फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   ram mandir

मुहूर्त के मुद्दे पर शास्त्रार्थ कर जनता के सामने रखें सत्य

Sat, 25 Jul 2020 12:45 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 12:45 AM IST
विज्ञापन
ram mandir
वाराणसी। श्री रामजन्म भूमि मंदिर निर्माण मुहूर्त पर शास्त्रार्थ कराने के लिए श्री विद्यामठ पूरी तरह से तैयार है। शंकराचार्य के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ और काशी के ज्योतिषियों से आह्वान किया है कि वह मुहूर्त के मुद्दे पर शास्त्रार्थ करके जनता के सामने सत्य रखें। काशी के अंकित तिवारी ने आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ को शास्त्रार्थ के लिए आमंत्रित किया था और उन्होंने उनकी चुनौती को स्वीकार कर लिया है। इस शास्त्रार्थ के आयोजन के लिए हम स्थान सहित अन्य व्यवस्था करने को तैयार हैं।
विज्ञापन

शास्त्रार्थ का नियम है कि पहले दोनों पक्ष 5-5 नाम उपलब्ध कराते हैं। उनमें से जो नाम दोनों पक्षों की ओर से आता है उन्हीं को शास्त्रार्थ का मध्यस्थ स्वीकार किया जाता है। इसके बाद तिथि, स्थान, समय एवं शास्त्रार्थ की शर्तें तय होती है और शास्त्रार्थ आरंभ होता है। यदि मुहूर्त बताने वाले आचार्य गणेश्वर शास्त्री और अंकित तिवारी दोनों उपर्युक्त बातें तय करें तो हम इस महत्वपूर्ण विषय पर शास्त्रार्थ के लिए श्रीविद्यामठ का स्थान और अन्य व्यवस्था करके को तैयार हैं।
विज्ञापन

बता दें कि 5 अगस्त को अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास का मुहूर्त काशी के आचार्य पं.गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने निकाला है। उन्होंने 32 सेकेंड का मुहूर्त बताया है जिसके आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिलान्यास करेंगे। इस मुहूर्त को गलत बताकर ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज ने अपना विरोध प्रकट किया है। कहा है कि अशुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों का दुष्परिणाम पूरे देश को भुगतना पड़ सकता है। इस मामले पर पूरे देश के विद्वान और ज्योतिषी दो भागों में बंट गए हैं। कुछ शंकराचार्य के पक्ष को प्रमाण मान रहे हैं तो कुछ गलत मुहूर्त बताने वाले आचार्य द्रविड़ को।
विज्ञापन
विज्ञापन

वेदव्यास के अनुसार पांच अगस्त को है श्रावण मास
वाराणसी। शास्त्रार्थ के मुद्दे पर आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ का कहना है कि 23 जुलाई को मैंने सूचित किया था कि मैं अस्वस्थ हूं। मैंने 24 जुलाई का सांगवेद विद्यालय में शास्त्रार्थ का समय भी दिया था। जिनको शास्त्रार्थ करना आवश्यक लगे वह जिलाधिकारी से अनुमति लें। सर्वमान्य विद्वान भी तय करें। भगवान वेदव्यास ने पुराणों में जन्माष्टमी के संबंध में जो वाक्य लिखे हैं वे शब्द कल्पद्रुमकोश में उद्धृत हैं। उसमें श्रीकृष्ण के जन्म के समय श्रावण का उल्लेख है।

ज्योतिषी अंकित तिवारी एवं उनके ज्योतिषाचार्यों को वेदव्यास का लेखन मान्य है या नहीं वे जानें। उन्हें अगर वेदव्यास का लेखन मान्य है तो पांच अगस्त को श्रावण मास उन्हें मान्य करना पड़ेगा। शब्दकल्पद्रुमकोश में लिखे अनुसार पांच अगस्त को मुख्य चांद्र श्रावण एवं गौण भाद्रपद मान्य करने में क्या आपत्ति है। पूर्वपक्ष गौण भाद्रपद को लेकर प्रश्न उठाया गया है। उत्तर पक्ष मुख्य चांद्र श्रावण के अनुसार है। इसलिए पांच अगस्त को भगवान वेदव्यास के अनुसार श्रावण मास होने से उस दिन के मुहूर्त में भाद्रपद मास का दोष नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed