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मुन्ना बजरंगीः ईंट भट्टे का मजदूर बना पूर्वांचल का आतंक, जानिए वो बातें जो आप नहीं जानते
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 10 Jul 2018 11:27 AM IST
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माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी का अंतिम संस्कार आज वाराणसी के मणिकर्णिका पर होगा। उसकी हत्या के बाद उसके गिरोह की कमान कौन संभालेगा, इसे लेकर चर्चाओं के बाजार गर्म हैं। इधर, लोगों के मन में यह ख्याल आ रहा है कि जरायम जगत में आने से पहले मुन्ना बजरंगी क्या करता था? तो हम आपको बताने जा रहे हैं मुन्ना बजरंगी की वो बातें जो अबतक सामने नहीं आया।
1967 में पैदा हुआ मुन्ना बजरंगी पांचवीं की पढ़ाई के बाद शुरूआती दिनों में एक ईंट भट्टे पर ट्रैक्टर चलाता था। बाद में वह कालीन बुनने लगा। 1982 में उस पर लूट और हत्या का केस दर्ज हुआ था। इसके बाद 1984 में रामपुर थाना क्षेत्र के रामपुर और गोपालापुर के बीच कालीन व्यवसायी को लूट की नीयत से गोली मार दी थी। कालीन व्यवसायी की मौत के बाद वह पुलिस की निगाह में आ गया तो वाराणसी के डिप्टी मेयर अनिल सिंह के शरण में चला गया।
यहां से उसके तार जौनपुर के विनोद सिंह नाटे से जुड़ गए। विनोद सिंह और माफिया गजराज सिंह कुे संरक्षण में मुन्ना ने जिला कारागार के सामने भाजपा नेता रामचंदर सिंह सहित तीन लोगों की हत्या कर सिपाही की कारबाइन लूटी और फरार हो गया। 1995 में वाराणसी के कैंट थाने में मुन्ना पर हत्या का मामला दर्ज हुआ।
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पढ़ेंः ...तो मौत मुन्ना बजरंगी को वाराणसी से खींच ले गई बागपत, जानिए क्या है मामला
इसके बाद 1996 में रामपुर में मारपीट, प्राणघातक हमला, हत्या, 1996 में मंडुवाडीह में हत्या, 1997 में रामपुर में प्राणघातक हमला, उसी साल लंका में हत्या, 1996 में समयपूर्व बादली में प्राणघातक हमला, 2002 में दशाश्वमेध में हत्या, उसी साल चेतगंज में हत्या, 2005 में गाजीपुर के भांवरपुर में हत्या, 2009 में दिल्ली में साजिश का केस, 2012 में कैंट में केस सहित 28 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस की मानें तो जमालपुर में 1996 में पहली बार जिले में एके-47 तड़तड़ाईं थीं, जब टीडी कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह एवं रामपुर ब्लाक प्रमुख कैलाश दूबे, अमीन बांकेलाल तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी।
इसके बाद मुन्ना ने वाराणसी में चार लोगों की हत्या कर दी। 2003-04 के दौरान वह मुख्तार अंसारी के संपर्क में आया। 29 नवंबर, 2005 को मुख्तार अंसारी के इशारे पर विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की गाजीपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
पढ़ेंः मुन्ना बजरंगी की मौतः जैसे की थीं हत्याएं, ठीक उसी तरह हुआ अंत
इस मामले में सीबीआई ने मुन्ना पर 12 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। मुन्ना ने जब अपराध की दुनिया में कदम रखा तो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रश्न यह है कि मुन्ना का साम्राज्य अपराध जगत में हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार से लेकर पूरे यूपी में था। हाल ही में धनबाद में कोल माफिया के पुत्र नीरज सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी के शूटरों ने घटना को अंजाम दिया।
