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Varanasi: नीट प्रतियोगी छात्र की हत्या के केस में फिर से विवेचना का आदेश, कोर्ट में पुलिस की एफआर खारिज

Sat, 29 Oct 2022 06:43 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 29 Oct 2022 06:43 PM IST
सार

नीट प्रतियोगी छात्र नितेश मिश्रा की हत्या के मुकदमे में भेलूपुर पुलिस ने 18 दिन में ही फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी। साथ ही, आरोपियों को क्लीन चिट भी दे दी। अब कोर्ट ने अग्रिम विवेचना का आदेश मुकदमे के विवेचक को दिया है।
 

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Order for re examination in murder case of NEET preparing student nitesh mishra in varanasi
नीट प्रतियोगी छात्र नितेश मिश्रा - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

वाराणसी में नीट प्रतियोगी छात्र नितेश मिश्रा की हत्या के मुकदमे में भेलूपुर पुलिस ने 18 दिन में ही फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एफआर को अस्वीकृत करते हुए फिर से विवेचना का आदेश दिया है। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता रितेश मौर्य ने कोर्ट में प्रोटेस्ट दाखिल किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अग्रिम विवेचना का आदेश मुकदमे के विवेचक को दिया।  प्रतापगढ़ के शेषपुर अठगवां गांव निवासी धर्मेंद्र मिश्रा का बेटा नितेश मिश्रा (20) सुंदरपुर स्थित शुकुलपुरा में किराए के कमरे में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
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12 जुलाई की शाम उसकी संदिग्ध हाल में मौत हो गई। नितेश के चाचा रविंद्र मिश्रा की तहरीर पर भेलूपुर पुलिस ने आठ दिन बाद 20 जुलाई को मकान मालिक समेत 11 नामजद व एक अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया। चाचा रविंद्र मिश्रा का आरोप है कि भेलूपुर पुलिस ने बगैर ठोस तथ्यों की जांच किए ही मात्र 18 दिन के भीतर फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाकर कोर्ट में पेश किया। वहीं, आरोपियों को क्लीन चिट दे दिया।
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अदालत से ही न्याय की उम्मीद
इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां अधिवक्ता रितेश मौर्य के माध्यम से प्रोटेस्ट दाखिल किया गया। जिसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए पुर्न विवेचना का आदेश दिया है। पीड़ित रविंद्र मिश्रा ने कहा कि अदालत से ही न्याय की उम्मीद है।
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भेलूपुर पुलिस पर गंभीर आरोप

पीड़ित रविंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि भेलूपुर पुलिस पहले दिन से ही हीलाहवाली कर रही है। मुकदमा दर्ज करने के लिए 8 दिन तक दौड़ाया। बयान तक ढंग से विवेचक ने नहीं लिया। लखनऊ की फोरेंसिक टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि केस से संबंधित सभी का नार्को कराया जाए। इन सब के बावजूद विवेचक ने किसी भी साक्ष्य व सबूत की जरूरत नहीं समझी और मात्र 18 दिन में ही एफआर लगा दिया था।

इन सवालों का किसी के पास नहीं जवाब

रविंद्र के अनुसार मकान मालिक और उसके दोस्तों ने छत से गिरने पर नितेश के मौत का कारण बताया था।  40 फीट की ऊंचाई से गिरने पर शरीर की कोई भी हड्डी नहीं टूटी। मोबाइल फोन में खरोंच तक नहीं। मकान मालिक ने परिजनों, पुलिस, एबुंलेंस तक को सूचना नहीं दी। घटनास्थल पर परिजनों के पहुंचने से पहले राख क्यों डाली गई थी, घटनास्थल पर घड़ी, चश्मा, चप्पल मौजूद नहीं था। नितेश के कमरे का बिस्तर भी अस्तव्यस्त था।

डीजीपी के आदेश पर भी नहीं बदला विवेचना

भेलूपुर थाने से विवेचना बदलवाने के लिए मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई थी। डीजीपी ने 16 अगस्त को वाराणसी कमिश्नरेट के उच्चाधिकारियों को विवेचना बदलने का आदेश दिया। इसके बावजूद भी विवेचना नहीं बदली गई, बल्कि 18 अगस्त को विवेचक ने न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दिया। 

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