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डी-11 गैंग के शूटर गिरधारी का एनकाउंटर: तो क्या राज बन कर रह जाएगी हिस्ट्रीशीटर नितेश की हत्या

Mon, 15 Feb 2021 08:56 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 15 Feb 2021 08:56 AM IST
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Shooter girdhari encounter in lucknow will history sheeter nitesh remain mystery after girdhari death
गिरधारी उर्फ डॉक्टर मुठभेड़ में ढेर - फोटो : अमर उजाला

नई दिल्ली की तिहाड़ जेल से पुलिस कस्टडी रिमांड पर लाया गया डी-11 गैंग का बदमाश गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ कन्हैया उर्फ डॉक्टर सोमवार तड़के लखनऊ के विभूतिखंड थाना क्षेत्र में मुठभेड़ में मारा गया।

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गिरधारी के मारे जाने के साथ ही यह माना जा रहा है कि वाराणसी के सारनाथ थाने के हिस्ट्रीशीटर नितेश सिंह उर्फ बबलू की हत्या राज बन कर रह जाएगी। इसके साथ ही यह भी नहीं पता लग पाएगा कि मऊ के मुहम्मदाबादगोहना के पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की हत्या की साजिश रचने में ध्रुव सिंह और कुंटू सिंह के अलावा कौन सफेदपोश शामिल थे।
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चोलापुर थाने के लखनपुर का मूल निवासी गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ कन्हैया उर्फ डॉक्टर उर्फ टग्गर वर्ष 2001 से जरायम जगत में सक्रिय है। वर्ष 2001 में गिरधारी के खिलाफ लूट का पहला मुकदमा दर्ज किया गया था।
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इसके बाद रंगदारी, लूट और हत्या जैसी गंभीर किस्म की आपराधिक घटनाओं को लेकर चोलापुर थाने के हिस्ट्रीशीटर गिरधारी का आतंक वाराणसी के साथ ही मऊ, आजमगढ़, जौनपुर और मुंबई तक था। पुलिस डोजियर के अनुसार गिरधारी पर 23 मुकदमे दर्ज थे।

30 सितंबर 2019 को शिवपुर स्थित सदर तहसील में नीतेश सिंह उर्फ बबलू की दिनदहाड़े हत्या की गई थी। तभी से गिरधारी फरार चल रहा था। इसके बाद छह जनवरी 2021 को लखनऊ के विभूतिखंड क्षेत्र में अजीत सिंह की हत्या में गिरधारी का नाम आया।

11 जनवरी 2021 को नई दिल्ली में एक नाटकीय घटनाक्रम में गिरधारी गिरफ्तार किया गया था। लखनऊ पुलिस अदालत की अनुमति से उसे नई दिल्ली से पुलिस कस्टडी रिमांड पर पूछताछ के लिए लाई थी। इधर नितेश की हत्या के संबंध में पूछताछ के लिए वाराणसी की पुलिस भी लखनऊ गई थी। पूछताछ जारी ही थी कि सोमवार की भोर पुलिस अभिरक्षा से गिरधारी ने भागने का प्रयास किया और मुठभेड़ में मारा गया।

चोलापुर के एक सफेदपोश का शागिर्द था और फिर बन गया शॉर्प शूटर

वर्ष 2000 तक गिरधारी चोलापुर क्षेत्र के ही एक सफेदपोश का शागिर्द था और छोटे-मोटे झगड़ों में उसका नाम सामने आता था। लोग बताते हैं कि सफेदपोश के संरक्षण में आने से पहले गिरधारी की छोटी सी दुकान भी थी। इसके बाद वह जौनपुर और आजमगढ़ के सफेदपोशों के संपर्क में आया।

वर्ष 2005 में जौनपुर के केराकत क्षेत्र में हत्या के बाद गिरधारी दोनों हाथ से ताबड़तोड़ फायरिंग करने वाले शार्प शूटर के तौर पर जरायम जगत में कुख्यात हो गया। वर्ष 2010 में गिरधारी पर 50 हजार का इनाम घोषित हुआ था। इसके बाद 2019 में नितेश की हत्या हुई तो उस पर एक लाख का इनाम घोषित हुआ था।

पूर्व बाहुबली सांसद के संरक्षण में सबसे ज्यादा रहा गिरधारी
पूर्वांचल के एक बाहुबली पूर्व सांसद का संरक्षण गिरधारी को सबसे ज्यादा भाया। पुलिस सूत्र बताते हैं कि गिरधारी जब पूर्वांचल में अपराध करता था तो पूर्व सांसद उसे छुप कर रहने के लिए मुंबई में सुरक्षित ठिकाना दिलाते थे। दावा यह भी किया जाता है कि पूर्व सांसद की मदद से ही गिरधारी दिल्ली में गिरफ्तार भी हुआ था। गिरधारी इस बार मऊ के मुहम्मदबादगोहना क्षेत्र से ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ना चाहता था। इसके लिए उसने मुहम्मदबादगोहना क्षेत्र के भदीड़ में वर्षों पहले मकान भी बनवाया था।
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