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साड़ी का बनाया फंदा और दे दी जान
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
Updated Mon, 16 Feb 2015 02:03 AM IST
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भेलूपुर थाना क्षेत्र के शिवाला निवासी दिलीप यादव ने आर्थिक तंगी के कारण फांसी लगा ली। रविवार की सुबह उनका शव साड़ी के फंदे से लटकता मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को उतारकर कब्जे में ले लिया।
दिलीप की जेब से एक सुसाइड नोट बरामद किया गया जिसमें उसने मौत के लिए खुद को जिम्मेदार बताया है। शिवाला में ही दिलीप की मोबाइल रीचार्ज की दूकान थी। पुलिस का कहना है वह पिछले कुछ समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। धंधे में उसे काफी नुकसान हुआ था।
मूल रूप से लंका के सीर निवासी दिलीप यादव (35) शिवाला स्थित चार मंजिले मकान में तीसरे तल पर किराए पर रहते थे। परिवार में पत्नी ज्योति और एक साल की बेटी सौम्या है। पत्नी पांच दिनों पूर्व बेटी को लेकर सारनाथ क्षेत्र स्थित मायके चली गई थी।
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शनिवार की रात करीब नौ बजे दिलीप दूकान बंद कर घर पहुंचे। रात में ही किसी समय कमरे में ताला बंद कर वह छत पर चले गए। टेबल पर खड़े होकर साड़ी का फंदा ग्रिल में फंसा दिया और उससे लटककर जान दे दी। रविवार की सुबह पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति छत पर पहुंचे तो उन्होंने दिलीप को लटकते देखा।
सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। परिवार के लोग भी मौके पर पहुंचे। इंस्पेक्टर भेलूपुर एके ओझा का कहना है कि दिलीप पिछले कुछ दिनों से वह आर्थिक रूप से परेशान थे।
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दिलीप की जेब से एक सुसाइड नोट बरामद किया गया जिसमें उसने मौत के लिए खुद को जिम्मेदार बताया है। शिवाला में ही दिलीप की मोबाइल रीचार्ज की दूकान थी। पुलिस का कहना है वह पिछले कुछ समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। धंधे में उसे काफी नुकसान हुआ था।
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मूल रूप से लंका के सीर निवासी दिलीप यादव (35) शिवाला स्थित चार मंजिले मकान में तीसरे तल पर किराए पर रहते थे। परिवार में पत्नी ज्योति और एक साल की बेटी सौम्या है। पत्नी पांच दिनों पूर्व बेटी को लेकर सारनाथ क्षेत्र स्थित मायके चली गई थी।
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शनिवार की रात करीब नौ बजे दिलीप दूकान बंद कर घर पहुंचे। रात में ही किसी समय कमरे में ताला बंद कर वह छत पर चले गए। टेबल पर खड़े होकर साड़ी का फंदा ग्रिल में फंसा दिया और उससे लटककर जान दे दी। रविवार की सुबह पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति छत पर पहुंचे तो उन्होंने दिलीप को लटकते देखा।
सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। परिवार के लोग भी मौके पर पहुंचे। इंस्पेक्टर भेलूपुर एके ओझा का कहना है कि दिलीप पिछले कुछ दिनों से वह आर्थिक रूप से परेशान थे।