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सीधा-साधा प्रेम प्रकाश कैसे बना खूंखार मुन्ना बजरंगी, क्यों कांपते थे लोग?
पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 09 Jul 2018 10:45 AM IST
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मुन्ना बजरंगी
- फोटो : SELF
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पूर्वांचल में खौफ और गैंगवार का सबसे बड़ा नाम रहा मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मार कर हत्या कर दी गई। इस वारदात के बाद जेल प्रशासन से लेकर लखनऊ तक अधिकारियों में हड़कंप मचा है। मुन्ना बजरंगी भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में जेल में बंद था। उस पर दर्जनों मुकदमे हत्या, लूट के दर्ज थे। आगे की स्लाइड्स में जानिए मुन्ना बजरंगी के बारे में..
Munna Bajrangi
मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। उसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे। मगर, प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया। उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी। उम्र बढने के साथ ही उसे कई ऐसे शौक लग गए जो उसे जुर्म की दुनिया में लेते चले गए।
मुन्ना बजरंगी
- फोटो : अमर उजाला
मुन्ना को हथियार रखने का बड़ा शौक था। वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा। वह जरायम के दलदल में धंसता चला गया।
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Munna Bajrangi
वह अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था। इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का साथ मिल गया। मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था। 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया।
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Munna Bajrangi
पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। यह गैंग मऊ से संचालित हो रहा था, लेकिन इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था।मुन्ना सीधे पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था। वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था।