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माह-ए-रमजान : मुस्लिम भाइयों के लिए हिंदू परिवार बना रहे मशहूर बनारसी सेवइयां

Fri, 15 Jun 2018 02:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 15 Jun 2018 02:46 PM IST
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Ramzan Varanasi Sewai Famous throughout the Purvanchal formed Hindu family
सेवई बनाता कारीगर - फोटो : अमर उजाला

बगैर सेवईं के ईद पूरी नहीं होती। इसमें भी बनारस की सेवईं के क्या कहने। पूर्वांचल भर में बनारसी सेवईयों की धूम है। यहां की किमामी सेवई न सिर्फ पूर्वांचल में बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश समेत मध्य प्रदेश, बिहार, मुंबई, दिल्ली और कोलकाता भर में मशहूर है। यही वजह है कि रमजान भर इसकी खरीदारी के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते तो हैं, साथ ही यहां से दूसरे शहरों को बनारसी सेवइयां कारोबार के लिहाज से भेजी भी जाती हैं। 


 

Ramzan Varanasi Sewai Famous throughout the Purvanchal formed Hindu family
varanasi - फोटो : अमर उजाला
बनारस में यूं तो पहले मदनपुरा, दालमंडी में सेवइयां बनती थीं लेकिन अब सिर्फ भदऊं इलाके में सेवइयां बनाने का काम होता है। रमजान आने के करीब दो महीने पहले से लोग इस काम में लग जाते हैं। बनारस की सेवईं की खास बात यही है कि ये काफी महीन होती है। ये मुसलमानी सेवईं के नाम से भी मशहूर है। 
Ramzan Varanasi Sewai Famous throughout the Purvanchal formed Hindu family
sevai - फोटो : अमर उजाला
बनारस के सेवईं की एक और खास बात ये है कि इस काम में केवल हिंदू परिवार ही लगा है। यह बनारस की एक गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल ये भी है।  पुश्तों से सेवईं के गृह उद्योग से जुड़े नंद लाल मौर्या बताते हैं कि करीब साठ साल पहले उनके पिता स्वर्गीय बिहारी लाल ने हाथ से सेवईं पारने का काम शुरू किया था।
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Ramzan Varanasi Sewai Famous throughout the Purvanchal formed Hindu family
सेवई बनाता कारीगर - फोटो : अमर उजाला
अब तो इसके लिए मशीन आ गई है लेकिन आज भी इसमें मेहनत खूब लगती है। उनके बेटे अनूप व अचल मौर्या भी इस काम में लगे हैं। उनका कहना है कि सेवईं बनाना एक कला है और इसी कला की बदौलत हमारा जीविकोपार्जन चल रहा है।
 
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Ramzan Varanasi Sewai Famous throughout the Purvanchal formed Hindu family
varanasi - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी सेवईं एसोसिएशन के सेक्रेटरी सच्चेलाल अग्रहरि का कहना है कि बनारस की सेवईं का जोड़ कहीं मिलता। यही वजह है कि दूसरे शहरों और राज्यों में यहां की सेवईं की पूछ है। ईद के दौरान करीब 50 हजार कुंतल सेवइयां बिक जाती हैं।
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