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दवा दुकान बंदी का दिखा मिला-जुला असर, बनारस में पांच करोड़ का कारोबार प्रभावित
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 31 May 2017 10:45 AM IST
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सप्तसागर थोक दवा मंडी में बंद तो वहीं एस्मा के डर से खुली रहीं कई जगहों पर दुकानें
- फोटो : अमर उजाला
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ऑनलाइन फार्मेसी और ई पोर्टल आदि का विरोध करते हुए जिले के दवा कारोबारियों ने मंगलवार को अपनी दुकानें बंद रखीं। हालांकि शहर से गांवों तक आल इंडिया आर्गनाइजेशन आफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के बंदी के आह्वान का मिलाजुला असर नजर आया।
सप्तसागर थोक दवा मंडी के साथ ही बाबतपुर, रामनगर, राजातालाब, लोहता आदि ग्रामीण इलाकों में फुटकर दुकानें बंद रहसे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, आवश्यक सेवा बहाली अधिनियम (एस्मा) के डर से लंका-कबीरचौरा समेत कई स्थानों पर दुकानें खुली रहीं।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के महामंत्री संदीप चतुर्वेदी का दावा है कि बंदी के चलते जिले में करीब पांच करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। आर्गनाइजेशन के आह्वान पर बंदी का समर्थन करते हुए तमाम दवा व्यापारियों ने बुलानाला पर धरना दिया।
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यहां अध्यक्ष अंजनी गुप्त, महामंत्री संदीप चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार की ओर से बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों के दबाव में दवाओं की ऑनलाइन बिक्री, ई पोर्टल जैसे निर्णय लिए गए हैं। इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए।
बताया कि सरकार के इस फैसले से देश भर में करीब साढ़े आठ लाख थोक और करीब 50 लाख फुटकर कारोबारी प्रभावित होंगे। उनके लिए परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। बंदी को सफल बताते हुए दावा किया कि 5182 दवा की दुकानों में महज 118 खुली रहीं।
इन्हें भी एस्मा का भय दिखाकर दुकानें खोलने के लिए बाध्य किया गया।
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सप्तसागर थोक दवा मंडी के साथ ही बाबतपुर, रामनगर, राजातालाब, लोहता आदि ग्रामीण इलाकों में फुटकर दुकानें बंद रहसे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, आवश्यक सेवा बहाली अधिनियम (एस्मा) के डर से लंका-कबीरचौरा समेत कई स्थानों पर दुकानें खुली रहीं।
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केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के महामंत्री संदीप चतुर्वेदी का दावा है कि बंदी के चलते जिले में करीब पांच करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। आर्गनाइजेशन के आह्वान पर बंदी का समर्थन करते हुए तमाम दवा व्यापारियों ने बुलानाला पर धरना दिया।
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यहां अध्यक्ष अंजनी गुप्त, महामंत्री संदीप चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार की ओर से बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों के दबाव में दवाओं की ऑनलाइन बिक्री, ई पोर्टल जैसे निर्णय लिए गए हैं। इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए।
बताया कि सरकार के इस फैसले से देश भर में करीब साढ़े आठ लाख थोक और करीब 50 लाख फुटकर कारोबारी प्रभावित होंगे। उनके लिए परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। बंदी को सफल बताते हुए दावा किया कि 5182 दवा की दुकानों में महज 118 खुली रहीं।
इन्हें भी एस्मा का भय दिखाकर दुकानें खोलने के लिए बाध्य किया गया।