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...तो पूर्वांचल में बहेगी पहली बार की बयार
प्रदीप मिश्र,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sat, 04 Mar 2017 01:08 PM IST
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017
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मतदाताओं की मेहरबानी हो गई तो 17वीं विधानसभा में पूर्वांचल से नए चेहरे ज्यादा होंगे। भाजपा और उसके घटक दलों ने तो पूर्वी उत्तर प्रदेश को फतह करने के लिए 43 उम्मीदवारों को पहली बार मैदान में उतारा है।
बसपा भी इस मामले में पीछे नहीं रही है और पार्टी ने 37 नए प्रत्याशियों को राजनीति की शुरुआत कराने की ठानी है। 17वीं विधानसभा के चुनाव के लिए छठे चरण में आजमगढ़ और गोरखपुर मंडल की 49 सीटों पर चार मार्च को मतदान होना है।
वहीं सातवें चरण में वाराणसी और मिर्जापुर मंडल की 40 सीटों पर आठ मार्च को वोट डाले जाएंगे।
2012 के चुनाव में पूर्वांचल में हर सीट पर सपा का विजय रथ चला था। इस बार नतीजे अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा ने अपना दल (सोनेलाल) से 12 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से आठ सीटों पर समझौता किया है।
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भाजपा ने खुद भी कई नौजवान उम्मीदवार खड़े किए हैं। वहीं पूरे इलाके में सपा ने कांग्रेस को केवल तीन सीटें दी हैं। 2012 में दूसरे स्थान पर रही बसपा सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है लेकिन उसने कई प्रत्याशी बदल दिए हैं।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों से लेकर बसपा ने नए चेहरों पर भरोसा इसलिए जताया है, क्योंकि मतदाता उनके द्वारा किए जाने वादों पर एतबार आसानी से कर लेगा। उनका मानना यह भी है कि सपा ऐसी हिम्मत नहीं जुटा सकी।
भाजपानीत गठबंधन ने आजमगढ़ और बलिया जैसे सपा के प्रभाव वाले जिलों में छह-छह सीटों पर नए प्रत्याशी दिए हैं।
सपा-कांग्रेस गठबंधन और भाजपा ने गाजीपुर और गोरखपुर में ही सबसे अधिक चार-चार फर्स्ट टाइमर के जरिए अपना आंकड़ा बढ़ाने की उम्मीद लगाई है।
छह बार के विधायक और प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री रह चुके सपा के ओमप्रकाश सिंह की गाजीपुर की जमानिया सीट पर भाजपा की सुनीता सिंह और बसपा के अतुल राय ने घेराबंदी कर रखी है। संगीता और अतुल दोनों पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।
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बसपा भी इस मामले में पीछे नहीं रही है और पार्टी ने 37 नए प्रत्याशियों को राजनीति की शुरुआत कराने की ठानी है। 17वीं विधानसभा के चुनाव के लिए छठे चरण में आजमगढ़ और गोरखपुर मंडल की 49 सीटों पर चार मार्च को मतदान होना है।
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वहीं सातवें चरण में वाराणसी और मिर्जापुर मंडल की 40 सीटों पर आठ मार्च को वोट डाले जाएंगे।
2012 के चुनाव में पूर्वांचल में हर सीट पर सपा का विजय रथ चला था। इस बार नतीजे अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा ने अपना दल (सोनेलाल) से 12 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से आठ सीटों पर समझौता किया है।
