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जय जय जय जानकी कांत...
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वाराणसी। संकटमोचन संगीत समारोह की आभासी दुनिया ने लॉकडाउन के संगीत रसिकों को भावों से भर दिया है। भक्ति के साथ ही संगीत की साधना का यह महोत्सव कलाकारों के साथ ही सोशल मीडिया के मंच पर भी हर किसी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
बुधवार को संकटमोचन डिजिटल संगीत समारोह की चौथी निशा का शुभारंभ बनारस घराने के पंडित रविशंकर मिश्रा के कथक से हुआ। पं. रविशंकर ने गोस्वामी तुलसीदास जी की रचना गाइए गणपति जग बंदन...पर कथक के भावों को पिरोया।
रविशंकर ने गोस्वामी तुलसी दास जी की रचना के बाद पारंपरिक तीन ताल में टुकड़ा, गत एवं आमद की प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर रामकुमार मिश्रा और गायन में गौरव मिश्रा ने सहयोग किया। उन्होंने अंत में दादरा में भाव नृत्य की प्रस्तुति के माध्यम से अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। दूसरी
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प्रस्तुति युवा प्रतिभाशाली गायक दीपिका वरदराजन की रही। कर्नाटक शैली की प्रसिद्ध गायिका दीपिका चेन्नई से डिजिटल मंच पर पधारीं। बहुचर्चित फिल्म बाहुबली में पार्श्वगायन से लोकप्रियता बटोरने वाली दीपिका ने हनुमत दरबार में स्वरांजलि की अभ्यर्थना का शुभारंभ जय जय जय जानकी कांत...से
किया। मधुर आवाज में उन्होंने भजन राम राम राम राम भजो भाई...से पूरे माहौल में राम की भक्ति का संचार किया। बनारसी चैती चैत मास चुनरी
रंगैबे...सुनाई तो श्रोता भी वाह-वाह कर उठे। रामदास जी की हनुमान जी पर बनी रचना से उन्होंने गायन को विराम दिया।
तीसरी प्रस्तुति में सितार वादक सेनिया घराने के पद्मभूषण पं देबू चौधरी, अपने पुत्र प्रतीक चौधरी और पौध अधिराज चौधरी के साथ नई दिल्ली से डिजिटल मंच पर विराजमान हुए। तीन पीढि़यों के साथ पहली बार उन्होंने सार्वजनिक प्रस्तुति दी। उन्होंने राग किरवानी में आलाप और जोड़ सुनाया। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया। इससे पहले तीसरी निशा में छठी प्रस्तुति के रूप में सेनिया मैहर घराने के
प्रतिनिधि कलाकार सरोदवादक पं. तेजेंद्र नारायण मजुमदार कोलकाता से जुड़े। उन्होंने राग बिहाग में आलाप एवं जोड़ के बाद समापन गत से किया।
उनके बाद विद्वान कलाकार पं. विजय रंगाराव ने बेंगलुरु से स्वरांजलि अर्पित की। उन्होंने राग भिन्न षड्ज में विलंबित बड़ा ख्याल आजान बाहु
हनुमंता बिनती सुनो हमरी का मधुर गायन किया। अंतिम प्रस्तुति में कोलकाता के युवा सरोद वादक अभिषेक लाहिड़ी ने राग झिंझोटी में आलाप एवं जोड़ की सधी प्रस्तुति से आभासी पटल पर श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी।
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बुधवार को संकटमोचन डिजिटल संगीत समारोह की चौथी निशा का शुभारंभ बनारस घराने के पंडित रविशंकर मिश्रा के कथक से हुआ। पं. रविशंकर ने गोस्वामी तुलसीदास जी की रचना गाइए गणपति जग बंदन...पर कथक के भावों को पिरोया।
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रविशंकर ने गोस्वामी तुलसी दास जी की रचना के बाद पारंपरिक तीन ताल में टुकड़ा, गत एवं आमद की प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर रामकुमार मिश्रा और गायन में गौरव मिश्रा ने सहयोग किया। उन्होंने अंत में दादरा में भाव नृत्य की प्रस्तुति के माध्यम से अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। दूसरी
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प्रस्तुति युवा प्रतिभाशाली गायक दीपिका वरदराजन की रही। कर्नाटक शैली की प्रसिद्ध गायिका दीपिका चेन्नई से डिजिटल मंच पर पधारीं। बहुचर्चित फिल्म बाहुबली में पार्श्वगायन से लोकप्रियता बटोरने वाली दीपिका ने हनुमत दरबार में स्वरांजलि की अभ्यर्थना का शुभारंभ जय जय जय जानकी कांत...से
किया। मधुर आवाज में उन्होंने भजन राम राम राम राम भजो भाई...से पूरे माहौल में राम की भक्ति का संचार किया। बनारसी चैती चैत मास चुनरी
रंगैबे...सुनाई तो श्रोता भी वाह-वाह कर उठे। रामदास जी की हनुमान जी पर बनी रचना से उन्होंने गायन को विराम दिया।
तीसरी प्रस्तुति में सितार वादक सेनिया घराने के पद्मभूषण पं देबू चौधरी, अपने पुत्र प्रतीक चौधरी और पौध अधिराज चौधरी के साथ नई दिल्ली से डिजिटल मंच पर विराजमान हुए। तीन पीढि़यों के साथ पहली बार उन्होंने सार्वजनिक प्रस्तुति दी। उन्होंने राग किरवानी में आलाप और जोड़ सुनाया। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया। इससे पहले तीसरी निशा में छठी प्रस्तुति के रूप में सेनिया मैहर घराने के
प्रतिनिधि कलाकार सरोदवादक पं. तेजेंद्र नारायण मजुमदार कोलकाता से जुड़े। उन्होंने राग बिहाग में आलाप एवं जोड़ के बाद समापन गत से किया।
उनके बाद विद्वान कलाकार पं. विजय रंगाराव ने बेंगलुरु से स्वरांजलि अर्पित की। उन्होंने राग भिन्न षड्ज में विलंबित बड़ा ख्याल आजान बाहु
हनुमंता बिनती सुनो हमरी का मधुर गायन किया। अंतिम प्रस्तुति में कोलकाता के युवा सरोद वादक अभिषेक लाहिड़ी ने राग झिंझोटी में आलाप एवं जोड़ की सधी प्रस्तुति से आभासी पटल पर श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी।