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शुरू से ही शक की सुई थी काजिम के परिवार पर
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 11 Jan 2017 02:22 AM IST
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बिस्मिल्लाह खां
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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाइयां चोरी होने के बाद से ही पुलिस की शक की सुई उनके बेटे काजिम हुसैन के परिवार पर थी। चौक पुलिस और क्राइम ब्रांच ने कई बार काजिम से पूछताछ की थी। परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब एसटीएफ ने काजिम और उसके परिवार के सदस्यों के मोेबाइल नंबर की टोह सर्विलांस से लेने के साथ ही उनकी रोजाना की गतिविधियोें पर निगाह रखी जाने लगी।
उस्ताद के पांच बेटे और चार बेटियां थीं। सबसे छोटे बेटे काजिम हुसैन ने चौक पुलिस को सूचना दी थी कि पांच शहनाई, चांदी की एक तश्तरी और सोने के दो कंगन एक बड़े बक्से में पांच रजाई के नीचे रखे थे। ये सब गायब हो गए हैं। इस पर काजिम के बेटे नजरे हसन का कहना था कि उसने जब चोरी की तो रजाइयों के नीचे सिर्फ चार ही शहनाई थी। सोने के कंगन और तश्तरी बक्से में नहीं थी। अब पुलिस इस सवाल का जवाब खोजने में जुटी है कि दोनों में सच कौन बोल रहा है।
उधर, नजरे हसन (22) ने बताया कि वह बारहवीं पास है। किसी नशे का लती नहीं है लेकिन दोस्तों के साथ पूरे दिन घूमता-फिरता है। कोई काम-धंधा न करने और मौज-मस्ती के चक्कर में उधारी बढ़ती ही जा रही थी। इसलिए उसने सोचा कि चांदी की शहनाइयां चुराकर उधारी भी चुकता हो जाएगी और कुछ रुपये बच भी जाएंगे। वह इसकी फिराक में लगा था। 30 नवंबर को जब उसके पिता काजिम, मां रिजवाना और अन्य भाई हड़हा स्थित पुश्तैनी मकान गए तो उसने अच्छा मौका देखकर शहनाइयां चुरा लीं। बताया कि शहनाई चोरी होने का मामला जब शांत हो गया तो वह असोम जाने वाला था लेकिन ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण उसने निर्णय बदल लिया।
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उस्ताद के पांच बेटे और चार बेटियां थीं। सबसे छोटे बेटे काजिम हुसैन ने चौक पुलिस को सूचना दी थी कि पांच शहनाई, चांदी की एक तश्तरी और सोने के दो कंगन एक बड़े बक्से में पांच रजाई के नीचे रखे थे। ये सब गायब हो गए हैं। इस पर काजिम के बेटे नजरे हसन का कहना था कि उसने जब चोरी की तो रजाइयों के नीचे सिर्फ चार ही शहनाई थी। सोने के कंगन और तश्तरी बक्से में नहीं थी। अब पुलिस इस सवाल का जवाब खोजने में जुटी है कि दोनों में सच कौन बोल रहा है।
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उधर, नजरे हसन (22) ने बताया कि वह बारहवीं पास है। किसी नशे का लती नहीं है लेकिन दोस्तों के साथ पूरे दिन घूमता-फिरता है। कोई काम-धंधा न करने और मौज-मस्ती के चक्कर में उधारी बढ़ती ही जा रही थी। इसलिए उसने सोचा कि चांदी की शहनाइयां चुराकर उधारी भी चुकता हो जाएगी और कुछ रुपये बच भी जाएंगे। वह इसकी फिराक में लगा था। 30 नवंबर को जब उसके पिता काजिम, मां रिजवाना और अन्य भाई हड़हा स्थित पुश्तैनी मकान गए तो उसने अच्छा मौका देखकर शहनाइयां चुरा लीं। बताया कि शहनाई चोरी होने का मामला जब शांत हो गया तो वह असोम जाने वाला था लेकिन ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण उसने निर्णय बदल लिया।
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