असलहों का अच्छा जानकार था मेराज, मुन्ना बजरंगी को मुहैया कराई थी एके-47, अनिल सिंह हत्याकांड में भी नाम जुड़ा
मुख्तार अंसारी के करीबी मेराज का नाम आपराधिक मामलों में शामिल था। इसकी शुक्रवार को चित्रकूट जेल में गैंगवार में हत्या कर दी गई थी। साथ में मुकीम काला की भी हत्या हुई थी। पूर्वांचल के माफिया मुन्ना बजरंगी से भी अच्छे संबंध थे। दोनों ने साथ में कई वारदातों को अंजाम दिया था।
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पूर्वांचल के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की सरपरस्ती में भी मेराज ने कई कारनामे किए थे। पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे कारनामें दर्ज भी हैं। पूर्वांचल में पहली बार एके-47 मुन्ना बजरंगी को मुहैया कराने में मेराज का ही नाम सामने आया था। 19 दिसंबर 2002 को वाराणसी के मलदहिया चौराहे पर एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग कर भाजपा नेता अनिल सिंह समेत चार की हत्या कर दी गई थी।
अनिल सिंह हत्याकांड में पहली बार मेराज का नाम मुन्ना बजरंगी के साथ जुड़ा था। सिगरा थाने में दर्ज मेराज के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास मुकदमे के दौरान विवेचना में यह भी सामने आया था कि मुन्ना बजरंगी को असलहा मेराज ने ही मुहैया कराया था।
असलहों का शौकीन मेराज के ऊपर दर्ज डेढ़ दर्जन मुकदमों में अधिकतर मुकदमें अवैध असलहा रखने के ही हैं। असलहों के बारे में मेराज को बहुत अच्छी जानकारी थी। मेराज को करीब से जानने वाले बताते थे कि मेराज कहीं भी जाता था तो अपनी लाइसेंसी पिस्टल लेकर चलता था। पिस्टल की चाहत में ही दूसरे पते पर लाइसेंस नवीनीकरण कराया और यही से मेराज के ऊपर कार्रवाई की तलवार लटकी तो फिर लटकती ही चली गई।
जरायम जगत से जुड़े लोगों को शरण देना, वसूली और मछली कारोबार से मेराज ने ठीक-ठाक साम्राज्य स्थापित कर लिया था। बसपा शासनकाल में मेराज की नजदीकियां कई मंत्रियों से भी रहीं। उस दौरान मेराज ने काफी धन अर्जित किया था। वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, मऊ सहित अन्य जनपदों में मेराज की दखल रहती थी।