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फर्जी कॉल सेंटर से ठगी: गाजीपुर में फेसबुक पर विदेश नौकरी का झांसा; तीन गिरफ्तार; 3.54 लाख रुपये नकद बरामद

Thu, 08 Oct 2026 10:02 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 08 Oct 2026 10:02 PM IST
सार

गाजीपुर में फेसबुक पर विदेश में नौकरी का विज्ञापन देकर फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। मुंबई-दिल्ली से म्यूल खाते और सिम मंगाकर नेटवर्क चलाने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से 3.54 लाख रुपये नकद, 23 सिम, 13 एटीएम कार्ड और दो कार बरामद हुईं।

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Fraud via fake call center Lured with promises of overseas jobs on Facebook in Ghazipur three arrested
तीनों आरोपियों की जानकारी देती पुलिस। - फोटो : संवाद

विस्तार

फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विदेश में नौकरी का आकर्षक विज्ञापन देकर बेरोजगारों को जाल में फंसाने वाले गिरोह का साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ठगी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 3.54 लाख रुपये नकद, 23 सिम कार्ड, 13 एटीएम कार्ड, 10 मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर और दो चार पहिया वाहन बरामद हुए हैं।

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इसका खुलासा करते हुए अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉ. राकेश कुमार मिश्रा ने बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन के सभागार में बताया कि गिरफ्तार आरोपी सोहन राम निवासी सिपाह जहूराबाद, सूर्य प्रकाश अरोरा निवासी सिपाह जहूराबाद और फैजल खान उर्फ सन्नी निवासी रजदेपुर हैं। एएसपी सिटी के अनुसार, तीनों संगठित तरीके से साइबर ठगी कर रहे थे।

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मजदूरों के नाम पर लेते थे खाते और सिम
एएसपी सिटी ने बताया कि मुख्य आरोपी सोहन राम मुंबई और दिल्ली में रहकर रिक्शा चालकों, सिम बेचने वालों और अन्य जरूरतमंद लोगों को रुपये का लालच देकर उनके नाम पर सिम और म्यूल खाते हासिल करता था। इसके लिए उन्हें करीब एक से डेढ़ हजार रुपये दिए जाते थे। सिम और खाते की जानकारी अपने बेटे सूर्य प्रकाश अरोरा को भेजता था। 

इसके बाद फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी के विज्ञापन चलाए जाते थे। विज्ञापन में दिए नंबर पर बेरोजगारों के फोन पहुंचते थे। सूर्य प्रकाश द्वारा संचालित फर्जी कॉल सेंटर में लड़कियां फोन रिसीव कर नौकरी का भरोसा दिलाती थीं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन के नाम पर पांच हजार रुपये लिए जाते थे और बायोडाटा व पासपोर्ट नंबर हासिल किया जाता था।

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फर्जी जॉब ऑफर और डमी टिकट से बढ़ाते थे भरोसा
अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉ. राकेश कुमार मिश्रा के अनुसार, विश्वास में लेने के बाद आरोपियों की ओर से कूटरचित जॉब ऑफर लेटर भेजकर और रकम मांगी जाती थी। सोहन राम डमी फ्लाइट टिकट बुक कराकर देता था, जिससे पीड़ितों को नौकरी और विदेश भेजने की प्रक्रिया वास्तविक लगती थी। इसके बाद म्यूल खातों और क्यूआर कोड के जरिये रकम मंगाई जाती थी। एएसपी सिटी ने बताया कि रकम सीएससी सेंटर संचालकों के खातों में क्यूआर कोड के माध्यम से मंगाकर सूर्य प्रकाश नकद और एटीएम से निकालता था। कुछ रकम के लालच में फैजल खान से भी रुपये निकलवाए जाते थे।

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एक शिकायत के बाद सामने आया नेटवर्क
साइबर क्राइम थाने में फतेपुर सिंकदर के निवासी अभिव जयसवाल ने की शिकायत पर पांच अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायतकर्ता के सीएससी खाते में साइबर अपराध से अर्जित रकम भेजकर अगस्त से सितंबर के बीच करीब 15 लाख रुपये नकद निकाल लिए गए थे। इसके बाद खाते फ्रीज/लीन होने लगे। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से साक्ष्य जुटाए और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एएसपी डॉ. राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि बरामद सिम कार्ड, मोबाइल और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। आरोपियों ने कितने लोगों से ठगी की, इसका पता लगाया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट आई फोर सी, गृह मंत्रालय को भी भेजी जाएगी।

ऐसे बिछाते थे ठगी का जाल

  • फेसबुक पर विदेश में नौकरी का आकर्षक विज्ञापन चलाते थे।
  • विज्ञापन में दिए नंबर पर आने वाली कॉल फर्जी कॉल सेंटर में पहुंचती थी।
  • कॉल रिसीव करने वाली लड़कियां नौकरी का भरोसा दिलाती थीं।
  • रजिस्ट्रेशन के नाम पर पांच हजार रुपये लेकर बायोडाटा और पासपोर्ट नंबर लेते थे।
  • फर्जी जॉब ऑफर लेटर भेजकर अतिरिक्त रकम मांगी जाती थी।
  • डमी फ्लाइट टिकट देकर पीड़ित का भरोसा बढ़ाते थे।
  • म्यूल खातों और क्यूआर कोड से ठगी की रकम मंगाते थे।
  • सीएससी सेंटर से रकम नकद या एटीएम के जरिये निकाल लेते थे।

गिरोह के पास से यह सामान बरामद

  • 3,54,300 रुपये नकद
  • 23 सिम कार्ड एयरटेल, जियो और वीआई के
  • 13 एटीएम कार्ड विभिन्न बैंकों के
  • 10 मोबाइल फोन कीमत करीब पांच लाख रुपये
  • एक कंप्यूटर सेट सीपीयू, मॉनीटर, यूपीएस समेत
  • एक लैपटॉप और कलर प्रिंटर
  • दो चार पहिया वाहन हुंडई वरना और ईको स्पोर्ट्स, कीमत करीब 20 लाख रुपये

गरीबों के खातों को बनाया ठगी की रकम का रास्ता
साइबर ठगी के इस नेटवर्क में सबसे अहम कड़ी ऐसे लोगों के बैंक खाते और सिम थे, जिनके नाम पर लेनदेन होने के बाद ठगी की रकम को आगे बढ़ाया जाता था। अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉ. राकेश कुमार मिश्रा के अनुसार, मुख्य आरोपी सोहन राम मुंबई और दिल्ली में रिक्शा चालकों, सिम बेचने वालों और अन्य जरूरतमंद लोगों को रुपये का लालच देकर उनके नाम पर सिम और म्यूल खाते हासिल करता था।

पुलिस के मुताबिक, इसके लिए संबंधित लोगों को करीब एक से डेढ़ हजार रुपये दिए जाते थे। इसके बाद सिम को कुरियर के माध्यम से गाजीपुर भेजा जाता था। यहां सूर्य प्रकाश अरोरा इसका इस्तेमाल फर्जी कॉल सेंटर और सोशल मीडिया के जरिए नौकरी के नाम पर ठगी में करता था।

ठगी की रकम सीधे आरोपियों के खातों में रखने के बजाय म्यूल खातों और क्यूआर कोड के माध्यम से सीएससी संचालकों के खातों में मंगाई जाती थी। इसके बाद रकम नकद या एटीएम से निकाल ली जाती थी। पुलिस अब बरामद 23 सिम, 13 एटीएम और मोबाइल फोन की जांच कर रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के मामलों का पता लगाया जा सके।

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