फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   sonebhhadra son refuse to take dead body of his father

पिता का अंतिम संस्कार करने से बेटे का इनकार, वजह तीन तलाक

Tue, 27 Jun 2017 05:34 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,सोनभद्र
ब्यूरो,अमर उजाला,सोनभद्र Updated Tue, 27 Jun 2017 05:34 PM IST
विज्ञापन
sonebhhadra son refuse to take dead body of his father
डेमो - फोटो : demo pic
तलाक से होने वाली तकलीफों को कहानियां जब-तब सुनने को मिलती हैं। इनमें परिवार टूटने से लेकर परवरिश में आने वाली दिक्कतों के कई मामले होते हैं। ताजा मामले में जो सामने आया है, वह इस व्यवस्था के बारे में सोचने को मजबूर करता है।
विज्ञापन


बैंक मैनेजर के तौर पर कार्यरत बेटे ने पिता की आकस्मिक मौत के बाद न केवल शव लेेने से इन्कार कर दिया, बल्कि मरहूम पिता को दफनाने के लिए मिट्टी भी नहीं दी। पिता का कसूर यह था कि उसने उसकी मां को तब तलाक दिया था, जब वह गर्भ में था। 
विज्ञापन


 शनिवार देर रात बस स्टैंड तिराहे के पास सिलाई का काम करने वाले फरियाद अली (50) की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। ओबरा क्षेत्र के बिल्ली गांव के निवासी फरियाद करीब तीस साल से शक्तिनगर में सिलाई कर रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने फरियाद अली की शिनाख्त कराने के बाद परिवार केेे लोगों की तलाश की। पता चला कि फरियाद का बेटा फैजान एक बैंक में प्रबंधक पद पर तैनात है। फरियाद के चार भाई भी हैं। पुलिस ने इनसे संपर्क किया लेकिन कोई भी फरियाद का शव लेने और उसे दफनाने की रस्म निभाने के लिए तैयार नहीं हुआ।

पुलिस ने शव न लेने के बाद शव न लेने के कारणों की पड़ताल की। इसमें जानकारी हुई कि फरियाद अली ने अपनी पत्नी को गर्भावस्था के दौरान तलाक दे दिया था। पुत्र को जन्म देने के बाद फरियाद की पत्नी दुनिया से चल बसी।

बाद में बेटे के नाम फैजान रखा गया और उसका लालन-पालन नाना और खाला के घर हुआ। तलाक देने से नाराज फैजान के चारों चाचा-चाची ने भी फरियाद से रिश्ता तोड़ लिया। मौजूदा समय बैंक प्रबंधक के पद पर तैनात फैजान ने पिता के शव को लेने की पुलिस की गुजारिश को आपबीती सुनाकर मना कर दिया। 


 इसके बाद थानाध्यक्ष भारत भूषण तिवारी ने मुस्लिम कमेटियों से संपर्क साधा। वाकया बताते हुए शव को धार्मिक रस्म-रिवाज के मुताबिक दफनाने की अपील की। इसके बाद खड़िया के कारोबारी व समाजसेवी मैनुद्दीन अंसारी (दमड़ी) सहित कई लोग आगे आए।

अंतत: 40 से भी ज्यादा घंटे बाद सोमवार देर शाम फरियाद के शव को खड़िया बाजार स्थित कब्रिस्तान में दफनाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed