वाराणसी: आंकड़े हैरान कर देने वाले, कोर्ट में पाक्सो और दुष्कर्म के सैकड़ों मामलों की सुनवाई लंबित
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वाराणसी में पाक्सो(लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012) की अदालत में बच्चे-बच्चियों से यौन उत्पीड़न से जुड़े 919 मुकदमें विचाराधीन हैं। इस अधिनियम के वर्ष 2012 में प्रभावी होने के बाद स्थानीय न्यायालय में वर्ष 2013 में विशेष न्यायाधीश(पॉक्सो) की अदालत की शुरुआत हुई। प्रारंभ में पाक्सो के मुकदमों की संख्या कम थी लेकिन समय बीतने के साथ संख्या में बढ़ोतरी होती गई।
इस वर्ष में अब तक 15 मुकदमों में अभियुक्तों को अदालत दंडित कर चुकी है। कुछ ऐसे भी मामलें हैं जिसमें गवाहों के पक्षद्रोही होने का लाभ आरोपितों को मिला और वे दोषमुक्त हो गए।
54 मामलों में आरोप पत्र दाखिल
नवंबर 2019 में 54 मुकदमों में जिले के कई थानों की ओर से आरोपितों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए गए। मुकदमों की सुनवाई के बीच अदालत में प्रतिदिन लगभग आधा दर्जन मुकदमों में गवाहों के बयान तथा उनसे जिरह की कार्रवाई होती रहती है। लगभग 697 मुकदमों में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाही चल रही है। पॉक्सो अधिनियम के साथ हत्याके कुछ मुकदमे शामिल हैं जिनकी सुनवाई विचाराधीन है।
10 को मिल चुकी है सजा
ऐसे ही फास्ट ट्रैक कोर्ट(द्रुतगामी न्यायालय) में दुष्कर्म(भारतीय दंड संहिता की धारा 376) के 201 मुकदमों की सुनवाई चल रही है। इनमें चौबेपुर और सारनाथ थाना में दुष्कर्म के साथ हत्या के दर्ज दो मुकदमे शामिल हैं। इस वर्ष में अब तक दस मुकदमों में अदालत ने अभियुक्तों को सजा सुना चुकी है। इस अदालत में नाबालिग तथा बालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के अपराध के लगभग 112 मुकदमों की सुनवाई चल रही है।