इंटरनेट की दुनिया कितनी बड़ी इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकती है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इंटरनेट से जुड़े संसाधनों में उलझे रहते हैं। इसमें लोग अपने परिवार को बिल्कुल भी समय नहीं दे पाते हैं। सोशल मीडिया पर हर समय जुड़े रहने से मानसिक दबाव भी बनता है। सोशल मीडिया पर ज्यादा तर युवा लोग ही है, जिससे लोग खुद का कटा हुआ महसूस करते हैं।
युवा लोग दिन-रात फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम में ही लगे रहते हैं। सोशल मीडिया के मायाजाल में इतना बिजी रहते हैं कि न ही परिवार, न ही दोस्तों को समय निकाल पाते हैं। लेकिन अब यह ट्रेंड पिछले कुछ दिनों से बदला है। लोग अब मोबाइल, लैपटाप, कंप्यूटर से दूरी बना रहे हैं और अपनों को समय दे रहे हैं।
उनका कहना है कि वह अभी ऑफिस या मोबाइल को दूर रख थोड़ा सा अपने लिए समय निकाल रहे हैं। वह अपनों के साथ घुल-मिल रहे हैं। और इंटरनेट की दुनिया से खुद को दूर कर रहे हैं।
चांदपुर में रहने वाले अजय कहते हैं कि वह महमूरगंज में जॉब करते हैं। कभी ऑफिस से आने के बाद वह सिर्फ मोबाइल में बिजी हो जाते थे, घरवालों को बिल्कुल भी समय नहीं दे पाते थे। इस कारण उन पर मानसिक दवाब भी रहता था, लेकिन अब मैने मोबाइल को दूर कर दिया है। अब थोड़ा सा समय अपने लिए और फैमिली के लिए निकालता हूं।
प्रदीप जायसवाल कहते हैं कि उनके ऑफिस का काम लैपटाप का है। छुट्टी होने के बाद से वह मोबाइल पर इंटरनेट चलाना शुरू कर देते थे। जिस पर वह फेसबुक, इंस्टाग्रम चलाते थे। लेकिन अब उन्होंने भी मोबाइल-इंटरनेट छोड़कर अपने लिए छुट्टी का समय निकालते हैं। वहीं गोदौलिया की रहने वाली काजल सेठ का कहना है कि वह अभी पढ़ती हैं, लेकिन उन्होंने भी पहले के मुकाबले मोबाइल चलाना बंद कर दिया है। जिससे मानसिक दवाब कम हुआ है।