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1967 में पैदा हुआ मुन्ना बजरंगी पांचवीं की पढ़ाई के बाद शुरूआती दिनों में एक ईंट भट्टे पर ट्रैक्टर चलाता था। बाद में वह कालीन बुनने लगा। 1982 में उस पर लूट और हत्या का केस दर्ज हुआ था। इसके बाद 1984 में रामपुर थाना क्षेत्र के रामपुर और गोपालापुर के बीच कालीन व्यवसायी को लूट की नीयत से गोली मार दी थी। कालीन व्यवसायी की मौत के बाद वह पुलिस की निगाह में आ गया तो वाराणसी के डिप्टी मेयर अनिल सिंह के शरण में चला गया।
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यहां से उसके तार जौनपुर के विनोद सिंह नाटे से जुड़ गए। विनोद सिंह और माफिया गजराज सिंह कुे संरक्षण में मुन्ना ने जिला कारागार के सामने भाजपा नेता रामचंदर सिंह सहित तीन लोगों की हत्या कर सिपाही की कारबाइन लूटी और फरार हो गया। 1995 में वाराणसी के कैंट थाने में मुन्ना पर हत्या का मामला दर्ज हुआ।
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इसके बाद 1996 में रामपुर में मारपीट, प्राणघातक हमला, हत्या, 1996 में मंडुवाडीह में हत्या, 1997 में रामपुर में प्राणघातक हमला, उसी साल लंका में हत्या, 1996 में समयपूर्व बादली में प्राणघातक हमला, 2002 में दशाश्वमेध में हत्या, उसी साल चेतगंज में हत्या, 2005 में गाजीपुर के भांवरपुर में हत्या, 2009 में दिल्ली में साजिश का केस, 2012 में कैंट में केस सहित 28 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस की मानें तो जमालपुर में 1996 में पहली बार जिले में एके-47 तड़तड़ाईं थीं, जब टीडी कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह एवं रामपुर ब्लाक प्रमुख कैलाश दूबे, अमीन बांकेलाल तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी।
इसके बाद मुन्ना ने वाराणसी में चार लोगों की हत्या कर दी। 2003-04 के दौरान वह मुख्तार अंसारी के संपर्क में आया। 29 नवंबर, 2005 को मुख्तार अंसारी के इशारे पर विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की गाजीपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
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इस मामले में सीबीआई ने मुन्ना पर 12 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। मुन्ना ने जब अपराध की दुनिया में कदम रखा तो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रश्न यह है कि मुन्ना का साम्राज्य अपराध जगत में हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार से लेकर पूरे यूपी में था। हाल ही में धनबाद में कोल माफिया के पुत्र नीरज सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी के शूटरों ने घटना को अंजाम दिया।
एके-47 से पूर्वांचल में पहली बार गोली तड़तड़ाई थी बजरंगी ने
Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
पूर्वांचल के लोगों को पहली बार एके-47 की से निकली गोलियों की तड़तड़ाहट मुन्ना बजरंगी ने सुनाई थी। पुलिस डोजियर के अनुसार मुन्ना बजरंगी और उसकी गैंग के बदमाश एके-47 / एके-56, नाइन एम व .30 बोर की पिस्टल से हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं।
इस गैंग के सदस्यों के पास मौजूदा समय में कौन से असलहे हैं इसकी सटीक जानकारी पुलिस और एसटीएफ सरीखी एक्सपर्ट एजेंसियों को भी नहीं है।
पूर्वांचल में जनवरी 1996 में जौनपुर जिले के रामपुर थाना क्षेत्र के जमालपुर बाजार में तत्कालीन ब्लाक प्रमुख कैलाश दुबे सहित तीन लोगों की हत्या बजरंगी और उसके गुर्गों ने एके-47 से अंधाधुंध गोलियां बरसा कर की थी।
पढ़ेंः सीधा-साधा प्रेम प्रकाश कैसे बना खूंखार मुन्ना बजरंगी, क्यों कांपते थे लोग?
