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पूर्वांचल में सपा से खिसक सकते हैं मुस्लिम वोट !
ब्यूरो,अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Sat, 28 Jan 2017 07:29 PM IST
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mukhtar ansari
- फोटो : bbc
मुहम्मदाबाद विधानसभा सीट इन दिनों काफी चर्चा में है। जिसकी मुख्य वजह अंसारी बंधु हैं। पहले सपा में विलय को लेकर इनकी चर्चा आम और खास में होती रही, अब बसपा में शामिल होने के बाद भी चर्चा जारी है।
सियासी उठापटक के बीच विस चुनाव में अंसारी बंधुओं को बसपा ने न केवल स्वीकार किया है, बल्कि मुख्तार अंसारी, उनके बेटे और बड़े भाई को टिकट देकर मैदान में उतार दिया है। अंसारी बंधुओं के बसपा में आने से मुस्लिम वोटों का बंटवारा तय माना जा रहा है।
अब तक सपा के प्रति निष्ठावान रहे मुसलमान भी खिसकते नजर आ रहे हैं। यह हाल अकेले मुहम्मादाबाद विधानसभा सीट का नहीं है, बल्कि इसका असर यहां की सातों विधानसभा सीटों पर देखने को मिल सकती है। इसे लेकर अभी से कई दल चिंतित हैं।
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विधानसभा चुनाव काफी करीब आ गया है। सभी दलों के उम्मीदवार नौ फरवरी से अपना नामांकन करना शुरू कर देंगे। इससे पहले सभी दल अपनी राजनीतिक गोटी बिछाने में जुटे हैं। जनपद की राजनीति में हुए व्यापक उलट-फेर के कारण अभी तक कई दल दलदल से नहीं निकल पाए हैं।
जिले की राजनीति में अंसारी बंधुओं का लोहा सभी मानते रहे हैं। चुनाव के ऐन वक्त पर इनका बहुजन समाज पार्टी में आना सपा के लिए सिरदर्द बन गया है। सपा उम्मीदवार अब तक खुद को मजबूत मान रहे थे।
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सियासी उठापटक के बीच विस चुनाव में अंसारी बंधुओं को बसपा ने न केवल स्वीकार किया है, बल्कि मुख्तार अंसारी, उनके बेटे और बड़े भाई को टिकट देकर मैदान में उतार दिया है। अंसारी बंधुओं के बसपा में आने से मुस्लिम वोटों का बंटवारा तय माना जा रहा है।
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अब तक सपा के प्रति निष्ठावान रहे मुसलमान भी खिसकते नजर आ रहे हैं। यह हाल अकेले मुहम्मादाबाद विधानसभा सीट का नहीं है, बल्कि इसका असर यहां की सातों विधानसभा सीटों पर देखने को मिल सकती है। इसे लेकर अभी से कई दल चिंतित हैं।
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विधानसभा चुनाव काफी करीब आ गया है। सभी दलों के उम्मीदवार नौ फरवरी से अपना नामांकन करना शुरू कर देंगे। इससे पहले सभी दल अपनी राजनीतिक गोटी बिछाने में जुटे हैं। जनपद की राजनीति में हुए व्यापक उलट-फेर के कारण अभी तक कई दल दलदल से नहीं निकल पाए हैं।
जिले की राजनीति में अंसारी बंधुओं का लोहा सभी मानते रहे हैं। चुनाव के ऐन वक्त पर इनका बहुजन समाज पार्टी में आना सपा के लिए सिरदर्द बन गया है। सपा उम्मीदवार अब तक खुद को मजबूत मान रहे थे।
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अंसारी बंधु बढ़ाएंगे बसपा का वोट बैंक
mukhtar ansari abbas ansari
- फोटो : अमर उजाला
उन्हें सपा के वोट बैंक यादव और मुसलमान पर पूरा भरोसा था। लेकिन अब मुस्लिम वोट खिसकता नजर आ रहा है। इससे बेचैनी भी बढ़ती जा रही है। प्रत्याशी मुस्लिम वोटरों पर बारिक निगाह गड़ाए हुए हैं।
अंसारी बंधुओं का इतिहास भी कुछ ऐसा ही रहा है। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उन्होंने खुद का साबित करने का काम किया है, यही कारण है कि सपा और बसपा चुनाव पूर्व उन पर डोरे डालने में जुटी हुई थी। हालांकि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शुरू से ही इनसे दूरी बनाकर रखना चाहते थे। लेकिन अब अंसारी बंधुओं के बसपा में चले जाने के बाद सभी चिंतित हैं।
जिले की सातों विधानसभा सीटों की बात करें तो बसपा, सपा, भाजपा, भासपा के प्रत्याशी घोषित किए जा चुके हैं। मुहम्मदाबाद सीट पर सपा का सस्पेंस अब भी बरकरार हैं। गाजीपुर ही नहीं आसपास के जिलों में भी अंसारी बंधुओं का दबदबा कायम है।
यही वजह है कि जनपद की राजनीति में फिर से नई हलचल शुरू हो गई है। सियासतदान अपनी नई रणनीति तैयार कर रहे हैं। सपा को मुस्लिम वोट जहां खिसकता नजर आ रहा है, वहीं अंसारी बंधुओं के आने से बसपा से जुड़े अगड़े वोटों का नुकसान भी होता नजर आ रहा है।
सातों विधानसभा सीटों पर जंग छिड़ गई है। पहले जोनल कोऑर्डिनेटर मुनकाद अली की वजह से कुछ मुसलमानों का झुकाव पार्टी की तरफ हुआ था। अब अंसारी बंधुओं के आने से मुस्लिम वोट बसपा की तरफ जा सकते हैं।
अंसारी बंधुओं का इतिहास भी कुछ ऐसा ही रहा है। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उन्होंने खुद का साबित करने का काम किया है, यही कारण है कि सपा और बसपा चुनाव पूर्व उन पर डोरे डालने में जुटी हुई थी। हालांकि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शुरू से ही इनसे दूरी बनाकर रखना चाहते थे। लेकिन अब अंसारी बंधुओं के बसपा में चले जाने के बाद सभी चिंतित हैं।
जिले की सातों विधानसभा सीटों की बात करें तो बसपा, सपा, भाजपा, भासपा के प्रत्याशी घोषित किए जा चुके हैं। मुहम्मदाबाद सीट पर सपा का सस्पेंस अब भी बरकरार हैं। गाजीपुर ही नहीं आसपास के जिलों में भी अंसारी बंधुओं का दबदबा कायम है।
यही वजह है कि जनपद की राजनीति में फिर से नई हलचल शुरू हो गई है। सियासतदान अपनी नई रणनीति तैयार कर रहे हैं। सपा को मुस्लिम वोट जहां खिसकता नजर आ रहा है, वहीं अंसारी बंधुओं के आने से बसपा से जुड़े अगड़े वोटों का नुकसान भी होता नजर आ रहा है।
सातों विधानसभा सीटों पर जंग छिड़ गई है। पहले जोनल कोऑर्डिनेटर मुनकाद अली की वजह से कुछ मुसलमानों का झुकाव पार्टी की तरफ हुआ था। अब अंसारी बंधुओं के आने से मुस्लिम वोट बसपा की तरफ जा सकते हैं।