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Varanasi News: छोटी शुरुआत और अब लाखों-करोड़ों में हो रही बात
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एक छोटी की शुरुआत कर अपना स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा अब न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार से जोड़ रहे हैं। शुरुआत भले ही उनकी छोटी लेकिन आज उनका कारोबार करोड़ों और लाखों का टर्नओवर दे रहा है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) रफ्तार के तहत युवाओं को अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए सहयोग कर रहा है। आईआईटी बीएचयू में इसमें तकनीकी और नवाचार के लिहाज से अपना सहयोग देकर उन्हें आगे बढ़ा रहा है...।
मत्स्य पालन में इनोवेशन, दूसरे साल ही एक करोड़ का टर्नओवर
मत्स्य पालन में नवाचार के लिए झारखंड के चेतन कश्यप को स्टार्टअप शुरू करने के लिए 2020 में रफ्तार के तहत फंड मिला। परंपरागत मत्सय पालन छोड़ विदेशों की तर्ज पर चेतन और उनके दोस्त ने रिसर्कुलेशन एक्वाकल्चर सिस्टम को अपनाकर मछली पालन शुरू किया। विदेशों में इसी तकनीक से मत्स्य पालन होता लेकिन ये काफी खर्चीला होता है। इसलिए हमने ऐसे बैक्टीरिया तैयार किए जो पानी को साफ रखते हैं। इस सिस्टम में टैंक में मछली पालन किया जाता है। इससे न सिर्फ मत्स्य पालन के खर्च में कमी आती है, सामान्य से 100 गुना ज्यादा मछलियां पैदा होती हैं। इस तकनीक में पानी की भी काफी बचत होती है। चेतन ने बताया कि पहले साल हमें 80 हजार का लाभ मिला। वहीं दूसरे साल ही हमारा टर्नओवर एक करोड़ से ज्यादा हो गया। तीसरे साल भी हमने 1.37 करोड़ का कारोबार किया।
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ट्रायल में ही हुई लाखों की कमाई
बलिया के डॉ. सुमित सक्सेना का भी रफ्तार के तहत 2020 में फंड के लिए चयन हुआ था। डॉ. सुमित जैविक कचरे से भोजनवर्म और बीएसएफ (ब्लैक सोल्जर फ्लाई) जैसे विभिन्न प्रकार के कीड़े तैयार करते हैं। इन कीड़ों से प्रोटीन, वसा और बायोएक्टिव पेप्टट्ड्स निकालते हैं। किसानों, मत्स्य पालकों और पशुपालकों के लिए खास तौर से तैयार किए गए प्रोटीन, वसा और बायोएक्टिव पेप्टट्ड्स काफी फायदेमंद साबित हो रहे हैं। इसके सेवन से चारे की लागत 10-15% कम हो जाती है। पशु के स्वास्थ्य में सुधार होता है और मृत्यु दर में कमी आती है। उन्होंने फंड मिलने के बाद प्रोटोटाइप तैयार किया। ट्रायल के दौरान उन्हें लाखों का टर्नओवर हो गया। इसके लिए उन्हें आईएसआई फीड पर नेशनल स्टार्टअप अवार्ड भी मिला चुका है।
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वर्तमान में रफ्तार के तहत चल रहे 44 स्टार्टअप
वर्तमान में रफ्तार योजना के तहत 44 स्टार्टअप चल रहे हैं। इसमें यूपी के सबसे ज्यादा 27 और इसके बाद उत्तराखंड, एमपी, महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड आदि शहरों के युवाओं का स्टार्टअप है। साल 2023-24 के लिए आईआईटी बीएचयू ने आवेदन मांगा था। इसमें 147 लोगों ने आवेदन किया है। इनकी स्क्रीनिंग शुरू हो गई है।
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मत्स्य पालन में इनोवेशन, दूसरे साल ही एक करोड़ का टर्नओवर
मत्स्य पालन में नवाचार के लिए झारखंड के चेतन कश्यप को स्टार्टअप शुरू करने के लिए 2020 में रफ्तार के तहत फंड मिला। परंपरागत मत्सय पालन छोड़ विदेशों की तर्ज पर चेतन और उनके दोस्त ने रिसर्कुलेशन एक्वाकल्चर सिस्टम को अपनाकर मछली पालन शुरू किया। विदेशों में इसी तकनीक से मत्स्य पालन होता लेकिन ये काफी खर्चीला होता है। इसलिए हमने ऐसे बैक्टीरिया तैयार किए जो पानी को साफ रखते हैं। इस सिस्टम में टैंक में मछली पालन किया जाता है। इससे न सिर्फ मत्स्य पालन के खर्च में कमी आती है, सामान्य से 100 गुना ज्यादा मछलियां पैदा होती हैं। इस तकनीक में पानी की भी काफी बचत होती है। चेतन ने बताया कि पहले साल हमें 80 हजार का लाभ मिला। वहीं दूसरे साल ही हमारा टर्नओवर एक करोड़ से ज्यादा हो गया। तीसरे साल भी हमने 1.37 करोड़ का कारोबार किया।
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ट्रायल में ही हुई लाखों की कमाई
बलिया के डॉ. सुमित सक्सेना का भी रफ्तार के तहत 2020 में फंड के लिए चयन हुआ था। डॉ. सुमित जैविक कचरे से भोजनवर्म और बीएसएफ (ब्लैक सोल्जर फ्लाई) जैसे विभिन्न प्रकार के कीड़े तैयार करते हैं। इन कीड़ों से प्रोटीन, वसा और बायोएक्टिव पेप्टट्ड्स निकालते हैं। किसानों, मत्स्य पालकों और पशुपालकों के लिए खास तौर से तैयार किए गए प्रोटीन, वसा और बायोएक्टिव पेप्टट्ड्स काफी फायदेमंद साबित हो रहे हैं। इसके सेवन से चारे की लागत 10-15% कम हो जाती है। पशु के स्वास्थ्य में सुधार होता है और मृत्यु दर में कमी आती है। उन्होंने फंड मिलने के बाद प्रोटोटाइप तैयार किया। ट्रायल के दौरान उन्हें लाखों का टर्नओवर हो गया। इसके लिए उन्हें आईएसआई फीड पर नेशनल स्टार्टअप अवार्ड भी मिला चुका है।
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वर्तमान में रफ्तार के तहत चल रहे 44 स्टार्टअप
वर्तमान में रफ्तार योजना के तहत 44 स्टार्टअप चल रहे हैं। इसमें यूपी के सबसे ज्यादा 27 और इसके बाद उत्तराखंड, एमपी, महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड आदि शहरों के युवाओं का स्टार्टअप है। साल 2023-24 के लिए आईआईटी बीएचयू ने आवेदन मांगा था। इसमें 147 लोगों ने आवेदन किया है। इनकी स्क्रीनिंग शुरू हो गई है।