बताया जाता है कि बजरंगी और उसके गुर्गे मारुती वैन से आए थे और फिल्मी अंदाज में सरेराह वारदात को अंजाम देकर दहशत फैलाते हुए भाग निकले थे। इसके बाद छह अप्रैल 1997 को लंका थाना अंतर्गत नरिया स्थित जैन लाज के सामने छात्रनेता सुनील राय और रामप्रकाश पांडेय सहित चार लोगों की हत्या कर दी थी।
फायरिंग के चश्मदीद गवाह पंडित राजेंद्र त्रिवेदी को 18 गोली लगी थी और बीएचयू अस्पताल में किसी तरह से उनकी जान बची थी। इसके बाद दिसंबर 2002 में सुनील राय के भाई अनिल राय सहित चार लोगों की हत्या एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग कर की गई थी।
इसके बाद 29 नवंबर 2005 को विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या गाजीपुर जिले के भांवरकोल क्षेत्र के बसनियाचट्टी में की गई थी। बताया है जाता है कि इस नृशंस हत्याकांड में एके-47 और नाइन एमएम की पिस्टल से डेढ़ सौ राउंड से ज्यादा फायरिंग मुन्ना और उसके गुर्गों ने की थी।
इस गैंग के सदस्यों के पास मौजूदा समय में कौन से असलहे हैं इसकी सटीक जानकारी पुलिस और एसटीएफ सरीखी एक्सपर्ट एजेंसियों को भी नहीं है।
पूर्वांचल में जनवरी 1996 में जौनपुर जिले के रामपुर थाना क्षेत्र के जमालपुर बाजार में तत्कालीन ब्लाक प्रमुख कैलाश दुबे सहित तीन लोगों की हत्या बजरंगी और उसके गुर्गों ने एके-47 से अंधाधुंध गोलियां बरसा कर की थी।
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बताया जाता है कि बजरंगी और उसके गुर्गे मारुती वैन से आए थे और फिल्मी अंदाज में सरेराह वारदात को अंजाम देकर दहशत फैलाते हुए भाग निकले थे। इसके बाद छह अप्रैल 1997 को लंका थाना अंतर्गत नरिया स्थित जैन लाज के सामने छात्रनेता सुनील राय और रामप्रकाश पांडेय सहित चार लोगों की हत्या कर दी थी।
फायरिंग के चश्मदीद गवाह पंडित राजेंद्र त्रिवेदी को 18 गोली लगी थी और बीएचयू अस्पताल में किसी तरह से उनकी जान बची थी। इसके बाद दिसंबर 2002 में सुनील राय के भाई अनिल राय सहित चार लोगों की हत्या एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग कर की गई थी।
इसके बाद 29 नवंबर 2005 को विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या गाजीपुर जिले के भांवरकोल क्षेत्र के बसनियाचट्टी में की गई थी। बताया है जाता है कि इस नृशंस हत्याकांड में एके-47 और नाइन एमएम की पिस्टल से डेढ़ सौ राउंड से ज्यादा फायरिंग मुन्ना और उसके गुर्गों ने की थी।
पहली पत्नी ने देवर से कर ली थी शादी
मुन्ना बजरंगी की शादी किशोरावस्था में हुई थी। 1984 में उसने कालीन व्यवसायी को गोली मारी और फरार हो गया। लंबे समय तक फरारी काटता रहा। भोपाल गैस कांड में मुन्ना की मौत की अफवाह के बाद पत्नी शकुंतला ने देवर राजेश के साथ शादी कर ली। एक बेटी को जन्म देने के कुछ दिन बाद शकुंतला की मौत हो गई।
तीन साल पहले आखिरी बार घर आया था मुन्ना
मुन्ना बजरंगी मां की तेरहवीं में शामिल होने के लिए तीन साल पहले पेरोल पर छूटकर आखिरी बार पांच दिन के लिए घर आया था। मुन्ना बजरंगी की मां लीलावती सिंह का निधन आठ मई, 2015 को हो गया था। उस वक्त बजरंगी सुल्तानपुर जिला कारागार में बंद था। मां की मौत के बाद शुद्धक और तेरहवीं के लिए उसने 20 हजार लोगों को निमंत्रण बांटा था। दस हजार लोग आए भी थे।
1985 में वाराणसी के कैंट थाने में दर्ज हुआ था पहला मुकदमा
