फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   RTI activist asked for details of donation dakshina from Kashi Vishwanath temple administration got answer search on Google in RTI varanasi

वाराणसी: आरटीआई एक्टिविस्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन से मांगा दान-दक्षिणा और चढ़ावे का ब्यौरा, जवाब मिला- गूगल पर खोज लो

Fri, 08 Oct 2021 01:15 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 08 Oct 2021 01:15 AM IST
सार

आरटीआई एक्टिविस्ट ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम में हो रहे खर्चों और कर्ज के बारे में जनता को पता होना चाहिए। यह व्यक्ति का अधिकार है। मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ावे और दान-दक्षिणा से कितने पैसे मिले और इनका किस-किस मद में उपयोग हो रहा है।

विज्ञापन
RTI activist asked for details of donation dakshina from Kashi Vishwanath temple administration got answer search on Google in RTI varanasi
काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने आरटीआई में अजीबो-गरीब जवाब दिया है। आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा मांगे जवाब में मंदिर के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी की ओर कहा गया है कि इस प्रश्न का उत्तर गूगल साइट पर उपलब्ध है। वहां से खोज लीजिए। वहीं मंदिर प्रशासन ने आय-व्यय और एक्ट से संबंधित जानकारियों का जवाब देने से इनकार कर दिया।

विज्ञापन


आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. रविंद्र सहाय कैलाशी ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पर खर्च का हिसाब-किताब छिपाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरटीआई के जरिए मंदिर प्रशासन की आय-व्यय और एक्ट से संबधित जानकारियां मांगी थी, जिसका जवाब देने से मंदिर प्रशासन ने इनकार कर दिया है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- वाराणसी: मणिकर्णिका घाट पर महाश्मशान बाबा का मंदिर सीवर में डूबा, कांग्रेस ने किया प्रदर्शन
विज्ञापन
विज्ञापन


धाम में हो रहे खर्चे के बारे में मांगी जानकारी
डॉ. सहाय ने बताया कि काशी विश्वनाथ धाम में हो रहे खर्चों और कर्ज के बारे में जनता को पता होना चाहिए। यह व्यक्ति का अधिकार है। मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ावे और दान-दक्षिणा से कितने पैसे मिले और इनका किस-किस मद में उपयोग हो रहा है इसे बताए जाने में आखिरकार क्या दिक्कत है। मंदिर प्रशासन को सूचना गुप्त रखने की क्या जरूरत है।

डॉ. सहाय के सवाल में शामिल धारा 30 के जवाब में बताया गया कि इस प्रश्न का उत्तर गूगल साइट पर उपलब्ध है। इस धारा में मंदिर के लिए और उसकी ओर से कोई भी उधार बिना राज्य सरकार की सहमति से नहीं लिया-दिया जाएगा।

ये भी पढ़ें- मिर्जापुर: घर से टहलने निकले डी-फार्मा के छात्र की पीट-पीटकर हत्या, दूसरे गांव में हुई घटना से तनाव
 

150 साल पुराने पेड़ को काटने पर दिया था धरना

डॉ. रविंद्र सहाय कैलाशी ने 2018 में सरस्वती फाटक के पास 150 साल पुराने पीपल का पेड़ अवैध रूप से मंदिर प्रशासन के द्वारा काटे जाने पर धरना दिया गया था। हाईकोर्ट और राज्य सूचना आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लिया था।


पूछे थे चार सवाल
रविंद्र सहाय ने अपनी आरटीआई में चार सवाल पूछे थे। इसमें मंदिर कार्यालय के लेखा लिपिक दिनेश कुमार पांडेय के सहायक लेखा अधिकारी बनने की प्रक्रिया, कॉरिडोर योजना में कुल कितने सेवइतनामा कराए गए। किस मकान नंबर में किस देवी-देवता का मंदिर था। विश्वनाथ मंदिर ने 2019 में एक निजी बैंक से कितना लोन लिया। उस लोन का भुगतान कैसे किया। वहीं अंतिम सवाल में श्रीकाशी विश्वनाथ अधिनियम-1983 की धारा 30 की प्रति मांगी थी। मगर मंदिर प्रशासन ने जवाब में सूचना के अधिकार कानून के धारा 8(1) जी की दुहाई देते हुए किसी भी सवाल की जानकारी देने से मना कर दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed