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पीएम मोदी ने इंडिया कार्पेट एक्सपो का किया शुभारंभ, कहा- चरखा ही जीवन का सार

Mon, 22 Oct 2018 10:08 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 22 Oct 2018 10:08 AM IST
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PM Modi inaugurated india carpet expo by video conferencing in varanasi
कार्यक्रम का शुभारंभ करते पीएम मोदी - फोटो : amar ujala
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत के ग्रामीण इलाकों में सूत काटने की परंपरा रही है। बनारस की जितनी पहचान संत कबीर से जुड़ी है, उतनी ही हस्तशिल्प से भी है। संत कबीर सूत भी काटते थे और उसके जरिए जीवन का संदेश भी देते थे।
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चरखा जीवन का सार है और जिसने इसको समझ लिया, उसने जीवन का महत्व समझ लिया। भारत में हस्तशिल्प को जीवन दर्शन से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री ने रविवार को यह बात रविवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में चार दिवसीय इंडिया कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ करते हुए कही।
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एक्सपो में आए देशी-विदेशी मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा, गांधी जी के चरखे का स्वतंत्रता का आंदोलन में बहुत महत्व रहा है। इसी प्रकार हस्तशिल्प के माध्यम से स्वावलंबन को मजबूत बनाया जा रहा है। भारत दुनिया के 100 देशों को नौ हजार करोड़ रुपये का कालीन निर्यात कर रहा है।
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हाथ से बने कालीन उत्पादन में भारत टॉप पर है। दुनिया भर के कार्पेट मार्केट का 35 प्रतिशत हिस्सा भारत निर्यात करता है। उन्होंने दो-तीन वर्ष में इसके 50 प्रतिशत तक होने का अनुमान और 2022 तक कारोबार के ढाई गुना करने का लक्ष्य रखा।

प्रधानमंत्री ने इसे 25 हजार करोड़ तक पहुंचाने का आह्वान कारोबारियों-बुनकरों से किया। इसके साथ ही उन्होंने काशी के साथ-साथ देश के बुनकरों और शिल्पियों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दी। मुद्रा योजना, बुनकरों की शिक्षा, पहचान योजनाओं के बारे में बताया। कहा, बुनकरों के जीवन को सरल बनाने के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। 

बुनकरों, शिल्पियों को मिले जानकारी 

PM Modi inaugurated india carpet expo by video conferencing in varanasi
कार्यक्रम में बोलती स्मृति ईरानी - फोटो : amar ujala
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने एक्सपो के पहले दिन कहा कि पंडित दीनदयाल का हमेशा से प्रयास रहा कि अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का विकास किया जा सके। सीईपीसी के साथ मिलकर इसका प्रयास किया जा रहा है।

बुनकरों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी बुनकरों, शिल्पियों को मिल सके इसके लिए एक प्रमोशन कार्यक्रम सीईपीसी के साथ मिलकर करेंगे। साथ ही चीन की तर्ज पर अमेरिका में भी वेयरहाउस खोलने का भरोसा जताया।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा का दर्शन पूजन किया। इस दौरान नदेसर स्थित होटल लौटते समय नीचीबाग गुरुद्वारे के पास बनारसी कचौड़ी और जलेबी का स्वाद लिया। भाजपा नेताओं ने बताया कि दर्शन पूजन के चलते उन्होंने सुबह से कुछ खाया नहीं था।

दर्शन के बाद उन्होंने बहुत तेज भूख लगने की बात कही तो तत्काल नीचीबाग पर गाड़ी रुकवाकर कचौड़ी जलेबी खिलाया गया। इसके बाद वे होटल चली गई। होटल से दीनदयाल हस्तकला संकुल जाते समय नदेसर पर कुल्लड़ वाली चाय पी। इस दौरान भाजपा नेताओं ने उन्हें मेरी काशी पुस्तक भेंट की।

38 देशों के 200 से ज्यादा खरीदार पहुंचे

PM Modi inaugurated india carpet expo by video conferencing in varanasi
हस्तकला संकुल में हुआ कार्यक्रम - फोटो : amar ujala
36वें इंडिया कार्पेट एक्सपो की शुरुआत के पहले दिन 38 देशों के 200 से ज्यादा खरीदार तथा 150 भारतीय प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। निर्यातकों और खरीदारों के बीच कालीनों की गुणवत्ता और खरीदारी आदि के लिए बातचीत शुरू हो गई है। 24 अक्तूबर तक चलने वाले एक्सपो का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से उद्घाटन किया। 

उन्होंने कहा कि आप सभी का बनारस में, बनारस के सांसद के नाते स्वागत करता हूं। बताया, भारत एक मात्र देश है, जो छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा कार्पेट बनाता है। उन्होंने भदोही और श्रीनगर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पेट टेक्नोलॉजी को और समृद्ध बनाने और ‘जीरो इफेक्ट और जीरो डिफेक्ट’ के लिए प्रयास करने की बात कही।