वाराणसी जिले में बजरंगी के खिलाफ पहला मुकदमा कैंट थाने में 1985 में दर्ज हुआ था। 33 साल पुराना यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बाद 1996 में मंडुवाडीह, 1997 में लंका, 2002 में दशाश्वमेध व चेतगंज थाने में हत्या सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके अलावा 2012 में कैंट थाने में आपराधिक षड्यंत्र व रंगदारी और शिवपुर थाने में हत्या का प्रयास, बलवा, धमकी आदि आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था।
2013 में शिवपुर थाने में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य आरोपों मेें दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। 2013 में ही जैतपुरा थाने में सेवन सीएलए एक्ट, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य आरोपों में, कोतवाली थाने में मारपीट व धमकाने सहित अन्य आरोपों में, सारनाथ थाने में रंगदारी सहित अन्य आरोपों में, कोतवाली थाने में हत्या का प्रयास सहित अन्य आरोपों में और चेतगंज थाने में रंगदारी मांगने सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था।
तीन साल पहले आखिरी बार घर आया था मुन्ना
मुन्ना बजरंगी मां की तेरहवीं में शामिल होने के लिए तीन साल पहले पेरोल पर छूटकर आखिरी बार पांच दिन के लिए घर आया था। मुन्ना बजरंगी की मां लीलावती सिंह का निधन आठ मई, 2015 को हो गया था। उस वक्त बजरंगी सुल्तानपुर जिला कारागार में बंद था। मां की मौत के बाद शुद्धक और तेरहवीं के लिए उसने 20 हजार लोगों को निमंत्रण बांटा था। दस हजार लोग आए भी थे।
1985 में वाराणसी के कैंट थाने में दर्ज हुआ था पहला मुकदमा
वाराणसी जिले में बजरंगी के खिलाफ पहला मुकदमा कैंट थाने में 1985 में दर्ज हुआ था। 33 साल पुराना यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बाद 1996 में मंडुवाडीह, 1997 में लंका, 2002 में दशाश्वमेध व चेतगंज थाने में हत्या सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके अलावा 2012 में कैंट थाने में आपराधिक षड्यंत्र व रंगदारी और शिवपुर थाने में हत्या का प्रयास, बलवा, धमकी आदि आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था।
2013 में शिवपुर थाने में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य आरोपों मेें दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। 2013 में ही जैतपुरा थाने में सेवन सीएलए एक्ट, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य आरोपों में, कोतवाली थाने में मारपीट व धमकाने सहित अन्य आरोपों में, सारनाथ थाने में रंगदारी सहित अन्य आरोपों में, कोतवाली थाने में हत्या का प्रयास सहित अन्य आरोपों में और चेतगंज थाने में रंगदारी मांगने सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था।
रंगदारी की रकम रियल इस्टेट में निवेश करता था मुन्ना बजरंगी
Munna Bajrangi
- फोटो : अमर उजाला
मुन्ना बजरंगी और उसका गिरोह पूर्वांचल के साथ ही प्रदेश भर में डॉक्टरों और कारोबारियों से रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यात था। रंगदारी से हुई वसूली को रियल इस्टेट क्षेत्र में निवेश किया जाता था।बनारस सहित पूर्वांचल से लेकर लखनऊ तक पुलिस ने कई ऐसे बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलर को चिह्नित कर रखा है, जिनके काम में बजरंगी की काली कमाई लगी हुई है।
