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पार्किंग की जगह गोदाम, क्यों न लगे जाम
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
Updated Tue, 06 Dec 2016 02:17 AM IST
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शहर की अधिकतर बहुमंजिली व्यावसायिक इमारतों, नर्सिंग होम और अस्पतालों में जो जगह पार्किंग के लिए निर्र्धारित होनी चाहिए, वह कहीं गोदाम तो कहीं दूसरे उपयोग में लाई जा रही है। महज 25 फीसदी व्यावसायिक इमारतें हैं, जिनकी अपनी पार्किंग है। बाकी भवनों, अस्पतालों के बाहर सड़क पर ही पार्किंग बना दी गई है। अब जब पहले से तंग सड़कों पर वाहनों की पार्किंग होगी तो जाम क्यों नहीं लगेगा लेकिन नगर निगम और वीडीए की मेहरबानी से कहीं कोई रोकटोक नहीं। ये बेतरतीब पार्किंग शहर के अधिकतर हिस्सों में रोजाना जाम का सबब बन रही है और जनता परेशान है।
शहर में व्यावसायिक भवनों की संख्या 970 के करीब है। खुद नगर निगम और वीडीए के अधिकारी स्वीकार करते हैं कि इन भवनों में बमुश्किल 25 फीसदी ऐसे हैं, जहां अंडरग्राउंड पार्किंग की व्यवस्था है। बाकी के बेसमेंट में कहीं गोदाम तो कहीं दूकानें चल रही हैं। ऐसे 125 भवन तो शहर के अतिव्यस्त क्षेत्रों में हैं। गोदौलिया, लहुराबीर, चौक, मैदागिन, विशेश्वरगंज, आशापुर, सिगरा, रथयात्रा, महमूरगंज, लंका, कैंट, नदेसर, चौकाघाट, कज्जाकपुरा, गोलगड्डा आदि स्थानों पर बने इन भवनों में पार्किंग की कहीं कोई व्यवस्था ही नहीं है।
दूकानों के बाहर सड़क पर ही दो और चार पहिया वाहन खड़े होते हैं और इसके चलते रोजाना जाम लगता है लेकिन नगर निगम और वीडीए की आंखें खुल नहीं रहीं। जबकि, किसी भी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के निर्माण के वक्त ही पार्किंग सुनिश्चित कराना वीडीए की जिम्मेदारी है लेकिन सेटिंग के आगे सारे दिशा-निर्देश दम तोड़ देते हैं। यही हाल नर्सिंग होम और अस्पतालों का है। ज्यादातर अस्पतालों के पास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। मरीज और उनके तीमारदारों के वाहन अस्पतालों के बाहर ही खड़े होते हैं।
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शहर में व्यावसायिक भवनों की संख्या 970 के करीब है। खुद नगर निगम और वीडीए के अधिकारी स्वीकार करते हैं कि इन भवनों में बमुश्किल 25 फीसदी ऐसे हैं, जहां अंडरग्राउंड पार्किंग की व्यवस्था है। बाकी के बेसमेंट में कहीं गोदाम तो कहीं दूकानें चल रही हैं। ऐसे 125 भवन तो शहर के अतिव्यस्त क्षेत्रों में हैं। गोदौलिया, लहुराबीर, चौक, मैदागिन, विशेश्वरगंज, आशापुर, सिगरा, रथयात्रा, महमूरगंज, लंका, कैंट, नदेसर, चौकाघाट, कज्जाकपुरा, गोलगड्डा आदि स्थानों पर बने इन भवनों में पार्किंग की कहीं कोई व्यवस्था ही नहीं है।
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दूकानों के बाहर सड़क पर ही दो और चार पहिया वाहन खड़े होते हैं और इसके चलते रोजाना जाम लगता है लेकिन नगर निगम और वीडीए की आंखें खुल नहीं रहीं। जबकि, किसी भी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के निर्माण के वक्त ही पार्किंग सुनिश्चित कराना वीडीए की जिम्मेदारी है लेकिन सेटिंग के आगे सारे दिशा-निर्देश दम तोड़ देते हैं। यही हाल नर्सिंग होम और अस्पतालों का है। ज्यादातर अस्पतालों के पास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। मरीज और उनके तीमारदारों के वाहन अस्पतालों के बाहर ही खड़े होते हैं।
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