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ट्रेन-बसों की छत पर बैठकर सफर
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 23 Mar 2016 01:48 AM IST
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बसों की छत पर बैठकर सफर
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शहर के रेलवे स्टेशन हो या रोडवेज बस अड्डा मंगलवार को जबरदस्त भीड़ रही। महानगरों से आने वाली ट्रेनों में तो तिल रखने की जगह नही थी तो वहीं कई बसों में यात्रियों को छत पर भी जगह नही नसीब हुई। हर कोई जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहता था।
होली के एक दिन पूर्व मंगलवार को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा दक्षिण भारत से आने वाली ट्रेनों की बोगियां खासकर स्लीपर व जनरल खचा-खच भरे रहे। लोगों को बैठने तक की जगह नही मिली। यात्रियों के साथ ही भारी भरकम सामान भी थे। जैसे ही कोई ट्रेन आकर रुकती संबंधित प्लेटफार्म पर केवल सिर ही सिर दिखाई देते। वहीं जाने वालों की संख्या काफी कम रही। कैंट रेलवे स्टेशन, मंडुवाडीह, सिटी रेलवे स्टेशन पर यह नजारा पूरे दिन आम रहा।
वहीं रोडवेज बस अड्डे पर खड़ी बसें भी पैक रही। जैसे ही कोई बस आकर खड़ी होती थी लोग उसपर जगह पाने के लिए टूट पड़ते थे। कोई शीशे से अपना सामान सीट पर फेंक देता था तो वहीं कई लोग उसी रास्ते ही घुसकर जगह घेरने का प्रयास करते थे। निजी बसों ने तो बस की छत का भी इस्तेमाल कमाने के लिए किया और जान की परवाह किए बिना छत पर भी यात्रियों को बैठाया। इसका ध्यान न तो यातायात महकमे और ना ही अन्य एजेंसियों ने दिया।
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होली के एक दिन पूर्व मंगलवार को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा दक्षिण भारत से आने वाली ट्रेनों की बोगियां खासकर स्लीपर व जनरल खचा-खच भरे रहे। लोगों को बैठने तक की जगह नही मिली। यात्रियों के साथ ही भारी भरकम सामान भी थे। जैसे ही कोई ट्रेन आकर रुकती संबंधित प्लेटफार्म पर केवल सिर ही सिर दिखाई देते। वहीं जाने वालों की संख्या काफी कम रही। कैंट रेलवे स्टेशन, मंडुवाडीह, सिटी रेलवे स्टेशन पर यह नजारा पूरे दिन आम रहा।
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वहीं रोडवेज बस अड्डे पर खड़ी बसें भी पैक रही। जैसे ही कोई बस आकर खड़ी होती थी लोग उसपर जगह पाने के लिए टूट पड़ते थे। कोई शीशे से अपना सामान सीट पर फेंक देता था तो वहीं कई लोग उसी रास्ते ही घुसकर जगह घेरने का प्रयास करते थे। निजी बसों ने तो बस की छत का भी इस्तेमाल कमाने के लिए किया और जान की परवाह किए बिना छत पर भी यात्रियों को बैठाया। इसका ध्यान न तो यातायात महकमे और ना ही अन्य एजेंसियों ने दिया।
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