बीते साल बदमाशों की गोली का शिकार हुआ मोहम्मद तारिक ठेकेदारों से प्रोटेक्शन मनी वसूल कर उसे रियल इस्टेट क्षेत्र में निवेश करता था। जानकारों का कहना है कि बजरंगी की हत्या के बाद पूर्वांचल में बरसों से जारी रंगदारी वसूलने का धंधा मंदा पड़ेगा। दूसरी ओर पूर्वांचल में गैंगवार की आशंका बढ़ गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बजरंगी की हत्या का बदला लेने के लिए उसके कुछ खास गुर्गे आतुर होंगे। गिरोह की कमान संभालने के लिए गुर्गों के बीच भी गैंगवार हो सकती है। इसके मद्देनजर जोन के दस जिलों की पुलिस को एलर्ट कर दिया गया है।
रंगदारी मांगने के अलावा पीडब्ल्यूडी, डीएलडब्ल्यू और रेलवे से जुड़े ठेकेदारों से बजरंगी प्रोटेक्शन मनी वसूलता था। बजरंगी को कमीशन दिए बगैर पूर्वांचल में पीडब्ल्यूडी और रेलवे के ठेके से जुड़े काम कोई ठेकेदार लेने की हिम्मत नहीं कर सकता था।
पुलिस के अनुसार डीरेका के कर्मचारी नेता टीके मुकेश की हत्या में रासुका के तहत निरुद्ध डब्लू और बबलू राय ने भी बजरंगी के बल पर ही अपना आर्थिक साम्राज्य खड़ा किया था।
बीते साल बदमाशों की गोली का शिकार हुआ मोहम्मद तारिक ठेकेदारों से प्रोटेक्शन मनी वसूल कर उसे रियल इस्टेट क्षेत्र में निवेश करता था। जानकारों का कहना है कि बजरंगी की हत्या के बाद पूर्वांचल में बरसों से जारी रंगदारी वसूलने का धंधा मंदा पड़ेगा। दूसरी ओर पूर्वांचल में गैंगवार की आशंका बढ़ गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बजरंगी की हत्या का बदला लेने के लिए उसके कुछ खास गुर्गे आतुर होंगे। गिरोह की कमान संभालने के लिए गुर्गों के बीच भी गैंगवार हो सकती है। इसके मद्देनजर जोन के दस जिलों की पुलिस को एलर्ट कर दिया गया है।
रंगदारी मांगने के अलावा पीडब्ल्यूडी, डीएलडब्ल्यू और रेलवे से जुड़े ठेकेदारों से बजरंगी प्रोटेक्शन मनी वसूलता था। बजरंगी को कमीशन दिए बगैर पूर्वांचल में पीडब्ल्यूडी और रेलवे के ठेके से जुड़े काम कोई ठेकेदार लेने की हिम्मत नहीं कर सकता था।
पुलिस के अनुसार डीरेका के कर्मचारी नेता टीके मुकेश की हत्या में रासुका के तहत निरुद्ध डब्लू और बबलू राय ने भी बजरंगी के बल पर ही अपना आर्थिक साम्राज्य खड़ा किया था।
जरायम जगत में कारपोरेट कल्चर लेकर आया था बजरंगी
बनारस सहित पूर्वांचल के जरायम जगत में कारपोरेट कल्चर को अपनाने वाला पहला बदमाश मुन्ना बजरंगी था। उसके पास सर्वाधिक संख्या में शूटर थे।
बजरंगी और उसके गिरोह के बदमाशों को करीब से जानने वाले पुलिसकर्मियों के अनुसार वह अपने शूटरों को निजी कंपनियों की तरह हर महीना निर्धारित तनख्वाह देता था। इसके अतिरिक्त शूटरों को ब्रांडेड कंपनी के जूते और कपड़े मुहैया कराता था।
रंगदारी की लंबी रकम हाथ लगने पर वसूलने वाले शूटर को उसका एक निश्चित हिस्सा देता था। इस वजह से बजरंगी ने 1995 से 2008 के बीच शूटरों की अच्छी-खासी खेप खड़ी की थी।
इस बीच तेजी से एनकाउंटर हुए और कई शूटर मारे गए तब जाकर बजरंगी का गिरोह थोड़ा कमजोर पड़ा। 2009 में गिरफ्तार होने के बाद बजरंगी के पास पहले जैसे शार्प शूटर नहीं रह गए थे।
बजरंगी और उसके गिरोह के बदमाशों को करीब से जानने वाले पुलिसकर्मियों के अनुसार वह अपने शूटरों को निजी कंपनियों की तरह हर महीना निर्धारित तनख्वाह देता था। इसके अतिरिक्त शूटरों को ब्रांडेड कंपनी के जूते और कपड़े मुहैया कराता था।
रंगदारी की लंबी रकम हाथ लगने पर वसूलने वाले शूटर को उसका एक निश्चित हिस्सा देता था। इस वजह से बजरंगी ने 1995 से 2008 के बीच शूटरों की अच्छी-खासी खेप खड़ी की थी।
इस बीच तेजी से एनकाउंटर हुए और कई शूटर मारे गए तब जाकर बजरंगी का गिरोह थोड़ा कमजोर पड़ा। 2009 में गिरफ्तार होने के बाद बजरंगी के पास पहले जैसे शार्प शूटर नहीं रह गए थे।