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आरटीई : चेतावनी और नोटिस के बाद भी मनमानी जारी
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तमाम चेतावनी के बाद भी जिले के कई निजी विद्यालयों ने शिक्षा का अधिकार के तहत पंजीकरण नहीं कराया है। ऐसे विद्यालयों को विभाग नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है। अगर नए सत्र में भी वह पंजीकरण नहीं कराते है तो उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी। पंजीकरण नहीं कराने वाले 249 में से 10-15 बड़े स्कूल हैं। आरटीई के तहत सत्र 2021-22 की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिले के 946 स्कूलों में 8,655 बच्चों का प्रवेश हो चुका है। सत्र 2022-23 के लिए पोर्टल पर पंजीकरण के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। आरटीई के जिला समन्वयक विमल कुमार केशरी ने बताया कि जिले में 249 निजी विद्यालयों को चेतावनी व नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद भी स्कूलों ने अधिनियम के तहत पंजीकरण नहीं कराया।
आनाकानी कर रहे विद्यालय
आरटीई में दाखिला देने से पहले शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों की सूची तैयार की जाती है। निजी स्कूल अकसर दाखिला नहीं देते थे और सरकार से लाभ भी ले रहे थे। ऐसे में प्रक्रिया में बदलाव लाया गया। स्कूल को स्वयं आरटीई पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करने का नियम लाया गया और फीस देने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की गई, ताकि पारदर्शिता लाई जा सके। पिछले साल भी विभाग ने पंजीकरण नहीं कराने वाले स्कूलों को कई बार चेतावनी जारी की। हर बाद निजी विद्यालय आनाकानी कर बचते रहे।
फिर फंस रहा अल्पसंख्यक का मसला
सत्र 2020 में आरटीई के तहत जिले के कई निजी स्कूलों ने खुद को अल्पसंख्यक बताकर प्रवेश लेने से इनकार कर दिया था। उसके उचित दस्तावेज भी जमा नहीं किए थे। जिस कारण इन स्कूलों की सूची में आए बच्चों को दूसरे स्कूलों में दाखिला देना पड़ा था। अगले वर्ष भी लगता है कि अभिभावकों को यही परेशानी झेलनी पड़ेगी। अभी तक स्कूलों ने शिक्षा विभाग कार्यालय में अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जमा नहीं किया है।
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आनाकानी कर रहे विद्यालय
आरटीई में दाखिला देने से पहले शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों की सूची तैयार की जाती है। निजी स्कूल अकसर दाखिला नहीं देते थे और सरकार से लाभ भी ले रहे थे। ऐसे में प्रक्रिया में बदलाव लाया गया। स्कूल को स्वयं आरटीई पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करने का नियम लाया गया और फीस देने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की गई, ताकि पारदर्शिता लाई जा सके। पिछले साल भी विभाग ने पंजीकरण नहीं कराने वाले स्कूलों को कई बार चेतावनी जारी की। हर बाद निजी विद्यालय आनाकानी कर बचते रहे।
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फिर फंस रहा अल्पसंख्यक का मसला
सत्र 2020 में आरटीई के तहत जिले के कई निजी स्कूलों ने खुद को अल्पसंख्यक बताकर प्रवेश लेने से इनकार कर दिया था। उसके उचित दस्तावेज भी जमा नहीं किए थे। जिस कारण इन स्कूलों की सूची में आए बच्चों को दूसरे स्कूलों में दाखिला देना पड़ा था। अगले वर्ष भी लगता है कि अभिभावकों को यही परेशानी झेलनी पड़ेगी। अभी तक स्कूलों ने शिक्षा विभाग कार्यालय में अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जमा नहीं किया है।
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