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भाजपा ने खुद भी कई नौजवान उम्मीदवार खड़े किए हैं। वहीं पूरे इलाके में सपा ने कांग्रेस को केवल तीन सीटें दी हैं। 2012 में दूसरे स्थान पर रही बसपा सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है लेकिन उसने कई प्रत्याशी बदल दिए हैं।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों से लेकर बसपा ने नए चेहरों पर भरोसा इसलिए जताया है, क्योंकि मतदाता उनके द्वारा किए जाने वादों पर एतबार आसानी से कर लेगा। उनका मानना यह भी है कि सपा ऐसी हिम्मत नहीं जुटा सकी।
भाजपानीत गठबंधन ने आजमगढ़ और बलिया जैसे सपा के प्रभाव वाले जिलों में छह-छह सीटों पर नए प्रत्याशी दिए हैं।
सपा-कांग्रेस गठबंधन और भाजपा ने गाजीपुर और गोरखपुर में ही सबसे अधिक चार-चार फर्स्ट टाइमर के जरिए अपना आंकड़ा बढ़ाने की उम्मीद लगाई है।
छह बार के विधायक और प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री रह चुके सपा के ओमप्रकाश सिंह की गाजीपुर की जमानिया सीट पर भाजपा की सुनीता सिंह और बसपा के अतुल राय ने घेराबंदी कर रखी है। संगीता और अतुल दोनों पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।
बलिया, मऊ और जैनपुर में रोचक मुकाबला
यूपी इलेक्शन 2017
बलिया सदर सीट पर पूर्व मंत्री और बसपा उम्मीदवार नारद राय के सामने सपा ने लक्ष्मण दास गुप्ता और भाजपा ने आनंद स्वरूप शुक्ला को प्रत्याशी बनाया है। जौनपुर-देवरिया में बसपा ने पांच-पांच चेहरे नए उतारे हैं।
पार्टी ने मऊ जिले की घोसी सीट से मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को भी पहली बार टिकट दिया है।
उधर, कुशीनगर सदर सीट पर पांच बार के विधायक और दो बार के मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी के सामने पहली बार चुनाव लड़ रहे भाजपा के रजनीकांत मणि त्रिपाठी मजबूती से खड़े हैं।
इसी जिले में पडरौना सीट पर पूर्व मंत्री और भाजपा उम्मीदवार स्वामी प्रसाद मौर्य को कांग्रेस-सपा गठबंधन की उम्मीदवार शिव कुमारी देवी ने मुकाबले में फंसा लिया है।
देवरिया की पथरदेवा सीट पर पूर्व मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को बसपा के नीरज वर्मा से टक्कर मिल रही है।
गोरखपुर जिले की पिपराइच सीट पर तीन प्रमुख दलों बीजेपी से महेंद्र पाल सिंह, बीएसपी से आफताब आलम और सपा-कांग्रेस के उम्मीदवार अमरेंद्र निषाद तो नए हैं ही, मर्डर केस में फंसे पूर्व मंत्री जितेंद्र जायसवाल की पत्नी अनीता भी पहली बार निर्दल चुनाव लड़ रही हैं।
पार्टी ने मऊ जिले की घोसी सीट से मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को भी पहली बार टिकट दिया है।
उधर, कुशीनगर सदर सीट पर पांच बार के विधायक और दो बार के मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी के सामने पहली बार चुनाव लड़ रहे भाजपा के रजनीकांत मणि त्रिपाठी मजबूती से खड़े हैं।
इसी जिले में पडरौना सीट पर पूर्व मंत्री और भाजपा उम्मीदवार स्वामी प्रसाद मौर्य को कांग्रेस-सपा गठबंधन की उम्मीदवार शिव कुमारी देवी ने मुकाबले में फंसा लिया है।
देवरिया की पथरदेवा सीट पर पूर्व मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को बसपा के नीरज वर्मा से टक्कर मिल रही है।
गोरखपुर जिले की पिपराइच सीट पर तीन प्रमुख दलों बीजेपी से महेंद्र पाल सिंह, बीएसपी से आफताब आलम और सपा-कांग्रेस के उम्मीदवार अमरेंद्र निषाद तो नए हैं ही, मर्डर केस में फंसे पूर्व मंत्री जितेंद्र जायसवाल की पत्नी अनीता भी पहली बार निर्दल चुनाव लड़ रही हैं।