UP News: पूर्वांचल में पैर पसार रहा सीपीआई (एम), बिहार- झारखंड में विधानसभा चुनाव से पहले NIA और ATS अलर्ट
पूर्वांचल में प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (एम) पैर पसार रहा है। इसे लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। ऐसे में बिहार और झारखंड में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट से पहले चिह्नित लोगों पर एनआईए और एटीएस की नजर रहेगी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिहार और झारखंड के विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट से पहले पूर्वांचल के जिलों में प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की भनक लगने पर एनआईए और एटीएस की सतर्कता बढ़ी है। बीते हफ्ते प्रदेश में दो जगह एनआईए का छापा पड़ा। इसे लेकर उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, बलिया और आजमगढ़ जनपद के चिह्नित लोगों पर शीर्ष सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की विशेष नजर रहेगी।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, उत्तर भारत के राज्यों में सीपीआई (माओवादी) के भूमिगत कैडर अपने संगठन को विस्तार देने के लिए प्रयासरत हैं। जो भी संदिग्ध हाल में चिह्नित हुए हैं, उन्हें सीपीआई (माओवादी) की विचारधारा के प्रचार के लिए पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो (ईआरबी) के प्रमुख प्रशांत बोस की ओर से पैसा उपलब्ध कराया जा रहा था।
चिह्नित संदिग्धों का एकमात्र उद्देश्य यही है कि प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा के अनुसार हिंसक कृत्यों को अंजाम देने के लिए उपयुक्त व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें अपने साथ जोड़ें। इसके खिलाफ कार्रवाई के क्रम में 15 अगस्त 2023 से अब तक पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों से सीपीआई (माओवादी) का संगठन खड़ा करने के लिए प्रयासरत नौ लोग एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं, 11 जगह छापा मार कर एटीएस ने उनके डिजिटल उपकरण, सिम और डायरी जब्त की है।
स्नातक के छात्रों पर विशेष ध्यान, मजदूर वर्ग के बीच प्रयासरत
आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के एक अफसर ने बताया कि सीपीआई (माओवादी) का फोकस विशेष रूप से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के स्नातक के छात्र-छात्राओं पर है। इसके लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र संगठन तैयार कर उन्हें शोषक और शोषित की मनमानी परिभाषा बताते हुए व्यवस्था के विरुद्ध उकसाया जाता है।
इसके अलावा अब जंगल का इलाका छोड़ कर पूर्वांचल के खेतिहर मजदूर, बुनकर मजदूर और दिहाड़ी मजदूर के बीच भी प्रतिबंधित संगठन अपने कैडर के विस्तार के लिए जोर-शोर से प्रयासरत है। इनमें से ज्यादातर ऐसे लोग हैं बिहार और झारखंड के मतदाता हैं और कामकाज के सिलसिले में वाराणसी सहित पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में आते-जाते रहते हैं।
तकनीकी रूप से सुदृढ़ हुआ भूमिगत कैडर
एनआईए और एटीएस का शिकंजा कसता देख सीपीआई (माओवादी) का भूमिगत कैडर तकनीक के साथ खुद को अपडेट कर रहा है। एटीएस के एक अफसर के अनुसार गिरफ्तारी के डर से प्रतिबंधित संगठन के लोग एक-दूसरे के मोबाइल पर सामान्य या व्हाट्सएप कॉल नहीं करते हैं। वह बातचीत के लिए अलग-अलग किस्म के एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं। व्हाट्स एप वगैरह के माध्यम से संदेश का जो आदान-प्रदान होता है, उसमें बातचीत के लिए निर्धारित कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता है।