ने पर बैंक अधिकारियों को लगा कि एक दिन छुट्टी होने के कारण भीड़ बढ़ी है। काउंटर बढ़ाने के बाद भी जब भीड़ कम नहीं हुई तो पूछताछ की गई। पता चला कि दिहाड़ी मजदूरों से बैंकों पर लाइन लगवाई गई थी। एक व्यक्ति ने बताया कि 4500 रुपये बदलने के लिए सुबह 10 बजे से लाइन में कई लोगों को लगाया गया है। रुपये बदलने पर उन्हें दिहाड़ी के रूप 500 रुपये मिलेंगे। इसी प्रकार एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि जहां काम करते हैं वहां के मालिक ने लाइन लगाकर पैसा बदलने पर 500 रुपये दे रहे हैं इसलिए लाइन लगाए हैं। उधर, सेवापुरी क्षेत्र में कई मजदूर ऐसे हैं, जिन्हें काम नहीं मिल रहा है और वे प्रभावशाली और रसूखदार लोगों के लिए पुराने नोट बदलने के लिए अपनी आईडी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कपसेठी, सिरिहरा, तक्खू की बावली,बडौरा, हाथी, कालिका धाम, जंसा सहित कई इलाकों में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल जोरों से चल रहा है।
विज्ञापन
नोट बदलने वालों की उंगलियों पर अमिट स्याही लगाने का फरमान तो जारी हो गया लेकिन चुनाव के दौरान लगने वाली स्याही आएगी, इसके बारे में कोई गाइडलाइन शाम तक प्राप्त नहीं हो सकी थी। बैंक अधिकारियों ने चुनाव आयोग की ओर से जारी होने वाली स्याही का प्रबंध कराने के लिए डीएम से संपर्क किया है। एसबीआई के सहायक महाप्रबंधक एके सिंह ने कहा कि अमिट स्याही आने के बाद इसका इस्तेमाल किया जाएगा। अग्रणी बैंक यूबीआई के प्रबंधक रंजीत सिंह ने कहा कि स्याही के लिए डीएम से बात की गई है। उनकी ओर से प्रबंध कराने के बाद स्याही बुधवार से लगाई जाएगी। उधर, डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने कहा, स्याही की उपलब्धता के लिए शासन से बातचीत चल रही है। पंचायत चुनाव के दौरान जो थोड़ी-बहुत स्याही बची है, वह सभी बैंकों में नहीं जा पाएगी।