{"_id":"4a60375799a21b5542f5ae72f1a849bf","slug":"space-and-tecnology-will-dimanded-for-pm-modi-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएम से स्पेस और टेक्नालॉजी की मांग करेंगे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएम से स्पेस और टेक्नालॉजी की मांग करेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Dec 2014 02:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। मालवीय जयंती पर बीएचयू आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष दृश्य कला संकाय को विस्तारित करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। दृश्य कला संकाय को विस्तार देने के साथ ही कला क्षेत्र में नई तकनीकों को शामिल करने की मांग भी प्रधानमंत्री के समक्ष रखी
जाएगी। संकाय प्रमुख इस संबंध में नरेंद्र मोदी को लिखित मांगपत्र देने की तैयारी में हैं। वहीं इससे युवा कलाकारों को भी एक नई उम्मीद जगी है।
दृश्य कला के साथ संगीत एवं मंच कला की शिक्षा देने के उद्देश्य से 1950 में कला संगीत भारती कालेज की शुरुआत हिंदू विश्वविद्यालय में की गई थी। 1985 में 30 सीटों के साथ बीएफए पाठ्यक्रम शुरू किया गया। संकाय प्रमुख प्रो. हीरालाल प्रजापति बताते हैं आज बीएफए की सीटें तीन गुनी हो
गई हैं। एमएफए और पीएचडी भी कराया जा रहा है लेकिन जितनी जगह के साथ इस संकाय की शुरुआत की गई थी, आज भी उतने ही स्पेस और उतने ही संसाधनों से संकाय को संचालित किया जा रहा है। इस लिहाज से युवा कलाकारों को काफी दिक्कत हो रही है। यहां के छात्र-छात्राओं में क्रिएटिविटी की कमी नहीं है लेकिन संसाधनों की कमी के चलते उनकी क्रिएटिविटी को वो मकाम नहीं
विज्ञापन
मिल पा रहा जो उन्हें मिलना चाहिए। कला क्षेत्र में नई तकनीक, मास्टर्स डिग्री और पीएचडी के लिए जगह ही नहीं है। प्रो. प्रजापति ने बताया कि 12वीं योजना के अंतर्गत संकाय को चार मंजिला बनाने का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन उस पर मुहर नहीं लगी। अब
हमारी कोशिश है कि हम अपना ये प्रस्ताव नए कुलपति के साथ ही प्रधानमंत्री के समक्ष रखें। इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक के साथ ही शिक्षकों की जरूरत इस संकाय को है।
विज्ञापन
जाएगी। संकाय प्रमुख इस संबंध में नरेंद्र मोदी को लिखित मांगपत्र देने की तैयारी में हैं। वहीं इससे युवा कलाकारों को भी एक नई उम्मीद जगी है।
दृश्य कला के साथ संगीत एवं मंच कला की शिक्षा देने के उद्देश्य से 1950 में कला संगीत भारती कालेज की शुरुआत हिंदू विश्वविद्यालय में की गई थी। 1985 में 30 सीटों के साथ बीएफए पाठ्यक्रम शुरू किया गया। संकाय प्रमुख प्रो. हीरालाल प्रजापति बताते हैं आज बीएफए की सीटें तीन गुनी हो
विज्ञापन
गई हैं। एमएफए और पीएचडी भी कराया जा रहा है लेकिन जितनी जगह के साथ इस संकाय की शुरुआत की गई थी, आज भी उतने ही स्पेस और उतने ही संसाधनों से संकाय को संचालित किया जा रहा है। इस लिहाज से युवा कलाकारों को काफी दिक्कत हो रही है। यहां के छात्र-छात्राओं में क्रिएटिविटी की कमी नहीं है लेकिन संसाधनों की कमी के चलते उनकी क्रिएटिविटी को वो मकाम नहीं
विज्ञापन
मिल पा रहा जो उन्हें मिलना चाहिए। कला क्षेत्र में नई तकनीक, मास्टर्स डिग्री और पीएचडी के लिए जगह ही नहीं है। प्रो. प्रजापति ने बताया कि 12वीं योजना के अंतर्गत संकाय को चार मंजिला बनाने का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन उस पर मुहर नहीं लगी। अब
हमारी कोशिश है कि हम अपना ये प्रस्ताव नए कुलपति के साथ ही प्रधानमंत्री के समक्ष रखें। इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक के साथ ही शिक्षकों की जरूरत इस संकाय को है।