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बीएचयू का ऐतिहासिक है यह जनतंत्र पेड़, 70 सालों से संविधान दिवस के उस दौर की बताता रहा है कहानी

Sat, 25 Jan 2020 01:11 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 25 Jan 2020 01:11 PM IST
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Republic day 2020 BHU historical democracy jantantra tree indian constitution day varanasi
बिड़ला हॉस्टल में जनतंत्र का वृक्ष लगा है। - फोटो : अमर उजाला।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय(बीएचयू) में एक वृक्ष ऐसा है जो पिछले 70 सालों से आज तक आजादी की कहानी बयां कर रहा है। देश की आजादी की लड़ाई के एक बड़े केंद्र रहे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों ने भारतीय संविधान को लागू किए जाने की तिथि 26 जनवरी 1950 की स्मृति में यह पेड़ लगाया था।

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छात्रों के अनुसार, अशोक का यह वृक्ष हमें यह संदेश देता है कि हम भारतीय संविधान का सम्मान करें। तत्कालीन छात्रों और शिक्षिकों ने इसे जनतंत्र वृक्ष का नाम दिया था।

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छात्र हर साल 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को इसके आसपास साफ-सफाई करते हैं। बीएचयू के बिड़ला हॉस्टल के प्रांगण में 26 जनवरी 1950 को जनतंत्र वृक्ष शिक्षकों और छात्रों ने लगाया था। इसके साथ ही उसे जनतंत्र वृक्ष का नाम देकर उसके पास प्रतीक स्तंभ स्थापित किया।

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उद्देश्य यह था कि पौधा सदैव याद दिलाए कि उसे भारतीय गणराज्य में संविधान लागू किए जाने की तिथि को लगाया गया था। तब से लेकर आज तक प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर बिड़ला हॉस्टल के छात्र पेड़ के इर्दगिर्द साफ-सफाई करते हैं।

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मौजूदा समय मे बिड़ला हॉस्टल तीन भाग अ, ब, स  में विभाजित है। विश्वविद्यालय में लगा ये पेड़ उस आजादी के संघर्षों को भी याद दिलाता है, जिस संघर्ष में हमारे कई क्रांतिकारी शहीद हो गए तो वहीं बाबा साहब अंबेडकर की उस मेहनत को भी तरोताजा रखता है, जिन्होंने हमारे देश को अपना खुद का संविधान दिया। तीनों हॉस्टल के छात्रों के अनुसार यह वृक्ष हमें हमेशा यह सीख देता है कि हम सदैव भारतीय संविधान का सम्मान करें।

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