फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Millions of jobs have left the city, improve the repair Aiaitianshr Aiaitians

लाखों की नौकरी छोड़ शहर को सुधारने आए आईआईटियंस

Sun, 07 Feb 2016 02:07 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 07 Feb 2016 02:07 AM IST
विज्ञापन
Millions of jobs have left the city, improve the repair Aiaitianshr Aiaitians
आईआईटी बीएचयू के बहुत से ऐसे छात्र हैं जो विदेशों में अपनी लाखों की नौकरी छोड़ न सिर्फ  स्वदेश लौटे हैं बल्कि अपने शहर को सुधारने के लिए आगे आ रहे हैं। ये युवा स्मार्ट सिटी की परिकल्पना को साकार करने में लगे हुए हैं। जल संरक्षण से लेकर ऊर्जा संरक्षण तक के लिए उन्होंने नई तकनीक ईजाद की है। अब वे अपनी तकनीक के आधार पर शहर की व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं।
विज्ञापन


बीएचयू से आईआईटी की डिग्री लेने वाले गौरव केडिया जर्मनी की नौकरी छोड़कर भारत लौटे हैं और अपने तकनीकी ज्ञान का उपयोग कर प्राकृतिक ऊर्जा पर काम कर रहे हैं। इसी तरह आईआईटी बीएचयू से पढ़ाई करने के बाद किसी कंपनी में लाखों के पैकेज पर नौकरी करने के बजाय नवीन और रोहित ने शहर में जल संरक्षण पर काम करना शुरू किया है और उन्हें सफलता भी मिली है।
विज्ञापन


2004 बैच के आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र रहे गौरव केडिया को कैंपस प्लेसमेंट के तहत जर्मनी में नौकरी मिली थी। वहां पर उन्होंने कुछ साल तक काम भी किया। बाद में वे भारत लौट आए और ऊर्जा व पर्यावरण के क्षेत्र में काम किया। मानव जनित ऊर्जा उनका केंद्र रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन



परंपरागत स्रोतों से ऊर्जा पर काम करते हुए ही गौरव ने अहमदाबाद में गोबर बैंक की शुरुआत की और गोबर से गैस बनाकर उन्होंने घरों में सप्लाई देना शुरू किया। इसी तरह उन्होंने कूड़े का निस्तारण करने के लिए बायो बॉक्स का ईजाद किया है। एक हजार घर के कूड़े का इस बायो बॉक्स में न सिर्फ  निस्तारण होगा बल्कि इससे बायो गैस भी बनाई जा सकती है। दिल्ली में इसका प्रयोग हो रहा है और अब इसे बनारस शहर में लगाए जाने के लिए उन्होंने आईआईटी बीएचयू के माध्यम से नगर निगम को प्रस्तावित किया है।


उधर, आईआईटी बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग के छात्र नवीन कुमार व रोहित मित्तल ने 2014 में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। कैंपस प्लेसमेंट भी हुआ लेकिन उन्होंने अपना खुद का स्टार्ट अप शुरू किया। पहले दिल्ली में काम किया लेकिन बाद में बनारस के लिए उन्होंने काम करने की ठानी और वापस यहां लौट आए। बनारस में पानी की समस्या को देखते हुए उन्होंने पहले पर इस पर काम करने की सोची।


लेकिन जब उन्होंने देखा कि यहां पानी की समस्या तो है ही दूषित पेयजल की भी है और लोग वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये वाटर प्यूरीफायर पानी के 30 प्रतिशत को पीने योग्य बनाते हैं, बाकी 70 प्रतिशत पानी बेकार हो जाता है। इसलिए इन दो छात्रों ने वाटर प्यूरीफायर की ऐसी तकनीक बनाई जिससे 70 प्रतिशत पानी को पीने योग्य बनाया जा सकता है। इनका कहना है कि शहर को सुधारने के लिए पहले इन छोटी छोटी चीजों पर हमें ध्यान देना होगा। प्राकृतिक स्रोतों का हम जितना दोहन करें, उतना ही उसे लौटाएं भी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed