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अमर उजाला पड़ताल: खुशनसीब सड़कें... हर तीन महीने में बनीं, बदनसीब सड़कें... बनने के महीने भर बाद खोदा

Tue, 14 Jul 2026 04:20 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Tue, 14 Jul 2026 04:20 PM IST
सार

वाराणसी में वीआईपी मूवमेंट वाले रास्तों पर सड़कें हर तीन महीने में बन जाती हैं। वहीं कुछ सड़कों को बनने के महीने भर बाद ही खोद दिया जाता है। खराब सड़कों पर चलने पर वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। 

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Roads designated for VIP movement in Varanasi repaired yet some of them have already started breaking up
अच्छी और खराब सड़कें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी शहर में जहां वीआईपी मूवमेंट होता है, वहां की सड़कें खुशनसीब हैं, जबकि इन्हीं से जुड़े कई लिंक मार्गों की हालत बद से बदतर है। कई सड़कें ऐसी हैं जो लगभग हर तीन महीने में बन जातीं हैं। वहीं कुछ सड़कों को बनने के महीने भर बाद ही खोद दिया जाता है।

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बीएलडब्ल्यू से लेकर फुलवरिया मार्ग को तीन महीने पहले ही बनवाया गया था। इससे पहले वीआईपी मूवमेंट की वजह से भी सड़क 6 महीने पहले बनवाई गई थी। वहीं, कोदई चौकी से गिरजाघर तक की 200 मीटर सड़क को होली के बाद 10 लाख रुपये की लागत से बनवाया गया था। हाल ही में सीवर लाइन डालने के लिए इसे खोद दिया गया है।
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इन सड़कों पर न केवल गड्ढे हैं, बल्कि जगह-जगह गिट्टियां भी उखड़ चुकी हैं। कई स्थानों पर गड्ढों में बरसाती पानी भरा हुआ है, लेकिन जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो लगातार बारिश में इन सड़कों की स्थिति और खराब हो सकती है। 

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पांच खुशनसीब सड़कें

  • बनारस रेलवे स्टेशन के सामने: वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए बीएलडब्ल्यू से लेकर फुलवरिया मार्ग को तीन महीने पहले ही बनवाया गया था।
  • विश्वनाथ मंदिर से मैदागिन मार्ग: मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए यह 500 मीटर लंबी सड़क को 30 लाख में बनाया गया है।
  • नदेसर से अंधरापुल: वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए 500 मीटर सड़क का तीन महीने पहले 25 लाख रुपये की लागत से निर्माण कराया गया था।
  • तेलियाबाग से लहुराबीर: 500 मीटर सड़क का निर्माण अप्रैल में 30 लाख रुपये की लागत से कराया गया। सड़क पर पेंटिंग का कार्य भी कराया गया।
  • लंका से ट्रॉमा सेंटर: 400 मीटर सड़क का 20 लाख रुपये की लागत से निर्माण कराया गया था। इस मार्ग से अधिकतर एंबुलेंस गुजरती हैं, इसलिए इसकी विशेप देखरेख की जाती है।


पांच बदनसीब सड़कें

  • छोटा लालपुर से महावीर मंदिर: पिछले वर्ष 45 लाख रुपये की लागत से 1500 मीटर सड़क बनाई गई थी। फिलहाल यहां गड्ढों में बरसाती पानी भरा हुआ है।
  • रामकटोरा से लहुराबीर: नवरात्र के दौरान 10 लाख रुपये की लागत से 300 मीटर सड़क बनाई गई थी। अब यहां गड्ढे हो गए हैं, जिससे स्कूली बच्चों को परेशानी हो रही है।
  • पियरी तिराहे से बेनियाबाग: जनवरी में 25 लाख रुपये की लागत से 500 मीटर सड़क बनाई गई थी। अब इसकी गिट्टियां उखड़ गई हैं और सड़क ऊबड़-खाबड़ हो गई है। 
  • कोदई चौकी से गिरजाघर: होली के बाद 10 लाख रुपये की लागत से 200 मीटर सड़क बनाई गई थी। हाल ही में सीवर लाइन डालने के लिए इसे खोद दिया गया है।
  • नगवां से अस्सी चौराहा: अप्रैल में 30 लाख रुपये की लागत से 500 मीटर सड़क बनाई गई थी। अब इसकी गिट्टिटयां उखड़ गई हैं और जगह-जगह छोटे-छोटे गड्ढे हो गए हैं।

वीआईपी सड़कों का नियमित रखरखाव
वीआईपी सड़कें नियमित रखरखाव, बेहतर इंजीनियरिंग और यातायात प्रबंधन के कारण सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के लिए जानी जाती हैं। वहीं, कई लिंक मार्ग गड्ढों और उखड़ी गिट्टियों के कारण लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त इंजीनियर एसके राम ने बताया कि शहर में सामान्यतः एक किलोमीटर सड़क के निर्माण पर 30 से 50 लाख रुपये खर्च होते हैं। मुख्य मार्गों पर तीन इंच और लिंक मार्गों पर डेढ़ इंच मोटी बिटुमिन की परत बिछाई जाती है।

गड्ढों से हर दिन बढ़ रहा हादसों का खतरा
शहर के कई लिंक मार्गों पर उखड़ी गिट्रिट्टयां और गड्ढे राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। दोपहिया वाहन चालकों को संबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर वाहन चालक फिसलकर चोटिल हो चुके हैं। उनका कहना है कि बरसात के मौसम को देखते हुए सड़कों की मरम्मत प्राथमिकता पर करानी चाहिए।

वीआईपी मूवमेंट के दौरान मुख्य सड़कों का निर्माण कराया गया था। शहर के मुख्य मार्गों पर कोई विशेष समस्या नहीं है। लिंक मार्गों पर कार्यदायी एजेंसियों की ओर से की जाने वाली खोदाई के कारण दिक्कत आती है। सड़कों को गड्ढामुक्त करने का अभियान लगातार चल रहा है। केके सिंह, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी

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