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बीएचयू अस्पतालः जूनियर डॉक्टरों का फिर हड़ताल, चिकित्सा व्यवस्था चरमरायी
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Tue, 16 May 2017 09:03 PM IST
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प्रतिक्षालय में बैठे मरीज और अस्पताल में हड़ताल की नोटिस
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में रविवार को सर्जरी विभागाध्यक्ष और डिप्टी चीफ प्राक्टर डॉ. मुमताज अंसारी की एक मरीज के तीमारदारों द्वारा पिटाई के विरोध में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं।
मंगलवार को उन्होंने सर सुंदरलाल अस्पताल के साथ ही ट्रॉमा सेंटर में भी कामकाज नहीं किया। सर सुंदरलाल अस्पताल की ओपीडी बंद करा दी। हालांकि इमरजेंसी और आईसीयू को हड़ताल से बाहर रखा गया है।
साथ ही, सीनियर डॉक्टर भी व्यवस्था संभालने में जुटे हैं। बावजूद इसके सुबह आठ बजे शुरू हुई हड़ताल से अस्पताल और ट्रामा सेंटर में यूपी, बिहार, झारखंड समेत अन्य जगहों से आने वाले हजारों मरीजों को परेशानी हुई। अधिकतर मरीजाें को बिना इलाज कराए घर लौटना पड़ा।
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इस बीच, हड़ताल की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे एसपी सिटी राजेश यादव, एसीएम नागेंद्र नाथ यादव ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय के साथ डॉक्टर लाउंज में बैठक की लेकिन कोई हल नहीं निकला।
करीब घंटे भर चली बैठक में जूनियर डॉक्टरों ने आरोपी तीमारदारों की गिरफ्तारी और वार्डों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग उठाई। वे इसे लेकर भी नाराज थे कि तीमारदाराें की गिरफ्तारी न होने पर मंगलवार से हड़ताल पर जाने की चेतावनी सोमवार को ही दी गई थी बावजूद इसके प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
चिकित्सा अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले हड़ताल खत्म करने को जूनियर डॉक्टर राजी नहीं हुए। इमरजेंसी, आईसीयू को छोड़ सभी चिकित्सकीय सेवाएं प्रभावित रहीं।
यूरोलॉजी, डेंटल, जीरियाट्रिक मेडिसीन, हेमाटोलॉजी सहित अन्य विभागों की ओपीडी में ताला बंद कराने के साथ ही आपरेशन थिएटर में भी जूनियर डॉक्टरों ने सेवाएं नहीं दीं।
न्यूरोलॉजी, मेडिसीन, पीडियाट्रिक मेडिसीन, ईएनटी सहित कुछ अन्य विभागों में सीनियर डॉक्टरों ने मरीज देखे लेकिन मरीजों का दबाव अधिक होने से कई को मायूस होना पड़ा।
पहले से जमा पर्ची मरीजों को वापस कर उन्हें लौटा दिया गया। नए मरीज भर्ती नहीं किए गए। ट्रॉमा सेंटर में भी सिर्फ सीनियर डॉक्टरों ने मरीज देखे।
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मंगलवार को उन्होंने सर सुंदरलाल अस्पताल के साथ ही ट्रॉमा सेंटर में भी कामकाज नहीं किया। सर सुंदरलाल अस्पताल की ओपीडी बंद करा दी। हालांकि इमरजेंसी और आईसीयू को हड़ताल से बाहर रखा गया है।
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साथ ही, सीनियर डॉक्टर भी व्यवस्था संभालने में जुटे हैं। बावजूद इसके सुबह आठ बजे शुरू हुई हड़ताल से अस्पताल और ट्रामा सेंटर में यूपी, बिहार, झारखंड समेत अन्य जगहों से आने वाले हजारों मरीजों को परेशानी हुई। अधिकतर मरीजाें को बिना इलाज कराए घर लौटना पड़ा।
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इस बीच, हड़ताल की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे एसपी सिटी राजेश यादव, एसीएम नागेंद्र नाथ यादव ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय के साथ डॉक्टर लाउंज में बैठक की लेकिन कोई हल नहीं निकला।
करीब घंटे भर चली बैठक में जूनियर डॉक्टरों ने आरोपी तीमारदारों की गिरफ्तारी और वार्डों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग उठाई। वे इसे लेकर भी नाराज थे कि तीमारदाराें की गिरफ्तारी न होने पर मंगलवार से हड़ताल पर जाने की चेतावनी सोमवार को ही दी गई थी बावजूद इसके प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
चिकित्सा अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले हड़ताल खत्म करने को जूनियर डॉक्टर राजी नहीं हुए। इमरजेंसी, आईसीयू को छोड़ सभी चिकित्सकीय सेवाएं प्रभावित रहीं।
यूरोलॉजी, डेंटल, जीरियाट्रिक मेडिसीन, हेमाटोलॉजी सहित अन्य विभागों की ओपीडी में ताला बंद कराने के साथ ही आपरेशन थिएटर में भी जूनियर डॉक्टरों ने सेवाएं नहीं दीं।
न्यूरोलॉजी, मेडिसीन, पीडियाट्रिक मेडिसीन, ईएनटी सहित कुछ अन्य विभागों में सीनियर डॉक्टरों ने मरीज देखे लेकिन मरीजों का दबाव अधिक होने से कई को मायूस होना पड़ा।
पहले से जमा पर्ची मरीजों को वापस कर उन्हें लौटा दिया गया। नए मरीज भर्ती नहीं किए गए। ट्रॉमा सेंटर में भी सिर्फ सीनियर डॉक्टरों ने मरीज देखे।
अस्पताल प्रशासन का दावा, 2395 मरीज देखे गए
बीएचयू अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बीच अस्पताल प्रशासन ने मंगलवार को 2395 मरीजों को देखे जाने का दावा किया है। अस्पताल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि सुबह 7 से 1.30 बजे तक 2700 ने ओपीडी का पर्चा कटाया, इसमें 2395 मरीजों का पंजीकरण ओपीडी में हुआ। इस दौरान 100 मरीज भर्ती किए गए। 92 डिस्चार्ज जबकि 38 का ऑपरेशन किया गया।
मंडलीय अस्पताल पर बढ़ा मरीजों का दबाव
बीएचयू में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मंडलीय अस्पताल में मरीजों का दबाव आम दिनों से अधिक रहा। बीएचयू से पर्चा वापस होने के बाद तमाम मरीजों को लेकर उनके परिवारवाले मंडलीय अस्पताल पहुंचे।
इसमें हीटस्ट्रोक, गले में संक्रमण आदि के मरीज अधिक रहे। यहां भी इमरजेंसी में सारे बेड फुल रहे। प्रमुख अधीक्षक डॉ. बीएन श्रीवास्तव ने कहा कि अस्पताल आने वाले सभी मरीजों का ओपीडी, इमरजेंसी में इलाज किया गया। किसी को कोई असुविधा नहीं हुई।