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महाकाल मंदिर अग्निकांड से सबक: अग्निशमन विभाग ने काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन व DCP सुरक्षा को दिया ये सुझाव
Wed, 10 Apr 2024 07:27 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Wed, 10 Apr 2024 07:27 PM IST
सार
उज्जैन महाकाल में आग लगने की घटना के बाद अग्निशमन विभाग की ओर से विश्वनाथ धाम का निरीक्षण किया गया। इसके बाद विभाग की ओर से मंदिर प्रशासन और डीसीपी सुरक्षा को धाम में स्मोक डिटेक्टर के मास्टर कंट्रोल रूम की जरूरत का सुक्षाव दिया गया।
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काशी विश्वनाथ धाम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्री काशी विश्वनाथ धाम में स्मोक डिटेक्टर के मास्टर कंट्रोल रूम की जरूरत है। ताकि, दमकल कर्मी एक साथ सभी बिल्डिंग की निगरानी कर सकें। यह सुझाव धाम के निरीक्षण के बाद अग्निशमन विभाग की ओर से मंदिर प्रशासन और डीसीपी सुरक्षा को दिया गया है। कहा गया कि अग्निशमन उपकरणों की देखरेख और मरम्मत के लिए किसी प्रतिष्ठित एजेंसी से मंदिर प्रशासन को वार्षिक करार करना चाहिए।
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उज्जैन के महाकाल मंदिर में गत दिनों आग लग गई थी। इसके मद्देनजर अग्निशमन द्वितीय अधिकारी ऋषभ दूबे ने लीडिंग फायरमैन और दमकल कर्मियों के साथ विश्वनाथ धाम परिसर का निरीक्षण किया। साथ ही आग से बचाव और सुरक्षा की तैयारियों की रिपोर्ट तैयार की। मुख्य अग्निशमन अधिकारी आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि मंदिर प्रशासन को सुझाव दिया गया है कि जो भी इमारतें बहुमंजिला हैं, वहां जगह के अनुसार
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प्रवेश और निकास के लिए अलग अलग सीढ़ी बनाई जाए। कुछ फायर हाइड्रेट सिस्टम में कपलिंग नहीं लगी थी। कुछ एक जगह ब्रांच है तो हौज नहीं। जहां हौज है, वहां ब्रांच नहीं। फिलहाल, धाम में तीन फायर पंप, नीलकंठ भवन के भूतल पर डेढ़ लाख लीटर का फायर वाटर टैंक, 96 फायर हाइड्रेट, 144 फायर होज रील, 150 होज बाक्स, 600 स्मोक डिटेक्टर, कुछ इमारतों में फायर स्प्रिंकलर सिस्टम और एबसटिग्विशर है। 500 फायर
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स्थायी भवन की जरूरत, आरती के समय 1 कर्मी रहे अग्निशमन विभाग ने मंदिर प्रश्वसन को सुझाव दिया है कि गर्भ गृह में होने वाली सभी आरती के दौरान एक दमकल कर्मी जरूर रहे। अग्निशमन विभाग को फिलहाल विश्वनाथ धाम में पिनाक भवन में अस्थायी रूप से दो कमरे मिले हुए हैं। अग्निशमन विभाग को स्थायी और बड़ी जगह चाहिए। ताकि, उपकरणों के रखरखाव के साथ ही कंट्रोल रूम, कायर्यालय और दमकल कर्मियों के अन्य कार्य सुगमता के साथ हो सकें।
700 लोगों का रेस्क्यू किया गया
विश्वनाथ धाम में दमकल कर्मी आग को सुरक्षा से ज्यादा काम रेस्क्यू का करते हैं। पिछले वर्ष एक जनवरी से 31 दिसंबर के बीच धाम में 700 लोग बेहोश हुए थे। उन्हें उठाकर दमकल कर्मियों ने स्ट्रेचर से ले जाकर मेडिकल टीम को सौंपा था।