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वाराणसी: संझवत के साथ वेदियों पर जल उठे दीप, घरों में गूंजे छठ के गीत, महिलाओं ने किया खरना, 36 घंटे का निराजल व्रत शुरू
Wed, 10 Nov 2021 12:16 AM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Wed, 10 Nov 2021 12:16 AM IST
सार
व्रती महिलाओं ने सूर्य देव और छठ मां की पूजा कर गुड़ से बनी खीर का भोग लगाया। साथ ही प्रसाद ग्रहण किया और परिवार के सदस्यों और परिचितों को वितरण किया।
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वाराणसी में दशाश्वमेध मार्ग पर छठ पर्व पर खरीदारी करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लोक आस्था का महापर्व मंगलवार को संझवत के साथ आरंभ हो गया। महिलाओं ने नमक रहित एक अन्न का भोजन कर खरना व्रत किया। इसके साथ ही 36 घंटे का निराजल व्रत भी आरंभ हो गया। बुधवार को अस्ताचलगामी और बृहस्पतिवार को उदीयमान भगवान भास्कर के अर्घ्य के साथ पूर्ण छठ व्रत पूरा होगा।
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मंगलवार से सूर्य षष्ठी के व्रत की शुरुआत हो गई। नहाय-खाय के साथ सोमवार को व्रत का संकल्प लेने वाली महिलाओं ने स्नान के बाद भगवान सूर्य का स्मरण किया। फिर निराजल व्रत का श्रीगणेश किया। पीला वस्त्र धारण कर परंपरा के अनुसार नाक से माथे तक सिंदूर लगाया। व्रती महिलाएं दोपहर से ही पूजन की तैयारियों में जुट गईं।
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दिन भर के व्रत के बाद शाम को मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी से चावल और गुड़ का खीर बनाकर प्रसाद तैयार किया। व्रती महिलाओं ने सूर्य देव और छठ मां की पूजा कर गुड़ से बनी खीर का भोग लगाया। साथ ही प्रसाद ग्रहण किया और परिवार के सदस्यों और परिचितों को वितरण किया। प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।
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पारण 11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर होगा। वहीं, दूसरी तरफ गंगा के तट, कुंड और सरोवरों पर वेदियों की साज-सजावट का काम भी चलता रहा। शाम को वेदियों पर महिलाओं ने दीप जलाकर खरना के व्रत को पूर्ण किया।