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वाराणसी में विकास की रफ्तार सुस्त: आठ सौ मीटर सीवर लाइन डालने में लगे आठ साल, जांच के लिए टीम गठित 

Wed, 07 Jul 2021 01:11 AM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: हरि User Updated Wed, 07 Jul 2021 01:11 AM IST
सार

इस मामले को सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने विधान परिषद की अंकुश समिति की बैठक में 16 मार्च को उठाया था। प्रति 100 मीटर पाइप लाइन बिछाने में 100.25 लाख रुपये खर्च हुए।

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Slow pace of development in Varanasi: Eight years to lay sewer line, team formed to investigate
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

वाराणसी में विकास परियोजनाओं की रफ्तार सुस्त होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सिगरा-महमूरगंज मार्ग पर सीवर लाइन डालने के मामले में अनियमितताएं बरती गईं। आठ सौ मीटर सीवर लाइन डालने में आठ साल लग गए हैं। इसकी जांच के लिए शासन से चार सदस्यीय टेक्निकल एंड आडिट कमेटी (टीएसी) गठित कर दी गई, जो मामले की जांच करेगी और एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी। प्रबंध निदेशक अनिल कुमार की ओर से इस आदेश का पत्र जारी किया गया है।

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इस मामले को सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने विधान परिषद की अंकुश समिति की बैठक में 16 मार्च को उठाया था। अपर मुख्य सचिव नगर विकास को निर्देशित किया गया था कि समिति की अगली बैठक में इस मामले की जांच रिपोर्ट पेश की जाए।

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एक मीटर पाइन लाइन बिछाने में खर्च हुए 1.25 लाख

सपा एमएलसी ने जानकारी दी थी कि 800 मीटर लंबी सिगरा-महमूरगंज सीवर पाइप डालने में आठ साल क्यों लगे। प्रति 100 मीटर पाइप लाइन बिछाने में 100.25 लाख रुपये खर्च कर (एक मीटर पर 1.25 लाख) लापरवाही व मनमानी की गई। 800 मीटर सीवर पाइप लाइन बिछाने में 10 करोड़ रुपये क्यों खर्च हो गए। 13वें वित्त आयोग की ओर से प्रथम चरण में जेएनएनयूआरएम के तहत जल निगम की गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की ओर से वर्ष 2012-13 में शुरू की गई। योजना को अमृत योजना के अंतर्गत वर्ष 2020 में किसी तरह पूरा किया गया। 

कमेटी में अधीक्षण अभियंता टीएसी संजय कुमार जैन, अधिशासी अभियंता शिकायत राजेश कुमार, कार्यकारी अधिशासी अभियंता टीएसी मोहम्मद सुलेमान खान तथा लेखाकार व कार्यकारी सहायक लेखाधिकारी शामिल हैं।

पाइप डालने में सात ठेकेदार लगे 

आठ साल में आठ सौ मीटर सीवर पाइप लाइन डालने के लिए जल निगम ने सात ठेकेदारों को टेंडर किया था। 2012 से लेकर 2020 तक काम चला। सभी ठेकेदार काम अधूरा छोड़ कर भाग गए थे। 2018 में मेसर्स हरिमोहन शर्मा कंपनी को 6.86 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था। वह कंपनी भी अधूरा काम छोड़ कर भाग गई थी। इसमें जीएम जल निगम तक सस्पेंड हुए थे। दरअसल, पूरा काम बिना सर्वे के किया गया। इससे पाइपों की ऊंचाई एक बराबर न होकर ऊपर नीचे हो गई थी। सिगरा ईसाई बस्ती के सामने शंभू यादव के मकान के नीचे सीवर पाइप चली गई। इससे सीवर ओवरफ्लो की समस्या हुई। जिसे ठीक कराने में तीन साल लग गए। बनने के बाद भी अभी पूरी तरह से लोगों को राहत नहीं मिल रही है।  

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