काशी विद्वत परिषद ने किया आग्रह, कहा-जो बाबा विश्वनाथ की मर्जी वही होगा
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बाबा विश्वनाथ के तिलकोत्सव को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। काशी विद्वत परिषद ने इस मामले में मंदिर प्रशासन से आग्रह किया है कि वह ऐसी व्यवस्था करें जिससे प्राचीन परंपरा खंडित न हो। वहीं मंदिर के पूर्व महंत का कहना है कि अब तो जो बाबा विश्वनाथ की मर्जी होगी वही होगा। हालांकि इस मामले में काशी की जनता चाहती है कि महंत परिवार जहां रहे वहीं से बाबा के तिलकोत्सव और गौना की रस्म का निर्वहन किया जाए।
काशी विश्वनाथ धाम के लिए ध्वस्तीकरण के दौरान महंत आवास का हिस्सा ढहने से बाबा विश्वनाथ का सिंहासन क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं मलबे में दबकर रंगभरी एकादशी का मंच भी ध्वस्त हो गया। बसंत पंचमी पर बाबा के तिलकोत्सव की तैयारियां भी अब लटक गई हैं। मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि बाबा का तिलकोत्सव तो बाबा की मर्जी से पिछले 350 सालों से होता आ रहा है। आगे भी उनकी ही मर्जी से होगा। फिलहाल अभी तो हम लोग बेघर हो चुके हैं।
काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ.. रामनारायण द्विवेदी का कहना है कि मंदिर की परंपराएं किसी भी सूरत में टूटनी नहीं चाहिए। हमने मंदिर प्रशासन से आग्रह किया है कि बाबा के तिलकोत्सव और रंगभरी एकादशी के लिए श्री काशी विश्वनाथ सनातन धर्म इंटर कालेज में इंतजाम किया जा सकता है। यह भी मंदिर की ही प्रापर्टी है।
इसके अलावा भविष्य में मंदिर प्रशासन ऐसे कक्ष की व्यवस्था कराए जहां से महंत परिवार की उपस्थिति में बाबा का उत्सव संपन्न हो सके। मंदिर के सामने कैलाश महादेव मंदिर से भी इंतजाम किया जा सकता है। वहीं मंदिर प्रशासन का कहना है कि वह परिसर में जगह देने को तैयार है। हालांकि अभी इस पर विचार विमर्श के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
हटाया जा रहा मलबा
वाराणसी। महंत के आवास के क्षतिग्रस्त हिस्से को एनडीआरएफ टीम की मौजूदगी में शुक्रवार को गिराया गया। मलबे में दबे सिंहासन को कोई क्षति ना पहुंचे इसलिए प्रशिक्षित मजदूरों द्वारा काम कराया जा रहा है। शुक्रवार को सुबह से ही एनडीआरएफ और मजदूरों को लगाकर मकान से जरूरी सामानों को निकलवाने का सिलसिला जारी रहा। मकान से सभी सामान निकलने के बाद मकान को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
गेस्ट हाउस में है महंत परिवार
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी का परिवार टेढ़ी नीम स्थित गेस्ट हाउस में है। पूर्व महंत का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण अभी उन लोगों ने कहीं मकान की व्यवस्था नहीं की है।
महंत परिवार से नहीं होगी रंगभरी एकादशी
मंदिर के पूर्व मंहत डॉ. कुलपति तिवारी का कहना है कि मैंने 30 जनवरी को बसंत पंचमी को बाबा के तिलकोत्सव की तैयारी की थी। कार्ड छप चुके थे, लेकिन मकान गिरा और सारा सामान उसमें दब गया। रंगभरी एकादशी पर मान्यता है कि माता पार्वती के मायके यानी महंत आवास से बाबा भोलेनाथ अपनी अर्धांगिनी को विदा कर उनकी ससुराल यानी अपने घर लेकर जाते हैं और भक्त उन पर पहला गुलाल चढ़ाकर होली की शुरुआत करते हैं, लेकिन इस बार यह परंपरा महंत आवास से नहीं होगी। क्योंकि यहां पर रखी रजत प्रतिमा मंदिर के गेस्ट हाउस में पहुंचाई जा चुकी हैं और बाबा की रजत पालकी गिरे हुए मलबे में दबी हुई है।