संकटमोचन संगीत समारोह: जावेद अली के 'कुन फाया कुन' गाने पर झूमे लोग, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा परिसर
संकटमोचन संगीत समारोह में बॉलीवुड सिंगर जावेद अली ने देर रात अपनी प्रस्तुति दी। अली मौला..गाते ही तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दी। परिसर में पहली बार हर-हर महादेव के साथ गाने की फिर मांग हुई।
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यही हिंदुस्तान की खूबसूरती है। संकटमोचन दरबार में एक ओर हर हर महादेव तो दूसरी ओर से मौला अली और निजामुद्दीन औलिया के तराने...। शनिवार की मध्यरात्रि हनुमान लला के आंगन में एक ओर सूफी नज्म तो बीच बीच में हर हर महादेव का उद्घोष। एआर रहमान की नज्म कुन फाया कुन को जब बाॅलीवुड गायक जावेद अली ने अपने सुरों से सजाया तो बजरंग बली का आंगन रूमानियत से भर गया।
संकट मोचन संगीत समारोह के शताब्दी वर्ष की छठवीं निशा में 1:30 बजे बॉलीवुड गायक जावेद अली जब मंच पर पहुंचे, पूरा आंगन श्रोताओं से भर चुका था। उन्होंने राग किरवानी पर सजे गीत से शुरुआत की। उसके बाद लब पर आए, गीत सुहाने, माने न जियरा लाख बहाने... सुनाया तो श्रोताओं की हसरत और जागी।
इसके बाद जब मौला-मौला मौला मेरे मौला....गुनगुनाया तब जनता झूम उठी। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए जब कुन फाया कुन...वो जो तुझमें समाया, वो जो मुझमें समाया... गीत पेश किया, तब जनता भी थिरक उठी। इस बीच दर्शकों की तरफ से फरमाइश पर ही उन्होंने कई गीत पेश किए। श्रोताओं ने फिल्मी गानों की फरमाइश की तो जावेद ने कहा वे केवल शास्त्रीय और उपशास्त्रीय ही गाएंगे।
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बाबा के दरबार में आकर हो रही सुखद अनुभूति
संकटमोचन संगीत समारोह के शताब्दी समारोह में प्रस्तुति देने पहुंची मालिनी अवस्थी ने कहा कि बहुत ही सुखद अनुभूति है। हम अपनी आंखों के सामने एक इतिहास बनते देख रहे हैं और इसके सहभागी भी हैं। संकटमोचन के दरबार में होने वाला यह ऐतिहासिक उत्सव है। हम सभी के लिए यह बेहद गर्व की बात है। मालिनी ने कहा कि पहले हम यहां श्रोता बनकर आते थे, बड़े-बड़े कलाकारों को सुनते रहे और फिर कलाकार के रूप में गा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यहां कोई भेद नहीं है। न गाने बजाने वालो में न सुनने वालों में हनुमान जी के दरबार में सब एक हैं। सुनने वाले को देखिए बड़ा से बड़ा छोटा सा छोटा जमीन पर बैठकर सुनता है। जो परंपरा है इस महोत्सव की वह आज भी कायम है।
बड़े बड़े कलाकार यहां आकर अपने आप को धन्य मानते हैं। जो श्रोता हो हनुमान जी तो वहां का मंच प्रणम्य है हम लोगों के लिए। पूरे भारत वर्ष नहीं बल्कि पूरे विश्व में संकटमोचन शताब्दी समारोह जैसा भव्य आयोजन होना चाहिए। सब प्रकार के संगीतकारों की कलाकारों की यहां पर उपस्थिति है। सब बड़े मन से यहां आकर गाते हैं। ये सबसे बड़ी बात है इस मंच की बाकी जगह आप देखेंगे कि शास्त्रीय संगीत हैं या कहीं कहीं नृत्य नहीं होता। यहां पर ऐसा कोई भेद भाव नहीं है।