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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Shani Jayanti 2026 Lord Shani will be worshipped in over 100 temples including Vishwanath and Mangala Gauri

Shani Jayanti 2026: काशी में विश्वनाथ धाम, मंगला गौरी समेत 100 से ज्यादा मंदिरों में होगी शनिदेव की पूजा

Tue, 12 May 2026 05:08 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Tue, 12 May 2026 05:08 PM IST
सार

Varanasi News: श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से शुरू होकर 17 मई की रात 1:30 बजे तक रहेगी। इसलिए शनिदेव जयंती 16 मई को मनाई जाएगी।

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Shani Jayanti 2026 Lord Shani will be worshipped in over 100 temples including Vishwanath and Mangala Gauri
kashi vishwanath dham - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर 16 मई यानी शनिवार को भगवान शनिदेव की जयंती श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। श्रीकाशी विश्वनाथ, बाबा कालभैरव, मंगला गौरी, संकठा और केदारेश्वर मंदिर समेत शहर के सौ से ज्यादा मंदिरों में विशेष शृंगार, पूजन-अर्चन और अभिषेक होगा। श्रद्धालु शनि की साढ़ेसाती और कुंडली दोष से मुक्ति की कामना के साथ पूजा करेंगे।

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पिंगल संवत्सर के मंत्री माने जाने वाले शनिदेव की जयंती पर अभिजीत और गोधूलि मुहूर्त में विशेष पूजन का विधान है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से शुरू होकर 17 मई की रात 1:30 बजे तक रहेगी। इसलिए शनिदेव जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि शनिदेव न्याय के देवता हैं और सच्चे मन से पूजा करने वालों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। वे काले तिल, काला वस्त्र, सरसों का तेल और शमी पत्र अर्पित करने से प्रसन्न होते हैं।
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काशीखंड के उल्लेख के अनुसार, सूर्यदेव के कहने पर शनिदेव काशी आए थे और उन्होंने भगवान शिव की तपस्या कर वरदान प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने यहां शिवलिंग की स्थापना की। प्रो. पांडेय के मुताबिक पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:50 से 12:45 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 7:04 से 7:25 बजे तक रहेगा। 
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पूजा सामग्री में सरसों का तेल, लोहे का दीपक, काले तिल, काली उड़द, नीले फूल, काला कपड़ा और शमी पत्र शामिल रहेंगे। श्रद्धालु 108 बार ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः और ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जप करेंगे। शनि दोष से राहत के लिए हनुमान चालीसा का पाठ भी विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धालुओं से सात्विक आहार अपनाने, पीपल के नीचे दीपदान करने तथा काले कौओं और कुत्तों को भोजन कराने की अपील की गई है।

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