फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   munshi premchand village lamahi waiting for nayak

जन्मदिन विशेष: मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही को आज भी ‘नायक’ का इंतजार

Tue, 31 Jul 2018 01:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 31 Jul 2018 01:50 PM IST
विज्ञापन
munshi premchand village lamahi waiting for nayak
लमही में बना प्रवेश द्वार - फोटो : अमर उजाला
मुंशी प्रेमचंद के उपन्यासों जैसी ही उनके गांव की कहानी। वाराणसी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर वाराणसी-आजमगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पांडेयपुर चौराहे से करीब पांच किलोमीटर का यह रास्ता पूरा होने पर जैसे ही गोदान के होरी-धनिया, पूस की रात के हलकू जैसे किरदारों के जनक मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही का प्रवेश द्वार आता है, उनकी छाप महसूस होने लगती है।
विज्ञापन


गांव सुंदर और बिजली-सड़क जैसी सुविधाओं वाला है लेकिन लमही का अपना दर्द भी है। सियासत रूपी साहूकार ने लमही बने किसान को जकड़ रखा है। यानी लमही को अपने ‘नायक’ का इंतजार अब भी है।
विज्ञापन


मुंशी प्रेमचंद के पैतृक आवास के ठीक सामने मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास, कहानियों और किरदारों पर शोध करने के लिए मुंशी प्रेमचंद मेमोरियल रिसर्च सेंटर की बिल्डिंग बने डेढ़ साल हो चुका है पर केंद्र-राज्य सरकार के बीच उद्घाटन कौन करे को लेकर दांव-पेच चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यही नहीं, 11 साल पहले मुंशी प्रेमचंद की 125वीं जयंती पर उनके पैतृक आवास को संग्रहालय बनाने की घोषणा की गई थी लेकिन संग्रहालय तो दूर, जहां मुंशीजी ने यहां कफन, निर्मला और ईदगाह जैसी रचनाएं लिखीं, उसकी दीवारें खस्ता हालत में है।

मरम्मत के सरकारी प्रयास किये जाने के बावजूद दीवारों की सीलन खत्म नहीं हुई है। साहित्य प्रेमियों को उस दिन का इंतजार है, जब उनके पैतृक आवास की दीवारों पर शीशे में मढ़े मुंशीजी की अनमोल थातियां सहेजी जाएंगी।

फिलहाल, इस वक्त ये सब बीएचयू के भारत कला भवन की शान हैं। यही नहीं, अगल-बगल के गांवों से मुंशीजी का ये गांव भले ही देखने सुनने में समृद्ध हो लेकिन इस गांव में अब भी बहुत कुछ अधूरा है। 
 

लमही में कहानियों की तिलिस्मी दुनिया

munshi premchand village lamahi waiting for nayak
लमही - फोटो : अमर उजाला
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का गांव लमही महज एक गांव नहीं है, यहां कथा सम्राट की कहानियों का तिलिस्म भी है।  ईदगाह के हामिद का चिमटा, गोदान का होरी और नमक का दरोगा का नायक...। सब लमही की उस लाइब्रेरी में अपनी शिद्दत के साथ मौजूद हैं। उपन्यास सम्राट की अमर कहानियों के बीच उनके बचपन की झलक दिखाता एक गिल्ली डंडा भी। सच ये है लमही की पहचान प्रेमचंद हैं और उनकी कहानियों का मर्म यहां की आब-ओ-हवा में घुला है।

लमही गांव में मुंशी प्रेमचंद स्मारक स्थल पर प्रेमचंद स्मारक न्यास लमही की एक लाइब्रेरी है। मुंशीजी के उपन्यासों, कहानियों की यह लाइब्रेरी सिर्फ एक पुस्तकालय तक ही सीमित नहीं है। कोशिश है कि न केवल उनकी किताबों को पढ़ा जाए, बल्कि प्रेमचंद को समझा जाना जाए।

बचपन में मुंशी प्रेमचंद अक्सर दोस्तों के साथ गिल्ली डंडा खेला करते थे। ये उनका पसंदीदा खेल था।  इस लाइब्रेरी में मौजूद गिल्ली डंडा उनके बचपन के इसी पहलू को दिखाता है। इसी तरह यहां रखी पिचकारी भी उनके होली के त्योहार से जुड़े रहने का एहसास कराती है।

भला ईदगाह कहानी के हामिद के चिमटे को कौन भूल सकता है। हामिद ने खिलौनों के बजाय इसे अपनी दादी के लिए खरीदा था। मानवीय संवेदना, पारिवारिक मूल्यों के उसी भाव को दर्शाता है यहां रखा चिमटा।

यहां उपलब्ध किताबों की लंबी फेहरिस्त में वो ‘जमाना’ भी है, जिसे अंग्रेजों ने जला दिया और वो समर यात्रा भी इसे अंग्रेजों ने प्रतिबंधित कर दिया था। प्रेमचंद स्मारक न्यास लमही के अध्यक्ष सुरेश चंद्र दुबे का कहना है कि इस गांव में अब भी कफन की बुधिया, बूढ़ी काकी और निर्मला जैसे किरदार हैं लेकिन अब उनके दर्द को लिखने वाला कोई नहीं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed