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‘अब स्कूल नहीं जाना’: छह दिन बाद घर आई स्कूल में हमले की शिकार मासूम, पिता की गोद में पहुंची तो रो पड़ा परिवार

Wed, 04 Nov 2026 07:03 PM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला Published by: Nivedita Updated Wed, 04 Nov 2026 07:03 PM IST
सार

चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) के डॉक्टरों की विशेष निगरानी में इलाज के बाद स्वस्थ हुई नन्ही परी का घर पहुंचने पर परिजनों और पड़ोसियों ने किसी त्योहार की तरह भव्य स्वागत किया।

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Panchkula school incident Girl returns home after being discharged from PGI
पीजीआई में इलाज के बाद घर लौटी मासूम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

आखिरकार इंतजार खत्म हुआ। पंचकूला के सरकारी स्कूल के कमरा नंबर-19 में तीसरी कक्षा के छात्र के हमले में बुरी तरह जख्मी हुई छह साल की मासूम 6 दिन बाद पीजीआई से जिंदगी की जंग जीतकर घर लौट आई। 
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सोमवार को जब पिता की गोद में सिमटी-सहमी वह पीर मुच्छला गांव में चाचा के घर पहुंची तो आंगन में खड़ा पूरा परिवार फूट-फूट कर रो पड़ा। किसी ने फूल बरसाए तो किसी ने आंसुओं से स्वागत किया।
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पिछले छह दिन से घर का चूल्हा ठंडा था, आंगन सूना था। मां की आंखें दरवाजे पर टिकी थीं, बड़ी बहन दूसरी कक्षा की किताबें छोड़कर बार-बार पूछ रही थी- दीदी कब आएगी। सबसे बड़ा भाई चुपचाप कोने में खड़ा था। दादा-दादी दुआ कर रहे हैं। जैसे ही बच्ची आई, सन्नाटा खुशी में बदल गया।
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फुफू के गले लगकर सबसे ज्यादा रोई
परिवार में सबसे ज्यादा लगाव बच्ची का अपनी फुफू से है। घर आते ही वह सीधे फुफू के गले से लिपट गई और देर तक हंसती-रोती रही। फुफू ने उसे सीने से लगा लिया, थपकियां दीं तो वह शांत हुई। मां ने उसे गोद में उठाकर सीने से लगा लिया, जैसे दुनिया की सारी बुरी नजरों से बचा लेना चाहती हो। पिता की आंखें छलक आईं, बोले- बेटी लौट आई, इससे बड़ा दिन कोई नहीं। दादा-दादी ने बलैया लेकर नजर उतारी। चाचा-चाची ने प्यार से माथा चूमा। बड़ी बहन अपनी छोटी बहन का हाथ पकड़कर बैठी रही, मानो अब उसे अकेला नहीं छोड़ेगी।

अभी पूरी तरह ठीक नहीं, चक्कर और पैरों में दर्द
पिता ने बताया कि पीजीआई में सभी टेस्ट होने के बाद डॉक्टरों ने छुट्टी दी है, लेकिन यह पूरी छुट्टी नहीं है। अभी 10 दिन बाद दोबारा चेकअप के लिए बुलाया गया है। बेटी पूरी तरह स्वस्थ नहीं है। उसे अब भी चक्कर आते हैं और टांगों में तेज दर्द होता है। रात में नींद से चौंककर उठ जाती है और कहती है- अब स्कूल नहीं जाना। शरीर के जख्म तो भर जाएंगे, लेकिन मन पर लगा डर अभी गहरा है।

सूचना मिलते ही जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी भी बच्ची से मिलने घर पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य की जानकारी ली और हर संभव मदद का भरोसा दिया। शिक्षा विभाग की ओर से फूलों से स्वागत किया गया, लेकिन परिवार की नम आंखें सब कुछ बयां कर रही थीं।

6 साल की उम्र में उसने जो दर्द सहा, वह बड़ों से भी नहीं सहा जाता। अब पूरा परिवार बस यही दुआ कर रहा है कि उनकी परी जल्द दौड़े-खेले और उसकी किलकारी फिर आंगन में गूंजे। 


समाजसेवी अनिल उठाएंगे पढ़ाई का पूरा खर्च
एक तरफ जहां पीड़ित परिवार इस भयानक मानसिक और शारीरिक दौर से उबरने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज के संवेदनशील लोग भी मदद के लिए आगे आए हैं। पंचकूला के प्रमुख समाजसेवी अनिल थापर ने बच्ची के उज्ज्वल भविष्य और शिक्षा को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि बच्ची जब तक और जहां तक पढ़ाई करना चाहेगी, उसकी संपूर्ण शिक्षा का खर्च वह खुद वहन करेंगे। 
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