मुद्रा योजना, पहचान पत्र, मेगा क्लस्टर योजना, स्किल डेवलपमेंट के प्रोग्राम के साथ-साथ आईआईसीटी भदोही में बीटेक कार्यक्रम शुरू करने की जानकारी दी। इसके बाद भदोही के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने भदोही के विकास व जरूरतों के बारे में बताया।

इसके बाद वस्त्र मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बुनकरों से जुड़ी विकास योजनाओं पर प्रकाश डाला। साथ कार्पेट इंडस्ट्री के विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की।

डेविड समद ने 2019 से जुड़े कलर ट्रेंड की जानकारी के साथ ही बाजार की मांग के अनुरूप कालीन निर्माण के सूत्र बताए। विधायक भदोही रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने एक्सपो को वाराणसी में आयोजित करने की मांग उठाई। 

प्रवासी भारतीय सम्मेलन के लिए तैयार रहने का आह्वान

PM Modi inaugurated india carpet expo by video conferencing in varanasi
कार्यक्रम में आए लोग - फोटो : amar ujala
प्रधानमंत्री ने सभी उद्यमियों, व्यापारियों, बुनकरों व हस्तशिल्पियों को प्रवासी भारतीय सम्मेलन के मद्देनजर तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कला का प्रदर्शन करने का बड़ा अवसर आने वाला है। सम्मेलन में दुनियाभर से आने वाले व्यापारी काशी व आसपास के हस्तशिल्प के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक समृद्धि और ‘बदलती काशी’ का आनंद ले पाएंगे।

प्रधानमंत्री ने सभी को धनतेरस और दीपावली की अग्रिम बधाई देने के साथ ही ज्यादा मेहनत के लिए हौसला भी बढ़ाया। दशहरे के बाद उन्हें पहली बार टेक्नोलॉजी के माध्यम से वराणसी से जुड़ने का मौका मिला है। बोले, यह समय सबसे अधिक व्यस्तता वाला होता है। काम अधिक, मांग अधिक होता है और इसी समय श्रम व कला का पुरस्कार मिलता है।

दीनदयाल हस्तकला संकुल में पहली बार हो रहे इंडिया कार्पेट एक्सपो के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली के साथ-साथ वाराणसी में भारत के कार्पेट उद्योग के जरिए बुनकरों, व्यापारियों को कौशल व बेहतर उत्पाद दुनिया को दिखाने अवसर मिल रहा है। जिन लक्ष्यों को लेकर संकुल का निर्माण किया गया उनकी तरफ तेजी से हम बढ़ रहे हैं।

 

वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर को कार्पेट का हब बताया। अब इसे एक्सपोर्ट का ग्लोबल हब बनाया जा रहा है। इससे पहले वस्त्र मंत्री ने भी संकुल की सार्थकता पर प्रकाश डाला। उद्यमियों, व्यापारियों और बुनकरों सहित टेक्सटाइल सेक्टर जुड़े सभी लोगों को पीएम ने ‘फाइव एफ’ का मतबल समझाया।

 

उन्होंने कहा कि सबसे पहले उत्पाद को ‘फार्म टू फाइबर’ फिर ‘फाइबर टू फैक्ट्री’, इसके बाद ‘फैक्ट्री टू फैशन’ और अंत में ‘फैशन टू फॉरेन’ से जोड़ना है। उन्होंने उत्पाद के ग्लोबलाइजेशन का मंत्र दिया। कहा कि इस आयोजन से उत्पाद का दुनियाभर में प्रचार होगा।

निर्यातकों को डिस्प्ले के लिए भी जगह नहीं मिली

PM Modi inaugurated india carpet expo by video conferencing in varanasi
खरीदार - फोटो : amar ujala
कार्पेट एक्सपो में शामिल होने के लिए आए कालीन व्यवसाइयों को स्टाल के लिए जगह के साथ तो समझौता करना ही पड़ा, खरीदारों को भी स्टाल खोजने में पसीने छूट गए। कई लोगों ने प्रदर्शनी की अव्यवस्थाओं को ‘भूल भुलैया’ की संज्ञा भी दी।

पिछले कई साल से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान मे कार्पेट एक्सपो 8000 वर्गमीटर से ज्यादा क्षेत्र में आयोजित होता रहा है। आयोजकों की मानें तो बृहद आयोजन के चलते इस बार इससे भी ज्यादा क्षेत्र की जरूरत थी। बावजूद इसके दीनदयाल हस्तकला संकुल और वस्त्र संग्रहालय का एरिया मिलाकर केवल छह हजार वर्गमीटर जगह भी किसी तरह निकल पाई।

बेसमेंट से लेकर गलियारों तक स्टाल ही स्टाल होने से कालीन व्यवसाइयों को कम जगह में उत्पाद सजाने पड़े। कई कालीन व्यापारियों ने शिकायत की कि वह अपने कालीनों का ठीक ढंग से डिस्प्ले नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी ओर फोन से लोकेशन बताने के बावजूद लोगों को गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कत आई।
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