फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Red color and white of peace symbolizes the martyrdom of Jesus Christ varanasi

वाराणसी: ईसा मसीह की शहादत का प्रतीक है लाल रंग और शांति का सफेद

Tue, 17 Dec 2019 04:52 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 17 Dec 2019 04:52 PM IST
विज्ञापन
Red color and white of peace symbolizes the martyrdom of Jesus Christ varanasi
लाल और सफेद रंग में रंगा चर्च। - फोटो : अमर उजाला।

आजादी के बाद बनारस में कई चर्चों का निर्माण हुआ, वहीं कई गिरजाघरों को मरम्मत और रंग रोगन के बाद उसी रूप में संवारे रखा गया। मगर ऐसे भी गिरजाघर हैं, जो वक्त और हालात के हाथों खुद की पहचान खोते नजर आ रहे हैं, तो कुछ शान-ओ-शौकत से खड़े हैं और तमाम लोगों की ये आस्था का प्रतीक बने हुए हैं। क्रिसमस से पहले चर्च सजने लगे हैं।

विज्ञापन


कैंटोंमेंट के ऐतिहासिक चर्च लाल गिरजाघर में आजादी के पहले अंग्रेज फौजी आराधना करते थे। उस समय भी इस गिरजाघर का रंग लाल था और आज भी उसी रंग और रूप में यह गिरजाघर मौजूद है। चर्च का लाल रंग ईसा मसीह की शहादत का प्रतीक है तो सफेद रंग अमन और शांति का। इसी रंग से गिरजाघर को खूबसूरती प्रदान की गई है। साढ़े चार एकड़ में बने इस चर्च में हिंदी के साथ ही उर्दू और अंग्रेजी में भी प्रार्थना होती है। वर्तमान में इस गिरजाघर परिसर में 19 बड़े आम के पेड़ है।
विज्ञापन


यह गिरजाघर इस साल 140वीं वर्षगांठ मना रहा है। गिरजाघर के ऊपर बड़ा सा घंटा है। जो प्रार्थना के पूर्व जब बजता है तो लोगों को यह पता चल जाता है कि चर्च में प्रार्थना शुरू होने वाली है। इस चर्च में पादरी संजय दान ही आराधना कराते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

गिरजाघर के सेक्रेटरी विजय दयाल बताते हैं कि ब्रिटिश पादरी एलवर्ट फैंटीमैन ने इस खूबसूरत चर्च की बुनियाद 1879 में रखी। उस समय ये पूरा इलाका सेना की छावनी में तब्दील था। ब्रिटिश सेना में ज्यादातर प्रोटेस्टेंट मसीही समुदाय के ही लोग थे। यहां चर्च बनाकर आराधना के लिए ही ब्रिटेन से पादरी एलवर्ट को अंग्रेज हुकुमत ने भेजा था। एलवर्ट के ही निर्देशन में लाल गिरजा बनकर तैयार हुआ।

इस गिरजा घर को स्थापित करने का एक प्रमुख कारण 1841 कटिंग मेमोरियल स्कूल की स्थापना थी। जिसमें पढ़ाने वाली ज्यादातर शिक्षिकाएं मिशनरी की थीं। जो चर्च बनने के बाद यहां प्रार्थना करने आती थीं। 1887 में ईश्वरी लाल इस चर्च के पहले भारतीय पादरी बनाए गए। चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया ने 1995 में सैम जोशुआ सिंह को गिरजा का 60वां पादरी बनाया। सचिव विजय दयाल का कहना है कि इस चर्च को मरम्मत की जरूरत है, लेकिन कैंटोमेंट बोर्ड से अनुमति नहीं मिल रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed